मधुबनी: बिहार के मधुबनी जिले में पुलिस ने समूह लोन दिलाने के नाम पर महिलाओं के बैंक खातों का इस्तेमाल कर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। साइबर थाना में दर्ज मामले की जांच के दौरान पुलिस ने एक दंपती को गिरफ्तार किया है, जिन पर महिलाओं के नाम से बैंक खाते खुलवाकर उन्हें साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराने का आरोप है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रहिका थाना क्षेत्र के विजय चंद्र पाल और उसकी पत्नी के रूप में हुई है। पूछताछ में दोनों ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वे महिलाओं को समूह लोन दिलाने का झांसा देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद उन खातों का नियंत्रण अपने पास रखकर उन्हें साइबर ठगी में इस्तेमाल होने के लिए विभिन्न गिरोहों को उपलब्ध कराया जाता था।
जांच में सामने आया कि बैंक खाते खुलवाने के बाद आरोपी महिलाओं के एटीएम कार्ड, चेकबुक और संबंधित सिम कार्ड अपने कब्जे में ले लेते थे। बाद में इन्हीं खातों का उपयोग असम, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक सहित कई राज्यों में सक्रिय साइबर अपराधियों द्वारा ठगी की रकम के लेन-देन और मनी ट्रेल छिपाने के लिए किया जाता था।
पुलिस ने छापेमारी के दौरान आरोपियों के कब्जे से 53 बैंक पासबुक, 47 चेकबुक, 22 विभिन्न संस्थानों की मुहरें और चार मोबाइल फोन बरामद किए हैं। जब्त दस्तावेजों, डिजिटल उपकरणों और बैंकिंग रिकॉर्ड की फोरेंसिक जांच कर पूरे नेटवर्क तथा इससे जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, आरोपियों से जुड़े बैंक खातों के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों में कुल 91 साइबर शिकायतें दर्ज हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन खातों के माध्यम से कितनी धनराशि का लेन-देन हुआ और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्ति या गिरोह कौन-कौन हैं।
दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है और मामले में आगे भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, साइबर अपराधी अब सीधे लोगों से ठगी करने के बजाय “म्यूल बैंक अकाउंट” का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं। वे आर्थिक रूप से कमजोर या अनजान लोगों को लोन, नौकरी या सरकारी योजना का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते हैं और बाद में उन्हीं खातों के जरिए ठगी की रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजकर जांच को भ्रमित करने की कोशिश करते हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, चेकबुक, सिम कार्ड या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को नहीं सौंपनी चाहिए। यदि कोई संस्था या एजेंट लोन दिलाने के नाम पर बैंक खाते का नियंत्रण अपने पास रखने की बात करे, तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए और इसकी सूचना संबंधित बैंक तथा साइबर पुलिस को देनी चाहिए। ऐसे मामलों में समय पर शिकायत करने से साइबर अपराधियों के नेटवर्क का पता लगाने और ठगी की रकम के प्रवाह को रोकने में मदद मिल सकती है।
