आगरा (उत्तर प्रदेश): आगरा की एक अदालत ने हत्या के एक मामले में वास्तविक आरोपियों को बचाने और निर्दोष लोगों को फंसाने के आरोपों के बीच अछनेरा थाने के तीन पूर्व थानाध्यक्षों/विवेचना अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए हैं। अदालत ने कहा कि जांच के दौरान अधिकारियों द्वारा कथित रूप से जानबूझकर कर्तव्य में लापरवाही बरती गई। अदालत ने पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया है कि संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विधि अनुसार विभागीय कार्रवाई की जाए।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-13) महेश चंद वर्मा ने पूर्व थानाध्यक्ष भानुप्रताप सिंह, नरेश चंद शर्मा और राजीव सिरोही के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया। अदालत ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सेवा नियमों के अनुसार कार्रवाई कर तीन माह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी आदेश दिया है।
मामला अछनेरा थाने में दर्ज एक हत्या से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार, सकतपुर गांव निवासी राजवीर सिंह ने आरोप लगाया था कि 16–17 अप्रैल 2015 की रात उनके भाई नारायण सिंह पर धारदार हथियारों से हमला किया गया था। उपचार के दौरान नारायण सिंह की मृत्यु हो गई थी।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि वास्तविक हमलावरों के नाम बताए जाने के बावजूद पुलिस ने मुकेश, दिनेश उर्फ धन्नी और अन्य लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर दिया, जबकि कथित वास्तविक आरोपियों को अभियोजन से बाहर रखा गया।
इसके बाद शिकायतकर्ता ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 319 के तहत अदालत में प्रार्थना पत्र दायर कर मुकदमे के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर वास्तविक आरोपियों को तलब करने की मांग की।
अदालत ने आवेदन स्वीकार करते हुए आला उर्फ राजेंद्र, रामबाबू, वीरपाल, संजय, ज्ञान सिंह, हप्पो उर्फ हरविलास, वीरेंद्र और तालेवर को हत्या सहित अन्य संबंधित आरोपों में मुकदमे का सामना करने के लिए तलब किया है।
मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को निर्धारित की गई है। विभागीय कार्रवाई संबंधी अदालत के निर्देश लंबित आपराधिक मुकदमे से अलग हैं और मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही कानून के अनुसार जारी रहेगी।
