नई दिल्ली: Google DeepMind के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) डेमिस हसबिस ने चेतावनी दी है कि आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI) यानी ऐसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता जो मानव की क्षमता के बराबर या उससे अधिक स्तर पर कार्य कर सके, अगले तीन से पांच वर्षों के भीतर वास्तविकता बन सकती है। उन्होंने कहा कि यह तकनीक मानव समाज में अभूतपूर्व परिवर्तन ला सकती है, लेकिन इसके सुरक्षित विकास के लिए मजबूत सुरक्षा मानकों और वैश्विक नियामक ढांचे की आवश्यकता होगी, ताकि साइबर सुरक्षा और जैविक सुरक्षा से जुड़े गंभीर जोखिमों को रोका जा सके।
हसबिस के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का तेजी से हो रहा विकास मानव इतिहास में आग और बिजली की खोज जैसी परिवर्तनकारी घटना साबित हो सकता है। उनका कहना है कि एआई वैज्ञानिक अनुसंधान, उद्योग और वैश्विक अर्थव्यवस्था को इतनी तेजी से बदल सकता है कि इसका प्रभाव औद्योगिक क्रांति से भी कई गुना अधिक व्यापक और तेज होगा।
उन्होंने कहा कि एजीआई नई दवाओं की खोज, स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के विकास और उन्नत सामग्रियों (Advanced Materials) के निर्माण जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसके माध्यम से जटिल वैज्ञानिक अनुसंधानों में लगने वाला समय काफी कम हो सकता है और मानवता के सामने मौजूद कई बड़ी चुनौतियों के समाधान तेजी से विकसित किए जा सकते हैं।
हालांकि, हसबिस ने आगाह किया कि यदि अत्यधिक सक्षम एआई प्रणालियों को पर्याप्त सुरक्षा उपायों और प्रभावी निगरानी के बिना विकसित किया गया, तो उनका दुरुपयोग साइबर हमलों को अधिक प्रभावी बनाने, दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों को बढ़ावा देने या जैविक खतरों से जुड़े अनुसंधानों को तेज करने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे जोखिमों को कम करने के लिए मजबूत सुरक्षा तंत्र और प्रभावी शासन व्यवस्था अनिवार्य है।
उन्होंने यह भी चिंता जताई कि वर्तमान में कई देश और प्रौद्योगिकी कंपनियां एआई सुरक्षा मानकों को प्राथमिकता देने के बजाय वैश्विक एआई प्रतिस्पर्धा में आगे निकलने पर अधिक ध्यान दे रही हैं। उनके अनुसार, शक्तिशाली एआई तकनीकों का सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग और साझा सुरक्षा मानकों का विकास आवश्यक है।
Future Crime Research Foundation के अनुसार, एआई का तेजी से बढ़ता उपयोग साइबर सुरक्षा क्षेत्र में नए अवसरों के साथ नई चुनौतियां भी लेकर आया है। जहां एआई साइबर खतरों की पहचान, स्वचालित सुरक्षा प्रणाली और डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बनाने में मदद कर सकता है, वहीं यही तकनीक अधिक उन्नत फ़िशिंग हमलों, डीपफेक, सोशल इंजीनियरिंग और मालवेयर जैसे साइबर अपराधों को भी अधिक प्रभावी बना सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एजीआई का भविष्य केवल तकनीकी प्रगति पर निर्भर नहीं करेगा, बल्कि प्रभावी नियमन, वैश्विक सहयोग और मजबूत सुरक्षा ढांचे पर भी समान रूप से आधारित होगा। उनका कहना है कि नवाचार और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना ही यह सुनिश्चित करेगा कि उन्नत एआई तकनीक मानवता के लिए लाभकारी सिद्ध हो और उससे जुड़े संभावित जोखिमों को न्यूनतम रखा जा सके।
