नोएडा: जिला अस्पताल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के नियमों की कथित अनदेखी कर 15 स्टाफ नर्स और दो लैब टेक्नीशियन की भर्ती किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि इन 17 स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति जिला अस्पताल स्तर से की गई, जबकि मई 2023 के बाद संबंधित पदों पर स्थानीय स्तर से भर्ती की अनुमति नहीं थी। मामला सामने आने के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने सभी 17 स्वास्थ्यकर्मियों का वेतन रोक दिया है। प्रारंभिक रिकॉर्ड के अनुसार, अगस्त 2023 से जून 2026 तक शुरुआती आठ कर्मियों के वेतन पर करीब ₹58 लाख खर्च हुए, जबकि वर्ष 2025 में नियुक्त नौ स्टाफ नर्सों पर करीब ₹21 लाख का भुगतान किया गया। इस तरह कुल वेतन भुगतान करीब ₹79 लाख बताया जा रहा है।
अगस्त 2023 में हुई आठ नियुक्तियां
जानकारी के अनुसार, NHM के तहत अगस्त 2023 में छह स्टाफ नर्स और दो लैब टेक्नीशियन की नियुक्ति की गई थी। इसके बाद वर्ष 2025 के अलग-अलग महीनों में नौ अन्य स्टाफ नर्सों को तैनात किया गया। सभी की नियुक्ति एजेंसी के माध्यम से जिला अस्पताल प्रबंधन की ओर से की गई थी।
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बताया गया है कि मई 2023 के बाद शासन ने मानव संसाधन से जुड़े भर्ती नियमों में बदलाव किया था। इसके तहत स्टाफ नर्स और लैब टेक्नीशियन की भर्ती जिला अस्पताल स्तर पर नहीं की जा सकती थी। इन पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया लखनऊ स्थित NHM मुख्यालय स्तर से किए जाने का प्रावधान था। इसके बावजूद जिला स्तर पर नियुक्तियां किए जाने से पूरी प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई।
पदभार की तारीख से सामने आई अनियमितता
मामले का खुलासा उस समय हुआ, जब NHM के तहत एजेंसी के माध्यम से तैनात स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या और उनके पदभार ग्रहण करने की तारीख से संबंधित जानकारी मांगी गई। जिला स्तर से सभी कर्मचारियों का विवरण लखनऊ स्थित NHM कार्यालय भेजा गया।
रिकॉर्ड की जांच के दौरान पता चला कि 17 स्वास्थ्यकर्मियों का पदभार मुख्यालय स्तर से नहीं कराया गया था। इसके बजाय उनकी नियुक्ति और पदभार ग्रहण करने की प्रक्रिया सीधे जिला अस्पताल स्तर पर पूरी की गई थी। इस जानकारी के बाद इन नियुक्तियों की वैधता पर सवाल उठे और CMO कार्यालय से पूरे मामले की जानकारी मांगी गई।
जांच में प्रथम दृष्टया नियुक्तियों को नियमों के विपरीत पाया गया। इसके बाद सभी 17 स्वास्थ्यकर्मियों का वेतन रोकने का आदेश जारी किया गया। अब भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
करीब ₹79 लाख वेतन भुगतान की जानकारी
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, अगस्त 2023 में नियुक्त छह स्टाफ नर्स और दो लैब टेक्नीशियन को अगस्त 2023 से जून 2026 तक करीब ₹58 लाख वेतन का भुगतान किया गया। वहीं वर्ष 2025 में नियुक्त नौ स्टाफ नर्सों पर करीब ₹21 लाख खर्च होने की जानकारी सामने आई है।
इस तरह 17 स्वास्थ्यकर्मियों से संबंधित वेतन भुगतान करीब ₹79 लाख तक पहुंचता है। अब जांच में यह भी देखा जा रहा है कि नियमों में बदलाव के बावजूद जिला स्तर पर नियुक्तियां किस प्रक्रिया के तहत की गईं और इसके लिए किस स्तर से अनुमति दी गई थी।
भर्ती एजेंसी की भूमिका भी जांच के दायरे में है। अधिकारियों द्वारा यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि एजेंसी को नियुक्ति की अनुमति किस आधार पर दी गई और जिला अस्पताल प्रबंधन ने किन दस्तावेजों के आधार पर कर्मचारियों को तैनात किया।
अधिकारियों ने क्या कहा
CMO डॉ. मदन मोहन मणि त्रिपाठी ने बताया कि स्वास्थ्यकर्मियों की भर्ती नियमों के खिलाफ की गई थी। उनके अनुसार, 2023 में मानव संसाधन संबंधी नियमों में बदलाव के बाद स्टाफ नर्स और लैब टेक्नीशियन की भर्ती जिला अस्पताल स्तर पर नहीं की जा सकती थी। मामले की जानकारी मिलने के बाद सभी संबंधित कर्मचारियों का वेतन रोक दिया गया है।
वहीं, जिला अस्पताल के CMS डॉ. अशोक कुमार झा ने बताया कि CMO कार्यालय से 17 स्वास्थ्यकर्मियों का वेतन रोकने का पत्र मिला है। संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों को मामले की जानकारी लेने के लिए CMO कार्यालय भेजा गया है। साथ ही भर्ती से जुड़े नियमों और दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
फिलहाल जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया, पदभार ग्रहण की तारीख, एजेंसी की भूमिका और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की विस्तृत जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नियमों का उल्लंघन किस स्तर पर हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
