AVJ Developers और Rudra Buildwell Construction पर ‘No EMI till possession’ योजना के जरिए घर खरीदारों और निवेशकों को कथित तौर पर ठगने का आरोप; CBI की दो FIR के आधार पर PMLA के तहत कार्रवाई

होमबायर्स फ्रॉड केस में ED की दिल्ली-NCR में छापेमारी, बिल्डर-बैंक गठजोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग जांच तेज

Roopa
By Roopa
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नई दिल्ली: घर खरीदारों से कथित धोखाधड़ी और बिल्डर-बैंक गठजोड़ से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली-NCR में कई ठिकानों पर छापेमारी की है। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई दो अलग-अलग मामलों में दर्ज कथित होमबायर्स फ्रॉड की जांच के तहत की गई। ED ने गुरुवार को दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी अब उन वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों की जांच कर रही है, जिनका संबंध कथित धोखाधड़ी से हो सकता है।

अधिकारियों ने बताया कि ED की जांच Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत चल रही है। मामला रियल एस्टेट कंपनियों AVJ Developers (India) और Rudra Buildwell Construction से जुड़ा है। दोनों कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने बैंकों के साथ कथित गठजोड़ कर सबवेंशन योजनाओं के जरिए घर खरीदारों को ऐसी परियोजनाओं में निवेश के लिए प्रेरित किया, जिनमें उन्हें वर्षों बाद भी फ्लैट का कब्जा नहीं मिला।

‘No EMI till possession’ योजना का किया गया इस्तेमाल

जांच के अनुसार, कथित धोखाधड़ी में ‘No EMI till possession’ योजना महत्वपूर्ण थी। इस तरह की योजना में घर खरीदारों को यह भरोसा दिया जाता है कि फ्लैट का कब्जा मिलने तक उन्हें आवास ऋण की मासिक किस्त यानी EMI का भुगतान नहीं करना होगा। इस भरोसे के आधार पर खरीदारों ने संबंधित परियोजनाओं में फ्लैट बुक किए और बैंकों से होम लोन लिया।

CBI की जांच में कथित तौर पर सामने आया कि खरीदारों और निवेशकों ने फ्लैट बुक करने के बाद ऋण लिया, लेकिन कई वर्षों तक उन्हें उनके घरों का कब्जा नहीं दिया गया। इस स्थिति ने खरीदारों पर वित्तीय दबाव बढ़ाया और परियोजनाओं की समयसीमा तथा बिल्डरों की वित्तीय व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।

ED अधिकारियों के मुताबिक, एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि होम लोन के जरिए जुटाई गई रकम का इस्तेमाल किस तरह किया गया और क्या धन को किसी दूसरे उद्देश्य के लिए स्थानांतरित किया गया। जांच में उन बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन पर भी नजर रखी जा रही है, जो कथित बिल्डर-बैंक गठजोड़ से जुड़े हो सकते हैं।

CBI की दो FIR से शुरू हुई ED की जांच

ED का मामला CBI की दो अलग-अलग FIR पर आधारित है। CBI की शुरुआती जांच में आरोप लगाया गया था कि संबंधित बिल्डर कंपनियों ने घर खरीदारों और निवेशकों को कथित तौर पर ऐसी योजनाओं में पैसा लगाने के लिए प्रेरित किया, जिनमें कब्जा देने का भरोसा पूरा नहीं हुआ।

CBI के निष्कर्षों के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू से जांच शुरू की। PMLA के तहत एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करती है कि कथित अपराध से हासिल रकम को किस तरह छिपाया, स्थानांतरित या इस्तेमाल किया गया और क्या उससे संपत्ति या अन्य वित्तीय लाभ हासिल किए गए।

कई साल बाद भी नहीं मिला फ्लैट का कब्जा

मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि खरीदारों ने आवासीय परियोजनाओं में फ्लैट बुक करने के लिए होम लोन लिया, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी उन्हें संपत्तियों का कब्जा नहीं मिला। खरीदारों के लिए ऐसी स्थिति में एक ओर बैंक ऋण की देनदारी बनी रही, जबकि दूसरी ओर उन्हें बुक किए गए घर का लाभ नहीं मिल सका।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि परियोजनाओं के लिए जुटाई गई रकम का वास्तविक इस्तेमाल कहां हुआ। ED की तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय विवरणों की जांच से कथित मनी ट्रेल को समझने में मदद मिल सकती है।

बिल्डर-बैंक संबंध भी जांच के केंद्र में

ED की कार्रवाई में कथित बिल्डर-बैंक गठजोड़ भी जांच के प्रमुख पहलुओं में शामिल है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सबवेंशन योजना को लागू करने में संबंधित पक्षों की क्या भूमिका थी और क्या किसी स्तर पर नियमों या वित्तीय प्रक्रियाओं का कथित उल्लंघन हुआ।

फिलहाल ED की तलाशी से बरामद सामग्री और दस्तावेजों का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, जांच आगे बढ़ने के साथ कथित मनी ट्रेल, लाभार्थियों और संबंधित वित्तीय लेनदेन की तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।

मामला अभी जांच के चरण में है और आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा। ED की कार्रवाई से वर्षों से कब्जे का इंतजार कर रहे घर खरीदारों से जुड़े इस विवाद में वित्तीय लेनदेन और कथित बिल्डर-बैंक संबंधों की जांच तेज होने की संभावना है।

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