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फिल्म निर्माण के नाम पर ₹78.29 लाख की ठगी, चार साल बाद मुंबई से गिरफ्तार हुआ वांछित आरोपी

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By Roopa
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वाराणसी: फिल्म निर्माण के नाम पर निवेश कराकर ₹78.29 लाख की कथित ठगी करने के मामले में वाराणसी पुलिस को चार वर्ष बाद बड़ी सफलता मिली है। सारनाथ थाना पुलिस ने लंबे समय से फरार चल रहे वांछित आरोपी जसवंत (47) को मुंबई के अंधेरी स्थित ओशिवारा क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। आरोपी के खिलाफ न्यायालय से गैर-जमानती वारंट जारी था। गिरफ्तारी के बाद उसे ट्रांजिट रिमांड पर वाराणसी लाकर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

पुलिस के अनुसार, यह मामला फिल्म निर्माण और उसके प्रचार-प्रसार के नाम पर निवेश लेकर धोखाधड़ी करने से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपी ने फिल्म बनाने का भरोसा दिलाकर बड़ी राशि प्राप्त की, लेकिन न तो फिल्म का निर्माण किया और न ही निवेशकों की रकम वापस की। लंबे समय तक भुगतान टालने के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

मामले की शुरुआत 26 अप्रैल 2022 को हुई थी, जब तत्कालीन चौबेपुर थाना क्षेत्र, जो वर्तमान में सारनाथ थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है, के रुस्तमपुर निवासी सुरेंद्र कुमार यादव ने शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया कि उनके भाई वीरेंद्र यादव की फर्म से फिल्म निर्माण के लिए ₹78 लाख 29 हजार लिए गए थे। आरोप है कि रकम लेने के बाद आरोपी ने अपने वादे पूरे नहीं किए और पैसा भी वापस नहीं लौटाया। कई बार संपर्क और प्रयास के बावजूद समाधान नहीं निकलने पर पीड़ित ने पुलिस की शरण ली।

प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपी की तलाश में लगातार प्रयास किए। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी वाराणसी छोड़कर मुंबई में रह रहा है तथा गिरफ्तारी से बचने के लिए समय-समय पर अपना ठिकाना बदलता रहा। साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय से उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कराया गया, जिसके बाद उसकी गिरफ्तारी के लिए विशेष प्रयास तेज किए गए।

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जांच के क्रम में सारनाथ थाना पुलिस की टीम मुंबई पहुंची और स्थानीय ओशिवारा थाना पुलिस की सहायता से अंधेरी स्थित वीरा देसाई रोड के पटेलवाड़ी प्रजापति कंपाउंड में दबिश दी। वहां से आरोपी जसवंत को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे अंधेरी रेलवे मोबाइल कोर्ट में पेश किया गया, जहां से 48 घंटे का ट्रांजिट रिमांड मिलने पर पुलिस उसे वाराणसी लेकर आई। इसके बाद स्थानीय न्यायालय में पेशी के उपरांत उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह लंबे समय से फिल्म व्यवसाय से जुड़ा रहा है और फिल्म प्रोडक्शन, निर्माण तथा प्रचार-प्रसार से संबंधित कार्य करता रहा है। इसी दौरान उसकी मुलाकात शिवबचन यादव से हुई थी, जिसके माध्यम से फिल्म निर्माण की योजना तैयार की गई थी। हालांकि, पुलिस आरोपी के इन दावों का स्वतंत्र रूप से सत्यापन कर रही है और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जारी है।

जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं फिल्म निर्माण या निवेश के नाम पर अन्य लोगों से भी धन तो नहीं लिया गया था। यदि जांच के दौरान ऐसे अन्य पीड़ित सामने आते हैं तो उनके बयान दर्ज कर मामले को जांच में शामिल किया जाएगा। पुलिस संबंधित वित्तीय लेन-देन, दस्तावेजों और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की भी पड़ताल कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कथित धोखाधड़ी का दायरा कितना व्यापक था। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी और यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी विधिक कार्रवाई की जाएगी।

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