प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में साइबर अपराधियों ने लोगों को निशाना बनाने के लिए एक नया और अधिक खतरनाक तरीका अपनाया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, साइबर ठग अब केवल ओटीपी हासिल करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि फर्जी APK (Android Package Kit) फाइल, स्क्रीन शेयरिंग और रिमोट एक्सेस एप्लिकेशन के माध्यम से पूरे मोबाइल फोन का नियंत्रण अपने हाथ में ले रहे हैं। इसके बाद वे बैंकिंग ऐप, एसएमएस, डिजिटल वॉलेट और संपर्क सूची तक पहुंच बनाकर वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे हैं। कई मामलों में आरोपियों ने पीड़ितों के मोबाइल से उनके परिचितों को संदेश भेजकर भी धन की मांग की है।
पुलिस के अनुसार, राजपुर क्षेत्र के एक होटल कारोबारी को व्हाट्सएप पर पुलिस अधिकारी की तस्वीर लगी प्रोफाइल से फर्जी ई-चालान भेजा गया। जैसे ही उन्होंने चालान देखने के लिए भेजी गई APK फाइल डाउनलोड की, मोबाइल कथित रूप से साइबर अपराधियों के नियंत्रण में चला गया। जांच के अनुसार इसके बाद उनके बैंक खाते से तीन अलग-अलग लेनदेन में लगभग ₹4.34 लाख निकाल लिए गए।
इसी प्रकार नैनी क्षेत्र की एक महिला शिक्षिका को शादी के निमंत्रण के नाम पर एक फर्जी APK फाइल भेजी गई। पुलिस के अनुसार फाइल डाउनलोड करते ही मोबाइल का नियंत्रण साइबर अपराधियों के हाथ में चला गया और उनके बैंक खाते से लगभग ₹1.63 लाख की धनराशि निकाल ली गई। दोनों मामलों में डिजिटल साक्ष्यों और बैंकिंग ट्रेल की जांच की जा रही है।
साइबर अपराधियों ने कथित तौर पर कई प्रमुख व्यक्तियों को भी निशाना बनाया। जांच के अनुसार इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संयुक्त कुलसचिव मेजर डॉ. हर्ष कुमार तथा मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. एस.पी. सिंह के मोबाइल फोन भी इसी प्रकार के हमलों का शिकार हुए। आरोप है कि मोबाइल तक अनधिकृत पहुंच मिलने के बाद अपराधियों ने उनके संपर्कों को सहायता के नाम पर धन भेजने के संदेश भेजे। पुलिस इन घटनाओं के डिजिटल ट्रेल और संबंधित खातों की जांच कर रही है।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, APK आधारित मैलवेयर हमले वर्तमान समय में सबसे खतरनाक सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों में शामिल हैं। अपराधी पुलिस, बैंक, कूरियर सेवा, बिजली विभाग, ट्रैफिक चालान, शादी के निमंत्रण या सरकारी योजना के नाम पर फर्जी APK फाइल भेजकर लोगों को उसे इंस्टॉल करने के लिए प्रेरित करते हैं। एक बार फाइल इंस्टॉल होने के बाद मोबाइल पर रिमोट एक्सेस प्राप्त कर बैंकिंग ऐप, ओटीपी, एसएमएस, संपर्क सूची और अन्य संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाई जा सकती है।
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि किसी भी अनजान स्रोत से प्राप्त APK फाइल कभी डाउनलोड या इंस्टॉल न करें। मोबाइल में “Install from Unknown Sources” का विकल्प बंद रखें, किसी भी व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप सक्रिय न करें और केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही एप्लिकेशन डाउनलोड करें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बैंक, पुलिस, न्यायालय या कोई भी सरकारी विभाग व्हाट्सएप या एसएमएस के माध्यम से APK फाइल भेजकर उसे इंस्टॉल करने के लिए नहीं कहता।
पुलिस के अनुसार, इस वर्ष प्रयागराज साइबर क्राइम थाने में 49 तथा साइबर सेल में 201 साइबर अपराध के मामले दर्ज किए जा चुके हैं। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी संदिग्ध लिंक, APK फाइल या डिजिटल धोखाधड़ी का सामना हो तो तुरंत संबंधित बैंक को सूचित करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। मामले की जांच जारी है और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
