पश्चिम बंगाल के राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता किसान के मोबाइल फोन गुम होने के बाद उनके दो बैंक खातों से ₹83,244 की कथित साइबर ठगी का मामला सामने आया है।

मोबाइल फोन गुम होने के बाद राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता किसान के खाते से ₹83,244 की कथित साइबर ठगी, डिजिटल निकासी पर उठे सवाल

Team The420
5 Min Read

पश्चिम बंगाल के पर्यावरण-अनुकूल खेती के लिए राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त किसान ने आरोप लगाया कि मोबाइल फोन खोने के कुछ दिनों के भीतर उनके दो बैंक खातों से ₹83,244 की निकासी कर ली गई। विशेष बात यह है कि खातों में इंटरनेट बैंकिंग और ATM सुविधा सक्रिय नहीं थी। मामले की जांच जारी है।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता प्रगतिशील किसान शैलेन चांदी कथित साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो गए हैं। उनका आरोप है कि मोबाइल फोन गुम होने के कुछ दिनों के भीतर उनके दो बैंक खातों से कुल ₹83,244 की अनधिकृत निकासी कर ली गई। तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद न तो रकम वापस मिल सकी है और न ही मामले में किसी आरोपी की पहचान हो पाई है। इस घटना ने बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था और डिजिटल वित्तीय लेनदेन की निगरानी पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

FCRF Launches Certified AI-Powered SOC Analyst Program to Train the Next Generation of Cyber Defence Professionals

शैलेन चांदी पर्यावरण-अनुकूल खेती, पारंपरिक बीजों के संरक्षण और रासायनिक उर्वरकों के सीमित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं। वर्ष 2019 में उन्हें उनके कृषि क्षेत्र में योगदान के लिए केंद्र सरकार के एक मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। अब जीवन के इस पड़ाव पर वे कथित साइबर ठगी के कारण आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

शिकायत के अनुसार, उनका मोबाइल फोन 29 मार्च को गुम हो गया था। उन्होंने उसी दिन स्थानीय पुलिस थाने में इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई। चूंकि उनके बैंक खाते उसी मोबाइल नंबर से जुड़े थे, इसलिए उन्होंने तुरंत डुप्लीकेट सिम कार्ड के लिए आवेदन किया। नया सिम मिलने के बाद उन्हें SMS अलर्ट के माध्यम से जानकारी मिली कि 31 मार्च को उनके एक सरकारी बैंक खाते से ₹6,000 और ₹4,000 की दो अलग-अलग निकासी की गई है।

इसकी जानकारी मिलने के बाद उन्होंने 1 अप्रैल को स्थानीय पुलिस और साइबर अपराध प्रकोष्ठ में शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, उनके अनुसार इसके बावजूद धोखाधड़ी नहीं रुकी। 2 अप्रैल को उनके दूसरे सरकारी बैंक खाते से 12 अलग-अलग लेनदेन के माध्यम से कथित तौर पर ₹71,000 और निकाल लिए गए। इस प्रकार कुल निकासी ₹83,244 तक पहुंच गई।

मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह बताया जा रहा है कि किसान के दोनों बैंक खातों में इंटरनेट बैंकिंग सुविधा सक्रिय नहीं थी और उनके पास ATM कार्ड भी नहीं था। शिकायत के अनुसार बैंक अधिकारी भी प्रारंभिक स्तर पर यह स्पष्ट नहीं कर पाए कि बिना ATM कार्ड और ऑनलाइन बैंकिंग सुविधा के डिजिटल माध्यम से इतनी बड़ी राशि कैसे निकाली गई। यही तथ्य जांच एजेंसियों के लिए भी प्रमुख जांच बिंदु बना हुआ है।

घटना के बाद शैलेन चांदी ने दोनों संबंधित बैंकों के शाखा प्रबंधकों, नोडल अधिकारियों, साइबर अपराध विभाग तथा भारतीय रिजर्व बैंक के संबंधित कार्यालय को लिखित शिकायत भेजी। उन्होंने कई बार अनुस्मारक भी भेजे, लेकिन उनका कहना है कि साढ़े तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी मामले में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने जांच की धीमी गति पर निराशा व्यक्त की है।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि मोबाइल फोन या सिम कार्ड खो जाने के मामलों को सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि ऐसे मामलों में डिजिटल पहचान से समझौता होने का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि फोन गुम होते ही संबंधित मोबाइल नंबर को तत्काल ब्लॉक कराना, बैंक खातों की निगरानी करना, सभी बैंकिंग पासवर्ड बदलना और संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत बैंक तथा राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराना अत्यंत आवश्यक है। उनके अनुसार जांच एजेंसियों को ऐसे मामलों में सिम परिवर्तन, डिवाइस लॉग, बैंकिंग ट्रांजैक्शन ट्रेल और लाभार्थी खातों की विस्तृत डिजिटल फोरेंसिक जांच करनी चाहिए ताकि धन के प्रवाह का पता लगाया जा सके।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि कथित अनधिकृत निकासी किस तकनीकी माध्यम से की गई। पुलिस, बैंकिंग संस्थान और साइबर जांच एजेंसियां उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही हैं। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी तथा यदि किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

हमसे जुड़ें

Share This Article