कानपुर: कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) की रतनपुर विस्तार योजना में करीब डेढ़ करोड़ रुपये कीमत के एक M.I.G. प्लॉट की कथित फर्जी रजिस्ट्री कराने की साजिश का खुलासा हुआ है। प्लॉट नंबर A-3 को उसकी वास्तविक आवंटी रमणी देवी की जगह एक दूसरी महिला को रमणी देवी के रूप में पेश कर उसके नाम दर्ज कराने की तैयारी की जा रही थी। आरोप है कि इसके लिए KDA की पुरानी फाइल में दस्तावेजों को बदलने, डुप्लीकेट कागजात लगाने और फर्जी पहचान तैयार करने का प्रयास किया गया। मामले में KDA की सतर्कता के कारण रजिस्ट्री समय रहते रुक गई और अब पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
25 साल पुराने आवंटन से जुड़ा था प्लॉट
रतनपुर विस्तार योजना का यह प्लॉट करीब 25 वर्ष पहले रमणी देवी को आवंटित किया गया था। बताया गया है कि किसी कारण से आवंटी KDA की पूरी बकाया धनराशि जमा नहीं कर सकी थीं। भुगतान लंबित रहने के कारण प्लॉट की रजिस्ट्री भी पूरी नहीं हो पाई थी। इसी स्थिति का कथित तौर पर दलालों ने फायदा उठाने की कोशिश की।
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आरोप है कि KDA के कुछ कर्मचारियों के साथ कथित मिलीभगत कर दलालों ने प्लॉट को हड़पने और उसे किसी अन्य व्यक्ति के नाम कराने की योजना तैयार की। प्लॉट की अनुमानित कीमत करीब ₹1.5 करोड़ बताई जा रही है। साजिशकर्ताओं ने रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए KDA खाते में करीब ₹30 लाख की बकाया राशि भी जमा कराई।
पुरानी फाइल में तैयार की गई ‘नई रमणी’
जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, KDA की फाइल में मौजूद वास्तविक आवंटी रमणी देवी से जुड़े रिकॉर्ड की जगह दूसरी महिला को रमणी देवी के रूप में पेश करने की तैयारी की गई। इसके लिए कथित तौर पर डुप्लीकेट और फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। महिला की पहचान साबित करने के लिए फर्जी आईडी तैयार किए जाने का भी आरोप है।
साजिश का उद्देश्य यह दिखाना था कि वास्तविक आवंटी स्वयं रजिस्ट्री कराने के लिए मौजूद है और उसने प्लॉट का बकाया भुगतान पूरा कर दिया है। करीब ₹30 लाख जमा होने के बाद रजिस्ट्री कराने का आधार मजबूत करने की कोशिश की गई। आरोप है कि इसके जरिए अधिकारियों पर यह दबाव बनाने की रणनीति थी कि आवंटी लंबे समय से परेशान है और अब उसकी रजिस्ट्री जल्द पूरी की जानी चाहिए।
मार्च में अधिकारी को हुआ संदेह
मामले में अहम मोड़ मार्च में आया, जब KDA की ओएसडी मीनाक्षी गुप्ता को रजिस्ट्री के लिए पेश की जा रही महिला की पहचान पर संदेह हुआ। उन्हें आशंका हुई कि महिला वास्तविक आवंटी रमणी देवी नहीं है। इसके बाद उन्होंने मामले की जांच कराई और रजिस्ट्री की प्रक्रिया को रोक दिया।
अधिकारी स्तर पर दस्तावेजों और फाइल में दर्ज जानकारी की पड़ताल की गई। जांच के दौरान कथित तौर पर दस्तावेजों में विसंगतियां सामने आईं। इसके बाद अधिकारियों ने रजिस्ट्री को आगे बढ़ाने से रोक दिया। KDA सचिव अभय कुमार पांडेय ने भी रजिस्ट्री रोकने के निर्देश दिए।
फर्जी दस्तावेजों से कब्जाने की कोशिश
प्रारंभिक जांच के अनुसार, कथित साजिश में केवल फर्जी महिला को सामने लाने तक मामला सीमित नहीं था। पुरानी फाइल में मौजूद रिकॉर्ड और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर पूरी प्रक्रिया को वास्तविक दिखाने की कोशिश की गई। आरोप है कि फर्जी पहचान पत्र और अन्य कागजात के जरिए यह साबित करने का प्रयास हुआ कि रजिस्ट्री कराने वाली महिला ही मूल आवंटी है।
यदि रजिस्ट्री हो जाती तो करीब ₹1.5 करोड़ कीमत के प्लॉट पर कथित तौर पर कब्जे का रास्ता साफ हो सकता था। इसके बाद इसे बाजार में बेचकर बड़ी रकम हासिल करने की योजना थी।
एफआईआर के बाद जांच तेज
KDA अधिकारियों की सतर्कता से कथित फर्जीवाड़े की कोशिश रजिस्ट्री पूरी होने से पहले ही पकड़ में आ गई। मामले की जानकारी सामने आने के बाद थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए, फर्जी महिला को कौन लेकर आया और KDA की फाइल तक किसकी पहुंच थी।
जांच में दलालों और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या इसी तरीके से KDA की अन्य संपत्तियों में भी फर्जीवाड़े की कोशिश की गई है। फिलहाल रतनपुर विस्तार योजना के प्लॉट की रजिस्ट्री रोक दी गई है और कथित साजिश में शामिल लोगों की पहचान तथा उनकी भूमिका की जांच जारी है।
