जालंधर: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अमेरिकी दूतावास, नई दिल्ली की शिकायतों के आधार पर दर्ज मामलों से जुड़े कथित संगठित वीजा धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग प्रकरण में जालंधर स्थित विशेष PMLA अदालत के समक्ष अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint) दायर की है। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज, नकली कार्य अनुभव प्रमाणपत्र, बनावटी वित्तीय रिकॉर्ड और झूठे फंड प्रमाण का इस्तेमाल कर लोगों को अमेरिका के छात्र और विजिटर वीजा दिलाने की साजिश रची गई।
ED ने इस मामले में रेड लीफ इमिग्रेशन प्राइवेट लिमिटेड, अमनदीप सिंह, पूनम रानी, अंकुर कुमार केहर, नितिन विज, कमलजोत कंसल, ओवरसीज पार्टनर और रुद्रा कंसल्टेंसी सर्विसेज को आरोपी बनाया है।
एजेंसी के अनुसार, जांच की शुरुआत पंजाब पुलिस और दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर हुई, जो अमेरिकी दूतावास से प्राप्त शिकायतों पर दर्ज की गई थीं। आरोप है कि वीजा प्राप्त करने के लिए शैक्षणिक प्रमाणपत्र, कार्य अनुभव रिकॉर्ड, वित्तीय विवरण और बैंक में धनराशि उपलब्ध होने के फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए।
जांच में सामने आया कि रेड लीफ इमिग्रेशन प्राइवेट लिमिटेड, जिसका संचालन कथित रूप से अमनदीप सिंह और पूनम रानी करते थे, ऐसे आवेदकों को निशाना बनाती थी जो निर्धारित शैक्षणिक या वित्तीय पात्रता पूरी नहीं करते थे। उन्हें फर्जी डिग्री, नकली अनुभव प्रमाणपत्र, अध्ययन में अंतर (गैप) को छिपाने वाले दस्तावेज और अस्थायी वित्तीय व्यवस्था उपलब्ध कराकर वीजा आवेदन तैयार किए जाते थे।
ED का आरोप है कि आरोपी वीजा आवेदन की पूरी प्रक्रिया, विदेशी विश्वविद्यालयों और वीजा अधिकारियों से ईमेल के माध्यम से होने वाला संवाद भी अपने नियंत्रण वाले ईमेल खातों से संचालित करते थे।
वित्तीय जांच में ओवरसीज पार्टनर और रुद्रा कंसल्टेंसी सर्विसेज की भूमिका भी सामने आई। एजेंसी के अनुसार, इन संस्थाओं के माध्यम से वीजा आवेदकों के बैंक खातों में अस्थायी रूप से धनराशि जमा कर उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम दिखाया जाता था। जांच में दावा किया गया कि लगभग 154 आवेदकों के खातों में करीब ₹40 लाख की राशि अस्थायी रूप से जमा कर फर्जी फंड प्रूफ तैयार किया गया, जिसे बाद में निकाल लिया जाता था। इस व्यवस्था के लिए प्रत्येक आवेदक से लगभग ₹40,000 वसूले जाने का भी आरोप है।
ED ने यह भी आरोप लगाया कि इन्फोविज सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन के माध्यम से उन आवेदकों के लिए फर्जी प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और रोजगार प्रमाणपत्र तैयार किए गए, जिन्होंने संबंधित संस्थानों में कभी काम या प्रशिक्षण नहीं लिया था। जांच के दौरान एजेंसी को डायरी और अन्य रिकॉर्ड मिले, जिनमें कथित रूप से नकद भुगतान लेकर फर्जी दस्तावेज तैयार करने का विवरण दर्ज था।
फरवरी 2025 में आरोपियों से जुड़े कई परिसरों और लॉकरों पर की गई तलाशी के दौरान ED ने आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, कथित अवैध लेनदेन से जुड़ी डायरियां, ₹19 लाख नकद और लगभग एक किलोग्राम वजन की सोने की ईंट बरामद की थी।
एजेंसी के अनुसार, इस कथित वीजा धोखाधड़ी से अर्जित अपराध की आय (Proceeds of Crime) लगभग ₹2.14 करोड़ आंकी गई है। इसमें से करीब ₹1.37 करोड़ रेड लीफ इमिग्रेशन प्राइवेट लिमिटेड, ₹61.60 लाख ओवरसीज पार्टनर और रुद्रा कंसल्टेंसी सर्विसेज तथा ₹15 लाख इन्फोविज सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन से संबंधित बताए गए हैं। ED ने PMLA के तहत ₹2.14 करोड़ मूल्य की चल और अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच और फ्रीज कर दी हैं। इनमें आवासीय संपत्तियां और बैंक खातों में जमा राशि शामिल है।
प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि जांच जारी है और अभियोजन शिकायत अब विशेष PMLA अदालत, जालंधर के समक्ष विचाराधीन है। एजेंसी द्वारा लगाए गए आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर होगा।
