सर्कुलर ट्रेडिंग के जरिए फर्जी फर्मों में रकम घुमाकर ₹100 करोड़ से अधिक की कथित GST चोरी का खुलासा हुआ है।

सर्कुलर ट्रेडिंग से 100 करोड़ से ज्यादा की GST चोरी का खुलासा, फर्जी फर्मों में रकम घुमाकर बनाया कागजी कारोबार

Team The420
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लखनऊ: राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (SSI) की जांच में बिना वास्तविक माल की खरीद-बिक्री के कागजों पर करोड़ों रुपये का कारोबार खड़ा कर 100 करोड़ रुपये से अधिक की कथित GST चोरी का मामला सामने आया है। जांच में फर्जी फर्मों के बैंक खातों के जरिए रकम घुमाकर फर्जी बिल और ई-वे बिल तैयार किए जाने तथा इनके आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ लेने का आरोप है। विभाग को जांच के दौरान कई फर्मों के बीच सर्कुलर ट्रेडिंग की कड़ी मिली है। नेटवर्क से जुड़े मामलों में अब तक पांच करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जमा कराए जाने की जानकारी सामने आई है।

फर्जी फर्मों के जरिए तैयार होती थी कारोबार की कड़ी

राज्य कर विभाग के अपर आयुक्त ग्रेड-2 आशीष निरंजन के अनुसार, नेटवर्क में ऐसी फर्मों का इस्तेमाल किया गया, जिनके बैंक खातों के जरिए रकम का लेनदेन दिखाया जाता था। इसके बाद उसी आधार पर फर्जी बिल और ई-वे बिल तैयार किए जाते थे। कागजों पर माल की खरीद-बिक्री दिखाकर संबंधित फर्मों को ITC का लाभ दिलाने का प्रयास किया जाता था।

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जांच में सामने आया कि कई मामलों में बैंक खातों में रकम का वास्तविक कारोबार से कोई सीधा संबंध नहीं था। इसके बावजूद दस्तावेजों में लेनदेन दर्ज कर उसे वैध कारोबारी गतिविधि के तौर पर पेश करने की कोशिश की गई।

एफएस ट्रेडर्स की जांच से खुला मामला

विभाग को बड़े बाजार स्थित एफएस ट्रेडर्स के संबंध में गोपनीय सूचना मिली थी। इसके बाद 22 मई 2024 को जांच की गई। जांच के दौरान फर्म के स्तर पर कोई वास्तविक कारोबार नहीं मिला। अधिकारियों के अनुसार, फर्म का इस्तेमाल कथित तौर पर फर्जी बिल तैयार करने और दूसरी फर्मों को ITC पास ऑन करने के लिए किया जा रहा था।

जांच के बाद मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई। इसके बाद बैंक खातों, बिलों, ई-वे बिल और अन्य कारोबारी रिकॉर्ड की पड़ताल आगे बढ़ाई गई। इसी क्रम में नेटवर्क से जुड़ी दूसरी फर्मों और उनके बीच हुए लेनदेन की जानकारी सामने आती गई।

सागर अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद सामने आई चेन

पुलिस द्वारा मुख्य आरोपी सागर अग्रवाल की गिरफ्तारी और उससे मिली जानकारी के आधार पर बैंक खातों की जांच की गई। इस पड़ताल में कथित सर्कुलर ट्रेडिंग की पूरी कड़ी सामने आने लगी।

जांच के अनुसार, नेटवर्क में पांच से छह फर्मों की चेन बनाई गई थी। इसमें सबसे निचले स्तर पर कुछ फर्में कथित तौर पर पूरी तरह बोगस थीं, जबकि ऊपर की कड़ी में वास्तविक कारोबारी लाभार्थी मौजूद थे। इसी संरचना के जरिए फर्जी खरीद और बिक्री का रिकॉर्ड तैयार किया जाता था।

एक ही रकम कई खातों में घूमती थी

जांच में सामने आए तरीके के अनुसार, मुख्य लाभार्थी फर्म अपने बैंक खाते से करीब ₹10 लाख से ₹20 लाख तक की रकम नीचे वाली फर्म के खाते में भेजती थी। इसके बदले उसे कथित तौर पर फर्जी बिल उपलब्ध कराए जाते थे। इसके बाद यही रकम नेटवर्क की अन्य फर्मों के खातों में भेजकर उनके बीच भी खरीद-बिक्री का कागजी रिकॉर्ड तैयार किया जाता था।

आखिर में रकम अंतिम बोगस फर्म के खाते से निकाल ली जाती थी। कथित तौर पर कमीशन काटने के बाद पैसा फिर मुख्य लाभार्थी तक पहुंचा दिया जाता था। इस तरह एक ही रकम कई बैंक खातों में घूमती रहती थी और उसके आधार पर करोड़ों रुपये का कागजी कारोबार तैयार किया जाता था, जबकि वास्तविक माल की आवाजाही नहीं होती थी।

ई-वे बिल से लेनदेन को असली दिखाने की कोशिश

जांच में यह भी सामने आया कि नेटवर्क फर्जी बिलों के साथ ई-वे बिल और बैंक ट्रांजेक्शन का सहारा लेता था। इन दस्तावेजों के जरिए कारोबारी लेनदेन को वास्तविक दिखाने का प्रयास किया जाता था, ताकि विभागीय जांच की स्थिति में खरीद-बिक्री को कागजों के आधार पर सही साबित किया जा सके।

हालांकि, जांच में जब दस्तावेजों और वास्तविक कारोबारी गतिविधियों का मिलान किया गया तो माल की वास्तविक खरीद-बिक्री के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले। इसके बाद विभाग ने बैंक खातों और मनी ट्रेल की गहन जांच शुरू की।

नेपाल से संचालन के भी संकेत

बैंक खातों, डिजिटल फुटप्रिंट और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल में नेटवर्क के कई राज्यों तक फैले होने के संकेत मिले हैं। विभाग के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क को नेपाल से संचालित किए जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई है। हालांकि, इस पहलू से जुड़े तथ्यों और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच अभी जारी है।

विभाग अब फर्जी फर्मों, बैंक खातों, लाभार्थियों और कथित संचालकों के बीच संबंधों की पड़ताल कर रहा है। अपर आयुक्त आशीष निरंजन के अनुसार, सर्कुलर ट्रेडिंग के जरिए GST चोरी करने वाले नेटवर्क की पहचान कर उनके खिलाफ वैधानिक और दंडात्मक कार्रवाई जारी है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क में शामिल अन्य फर्मों और लोगों की भूमिका भी सामने आने की संभावना है।

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