पुणे में 35 वर्षीय निजी कंपनी कर्मचारी से नौकरी दिलाने के नाम पर रकम लेने का आरोप; आरोपी ने कथित तौर पर PMC का फर्जी नियुक्ति पत्र दिया, जांच में अब तक चार अलग-अलग नौकरी धोखाधड़ी के मामले सामने आए

PMC में जूनियर इंजीनियर की नौकरी का झांसा देकर ₹15 लाख ठगे, गिरफ्तार आरोपी पर चौथा केस

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By Roopa
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पुणे: पुणे नगर निगम (PMC) में जूनियर इंजीनियर की नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक निजी इंजीनियरिंग कंपनी में कार्यरत 35 वर्षीय व्यक्ति से ₹15 लाख की कथित ठगी का मामला सामने आया है। शिकायत के आधार पर पर्वती पुलिस ने बुधवार को शिवानंद पाटिल के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया। खास बात यह है कि आरोपी पहले से ही नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के एक अन्य मामले में गिरफ्तार है। पुलिस के अनुसार, उसके खिलाफ अब तक चार अलग-अलग नौकरी धोखाधड़ी के मामले दर्ज हो चुके हैं।

पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता धायरी इलाके का रहने वाला है और एक निजी इंजीनियरिंग कंपनी में काम करता है। उसने आरोप लगाया कि दिसंबर 2023 से जुलाई के बीच आरोपी ने उससे संपर्क किया और PMC में जूनियर इंजीनियर के पद पर नौकरी दिलाने का भरोसा दिया। नौकरी की उम्मीद में शिकायतकर्ता ने आरोपी को अलग-अलग समय पर कुल ₹15 लाख दिए।

फर्जी नियुक्ति पत्र देकर बढ़ाया भरोसा

शिकायत के अनुसार, आरोपी ने इस साल की शुरुआत में शिकायतकर्ता को PMC का कथित नियुक्ति पत्र भी दिया। दस्तावेज देखकर शिकायतकर्ता को भरोसा हो गया कि उसकी नौकरी की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसके बाद जब वह नियुक्ति पत्र लेकर पुणे नगर निगम के अधिकारियों के पास पहुंचा और दस्तावेज की पुष्टि कराने की कोशिश की, तो उसे पता चला कि नियुक्ति पत्र फर्जी है।

PMC अधिकारियों से जानकारी मिलने के बाद शिकायतकर्ता को कथित धोखाधड़ी का पता चला। इसके बाद उसने पुलिस से संपर्क किया और आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी ने शिकायतकर्ता से रकम किस तरीके से ली और क्या इस रकम का इस्तेमाल किसी अन्य व्यक्ति या नेटवर्क के जरिए किया गया।

पहले से गिरफ्तार है आरोपी

पर्वती पुलिस के अनुसार, शिवानंद पाटिल को शिवाजीनगर पुलिस पहले ही नौकरी दिलाने के नाम पर कथित धोखाधड़ी के एक मामले में गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस जांच में सामने आया है कि उसके खिलाफ इसी तरह के आरोपों से जुड़े कई मामले दर्ज हैं।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी पर अब तक चार अलग-अलग नौकरी धोखाधड़ी के मामले दर्ज हो चुके हैं। इससे जांचकर्ताओं को आशंका है कि नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का यह मामला अकेला नहीं है और आरोपी ने अलग-अलग लोगों को सरकारी या प्रतिष्ठित संस्थानों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर रकम हासिल की हो सकती है।

सरकारी नौकरी का झांसा बन रहा ठगी का तरीका

इस मामले में कथित तौर पर सरकारी संस्था का नाम इस्तेमाल किया गया। नौकरी की तलाश कर रहे उम्मीदवारों को सरकारी विभागों में नियुक्ति का भरोसा दिलाकर बड़ी रकम लेने के बाद फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराना ऐसे मामलों में ठगी का एक आम तरीका रहा है। आरोपी कथित तौर पर इसी तरीके का इस्तेमाल कर शिकायतकर्ता का भरोसा जीतने में सफल रहा।

फर्जी नियुक्ति पत्र मिलने के बाद शिकायतकर्ता ने जब स्वयं PMC से उसकी पुष्टि कराई, तब दस्तावेज की वास्तविकता सामने आई। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि फर्जी नियुक्ति पत्र किसने तैयार किया और क्या आरोपी के साथ इस काम में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था।

पुराने मामलों से भी जोड़ी जा रही जांच

आरोपी पहले से पुलिस हिरासत में होने के कारण पर्वती पुलिस उसके खिलाफ दर्ज पुराने मामलों और नए मामले के बीच संभावित संबंधों की भी जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या अन्य लोगों को भी इसी तरह सरकारी नौकरी का झांसा देकर रकम ली गई।

जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि आरोपी ने कथित तौर पर नौकरी दिलाने के लिए किस स्तर तक संपर्क होने का दावा किया था। यदि जांच में फर्जी दस्तावेज तैयार करने या अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है, तो मामले में आगे और धाराएं या आरोपी जुड़ सकते हैं।

फिलहाल पर्वती पुलिस ने शिकायत के आधार पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिकायतकर्ता से रकम के लेन-देन, फर्जी नियुक्ति पत्र और आरोपी के साथ हुई बातचीत से जुड़े दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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