सुप्रीम कोर्ट ने एस्सेल ग्रुप डेट मामले में Kotak AMC और उसके अधिकारियों पर SEBI की ₹2.1 करोड़ पेनाल्टी बरकरार रखी है।

सुप्रीम कोर्ट ने कोटक AMC और अधिकारियों पर SEBI की ₹2.1 करोड़ की पेनाल्टी बरकरार रखी, एस्सेल ग्रुप डेट मामले में अपील खारिज

Team The420
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एस्सेल ग्रुप से जुड़े डेट निवेश मामले में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा Kotak Mahindra Asset Management Company (AMC), उसकी ट्रस्टी कंपनी, प्रबंध निदेशक निलेश शाह तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर लगाए गए कुल ₹2.1 करोड़ के जुर्माने को बरकरार रखते हुए उनकी अपील खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी मामले में निवेशकों को अंततः लाभ भी हुआ हो, तब भी नियामकीय उल्लंघन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और म्यूचुअल फंड उद्योग के लिए नियमों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता है।

न्यायमूर्ति दिपांकर दत्ता और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा कि प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (SAT) और SEBI के निष्कर्ष सही थे तथा उनमें हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने कहा कि बाजार की निष्पक्षता और नियामकीय व्यवस्था को बनाए रखना निवेश से हुए लाभ या हानि से अधिक महत्वपूर्ण है।

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सुप्रीम कोर्ट ने SEBI द्वारा लगाए गए कुल ₹2.1 करोड़ के दंड को यथावत रखा। इसमें Kotak Mahindra AMC पर ₹50 लाख, ट्रस्टी कंपनी और छह वरिष्ठ अधिकारियों पर कुल ₹1.6 करोड़ का जुर्माना शामिल है। प्रबंध निदेशक निलेश शाह पर ₹30 लाख का दंड लगाया गया था। इसके अतिरिक्त अदालत ने मुकदमेबाजी की लागत के रूप में Kotak AMC पर ₹30 लाख तथा Kotak Mahindra Trustee Company पर ₹20 लाख का अतिरिक्त खर्च भी लगाया।

मामला Kotak Mutual Fund द्वारा एस्सेल ग्रुप की कंपनियों Konti Infrapower & Multiventures Pvt. Ltd. और Edison Utility Works Pvt. Ltd. द्वारा जारी ₹266 करोड़ के जीरो-कूपन नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCDs) में निवेश से जुड़ा था। इन ऋण साधनों के बदले Zee Entertainment Enterprises के शेयर गिरवी रखे गए थे।

वर्ष 2019 की शुरुआत में Zee Entertainment के शेयरों में तेज गिरावट आने से गिरवी रखे गए शेयरों का मूल्य कम हो गया। इसके बाद Kotak AMC ने गिरवी शेयरों को भुनाने के बजाय ऋण का पुनर्गठन (Restructuring) करने का निर्णय लिया। इस कारण छह क्लोज-एंडेड Fixed Maturity Plans (FMPs) के निवेशकों को परिपक्वता (Maturity) के बाद लगभग ₹376 करोड़ का भुगतान विलंब से किया गया।

SEBI ने आरोप लगाया था कि Kotak AMC ने वित्तीय रूप से कमजोर Essel Group कंपनियों में निवेश से पहले पर्याप्त ड्यू डिलिजेंस (Due Diligence) नहीं की। नियामक के अनुसार कंपनी ने योजनाओं की परिपक्वता अवधि समाप्त होने के बाद भी ऋण साधनों की अवधि बढ़ाई और इस संबंध में निवेशकों तथा SEBI को पर्याप्त जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई।

अदालत ने Kotak AMC की इस दलील को स्वीकार नहीं किया कि ऋण पुनर्गठन के कारण निवेशकों को नुकसान से बचाया गया और अंततः उन्हें लाभ हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि नियामकीय उल्लंघन हुआ है तो केवल निवेशकों के लाभ का हवाला देकर दंड से बचा नहीं जा सकता। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बाजार की विश्वसनीयता और नियामकीय अनुपालन किसी भी निवेश परिणाम से अधिक महत्वपूर्ण है।

पीठ ने यह भी कहा कि म्यूचुअल फंड विनियमों के तहत प्राथमिकता लाभ कमाने की नहीं, बल्कि उचित सावधानी और नियामकीय अनुपालन सुनिश्चित करने की होनी चाहिए। अदालत ने मामले में अपनाई गई प्रक्रिया पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि संबंधित पक्षों ने ऐसा रास्ता अपनाया जो कानून में मान्य नहीं था तथा उन्होंने निवेशकों और नियामक दोनों को पर्याप्त जानकारी से वंचित रखा।

फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने म्यूचुअल फंड उद्योग को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि “पहले नियामकीय दायित्व, बाद में लाभ; SEBI के नियमों का पालन कभी नहीं डगमगाना चाहिए।” अदालत ने कहा कि बाजार की पारदर्शिता, निवेशकों का विश्वास और नियामकीय अनुशासन पूंजी बाजार की बुनियाद हैं तथा उनका पालन प्रत्येक एसेट मैनेजमेंट कंपनी और उसके अधिकारियों की कानूनी जिम्मेदारी है।

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