कानपुर में फर्जी पुलिस और क्राइम ब्रांच अधिकारी बनकर ठगी करने वाले साइबर गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है।

कानपुर में फर्जी पुलिस कॉल साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़, 13 आरोपी गिरफ्तार; 189 से अधिक शिकायतों से जुड़े तार

Team The420
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कानपुर: उत्तर प्रदेश पुलिस ने कानपुर के सचेंडी क्षेत्र में संचालित एक कथित साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। 125 पुलिसकर्मियों और ड्रोन निगरानी की मदद से चलाए गए विशेष अभियान में चार गांवों में एक साथ दबिश देकर यह कार्रवाई की गई। पुलिस के अनुसार आरोपी खुद को पुलिस या क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर लोगों को डराते-धमकाते थे और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर देशभर के लोगों से कथित रूप से ठगी करते थे। मामले में 20 से अधिक अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।

पुलिस के अनुसार खुफिया सूचना और तकनीकी निगरानी के आधार पर सचेंडी थाना क्षेत्र के चार गांवों में संयुक्त अभियान चलाया गया। कार्रवाई के दौरान ड्रोन के माध्यम से पूरे इलाके की निगरानी की गई और पुलिस टीमों ने घेराबंदी कर आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की गतिविधियों और अन्य सदस्यों की भूमिका की जांच कर रही हैं।

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी फोन कर स्वयं को पुलिस अधिकारी या क्राइम ब्रांच का कर्मचारी बताते थे। वे पीड़ितों को झूठे आपराधिक मामलों में फंसाने, अश्लील वीडियो देखने या अन्य अपराधों में संलिप्त होने का डर दिखाकर तत्काल धनराशि जमा कराने का दबाव बनाते थे। इसके अलावा आरोपी प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झूठा आश्वासन देकर भी लोगों से धन ऐंठने का आरोप है।

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पुलिस के अनुसार गिरोह दो अलग-अलग टीमों में काम करता था। पहली टीम पीड़ितों को धमकी भरे फोन करती थी, जबकि दूसरी टीम कॉल के दौरान बैकग्राउंड में पुलिस सायरन और अन्य ध्वनियां चलाती थी, जिससे पीड़ितों को यह विश्वास हो जाए कि वे वास्तव में किसी पुलिस नियंत्रण कक्ष या जांच एजेंसी से बात कर रहे हैं।

जांच में यह भी सामने आया कि पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए आरोपियों ने गांवों तक जाने वाले कुछ रास्तों को कथित रूप से खुदवा दिया था, ताकि पुलिस वाहन आसानी से वहां तक न पहुंच सकें और उन्हें भागने का समय मिल सके। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की उम्र 18 से 30 वर्ष के बीच है। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि अधिकांश आरोपी पांचवीं, आठवीं, हाईस्कूल या इंटरमीडिएट तक शिक्षित हैं, जबकि कुछ ही स्नातक हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या इस गिरोह को किसी बड़े संगठित साइबर अपराध नेटवर्क से तकनीकी सहायता या प्रशिक्षण प्राप्त था।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 29 मोबाइल फोन, तीन कारें और कई डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं। प्रारंभिक आकलन के अनुसार गिरोह ने पिछले दो से तीन वर्षों में लगभग 200 लोगों को निशाना बनाकर ₹2 करोड़ से अधिक की कथित ठगी की है। पुलिस के अनुसार राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर आरोपियों से संबंधित लगभग 189 शिकायतें दर्ज हैं, जो दिल्ली, केरल, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और उत्तराखंड सहित कई राज्यों से जुड़ी हैं।

साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, साइबर अपराधी सोशल इंजीनियरिंग के तहत पुलिस या अन्य सरकारी एजेंसियों का नाम लेकर लोगों में भय पैदा करते हैं और तत्काल भुगतान कराने का दबाव बनाते हैं। उन्होंने सलाह दी कि किसी भी धमकी भरे फोन कॉल के आधार पर कभी भी धनराशि स्थानांतरित न करें और ऐसे मामलों में संबंधित पुलिस प्राधिकरण या आधिकारिक सरकारी माध्यमों से जानकारी की पुष्टि अवश्य करें।

पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है। डिजिटल साक्ष्यों, बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन का विश्लेषण कर फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है। जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां तथा अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। सभी आरोप फिलहाल जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।

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