पटना में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के तुरंत बाद जनशक्ति जनता दल (JJD) की प्रत्याशी वीणा मानवी को 2009 के कथित धोखाधड़ी मामले में लंबित गैर-जमानती वारंट के आधार पर गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि आरोपी लंबे समय से फरार थी, जबकि वीणा मानवी ने कार्रवाई को राजनीतिक साजिश बताया है।
पटना: बिहार की बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नामांकन के दौरान सोमवार को उस समय हाई-वोल्टेज राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला, जब जनशक्ति जनता दल (JJD) की प्रत्याशी वीणा मानवी को नामांकन दाखिल करने के तुरंत बाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने यह कार्रवाई वर्ष 2009 के एक कथित धोखाधड़ी मामले में लंबित गैर-जमानती वारंट के आधार पर की। गिरफ्तारी के दौरान जिला समाहरणालय परिसर के बाहर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल भी बना।
पुलिस के अनुसार, जैसे ही वीणा मानवी नामांकन प्रक्रिया पूरी कर बाहर निकलीं, पहले से तैनात पुलिस टीम ने उनके खिलाफ लंबित वारंट का निष्पादन करने का प्रयास किया। अधिकारियों का दावा है कि पुलिस को देखकर उन्होंने वहां से निकलने का प्रयास किया, जिसके बाद संक्षिप्त पीछा कर उन्हें हिरासत में लिया गया और गांधी मैदान थाना ले जाया गया।
गिरफ्तारी के दौरान वीणा मानवी ने कार्रवाई का विरोध करते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में संभावित हार की आशंका के कारण उनके खिलाफ यह कार्रवाई कराई गई है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है और उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह मामला वर्ष 2009 में दर्ज एक शिकायत से जुड़ा है। जांच एजेंसी का कहना है कि इस मामले में उनके खिलाफ कई वर्षों से स्थायी गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट लंबित था। पुलिस को जैसे ही यह सूचना मिली कि वह बांकीपुर उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने आने वाली हैं, उनके विरुद्ध वारंट की तामील के लिए विशेष टीम तैनात कर दी गई।
अधिकारियों ने बताया कि संबंधित मामले में वीणा मानवी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 403 और 418 के तहत आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही किया जाएगा।
पुलिस ने यह भी बताया कि वर्ष 2009 के मामले के अतिरिक्त वीणा मानवी के खिलाफ अन्य आपराधिक मामले भी लंबित हैं। वर्ष 2016 में कंकड़बाग थाने में उनके विरुद्ध कथित धोखाधड़ी और छल का मामला दर्ज किया गया था। इसके अलावा अनुसूचित जाति उत्पीड़न और साइबर अपराध से संबंधित कुछ अन्य मामलों की भी जांच और न्यायिक कार्यवाही लंबित बताई गई है।
गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई। वीणा मानवी का समर्थन कर रहे नेता तेज प्रताप यादव ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उनकी पार्टी की प्रत्याशी को झूठे मामले में फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि नामांकन के दिन गिरफ्तारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास है। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर इस मामले में न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह न्यायालय द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट के अनुपालन में की गई है और इसका चुनावी प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, लंबित वारंट का निष्पादन कानून के अनुसार किया गया है और मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी लंबित आपराधिक मामले में गैर-जमानती वारंट जारी होने पर पुलिस उसके निष्पादन के लिए बाध्य होती है। वहीं, केवल FIR दर्ज होना या गिरफ्तारी होना किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं माना जाता। अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय द्वारा साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर ही दिया जाता है।
फिलहाल वीणा मानवी के खिलाफ दर्ज मामलों में आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी है। पुलिस का कहना है कि सभी कार्रवाई न्यायालय के आदेशों के अनुरूप की जा रही है, जबकि आरोपी पक्ष ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार करते हुए उन्हें राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है. मामले में आगे की सुनवाई के दौरान न्यायालय तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर निर्णय करेगा।
