हरियाणा बैंक घोटाले में IAS प्रदीप कुमार की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर हाई कोर्ट ने CBI से जवाब मांगा है।

हरियाणा बैंक घोटाला: IAS प्रदीप कुमार की गिरफ्तारी पर हाई कोर्ट सख्त, CBI से पूछा- गिरफ्तारी के आधार क्यों नहीं बताए?

Team The420
4 Min Read

चंडीगढ़: हरियाणा में सरकारी विभागों के बैंक खातों से कथित सरकारी धन के गबन और अनधिकृत हस्तांतरण से जुड़े मामले में गिरफ्तार IAS अधिकारी प्रदीप कुमार की याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जवाब तलब किया है। याचिका में गिरफ्तारी, पुलिस रिमांड और न्यायिक हिरासत को चुनौती देते हुए आरोप लगाया गया है कि गिरफ्तारी के समय और उसके बाद भी उन्हें लिखित रूप से गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए गए, जो उनके संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।

याचिका के अनुसार, मामले में सबसे पहले 23 फरवरी 2026 को हरियाणा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने सरकारी विभागों के IDFC First Bank खातों से सरकारी धन के कथित गबन के आरोप में एफआईआर दर्ज की थी। बाद में 8 अप्रैल 2026 को जांच CBI को सौंप दी गई, जिसके बाद एजेंसी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत नया मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

FCRF Launches Certified AI-Powered SOC Analyst Program to Train the Next Generation of Cyber Defence Professionals

याचिकाकर्ता का कहना है कि CBI के नोटिस मिलने पर वह 15 मई और 24 जून 2026 को स्वयं जांच में शामिल हुए और एजेंसी को पूरा सहयोग दिया। इसके बावजूद 30 जून 2026 को हरियाणा के नरवाना टोल प्लाजा से उन्हें हिरासत में ले लिया गया, लेकिन उस समय गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए गए।

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि CBI के आधिकारिक दस्तावेजों में गिरफ्तारी का समय अलग-अलग दर्ज है। पत्नी को भेजी गई सूचना में गिरफ्तारी का समय शाम 4:25 बजे बताया गया, जबकि गिरफ्तारी मेमो में शाम 6:25 बजे दर्ज है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इन विरोधाभासों से संकेत मिलता है कि वास्तविक हिरासत और औपचारिक गिरफ्तारी के बीच उन्हें कई घंटों तक बिना निर्धारित कानूनी प्रक्रिया अपनाए रखा गया।

याचिका के अनुसार, 30 जून को पंचकूला की अदालत में पुलिस रिमांड की सुनवाई के दौरान भी गिरफ्तारी के आधार उपलब्ध नहीं कराए गए। बचाव पक्ष की आपत्ति के बाद पहली बार अधिवक्ता को कथित गिरफ्तारी के आधार उपलब्ध कराए गए, लेकिन उन दस्तावेजों पर याचिकाकर्ता के हस्ताक्षर नहीं थे। इसके बावजूद अदालत ने समय संबंधी विसंगति को टंकण त्रुटि मानते हुए CBI की दलील स्वीकार की और पुलिस रिमांड मंजूर कर दिया। बाद में 2 जुलाई 2026 को उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा है कि गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में उपलब्ध कराना कानूनन अनिवार्य है। ऐसा नहीं किया जाना संविधान और आपराधिक प्रक्रिया से जुड़े स्थापित कानूनी सिद्धांतों का उल्लंघन है। उन्होंने 30 जून की गिरफ्तारी, 30 जून और 2 जुलाई के रिमांड आदेशों सहित उसके बाद की पूरी कार्यवाही को निरस्त कर तत्काल रिहाई का अनुरोध किया है।

हाई कोर्ट ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद CBI को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है और अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 के लिए निर्धारित की है। मामले में अदालत का अंतिम निर्णय CBI के जवाब, दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध रिकॉर्ड के परीक्षण के बाद लिया जाएगा।

हमसे जुड़ें

Share This Article