उत्तर प्रदेश के कौशांबी में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के दौरान कथित फर्जीवाड़ा सामने आया है। आरोप है कि तय दूल्हे के कार्यक्रम में नहीं पहुंचने पर एक अन्य युवक को लालच देकर मंडप में बैठाया गया। फिंगरप्रिंट सत्यापन में पहचान मेल न खाने पर मामला उजागर हुआ। पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जबकि जिला प्रशासन ने संबंधित विवाह पंजीकरण निरस्त कर दिया है।
कौशांबी: उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के दौरान कथित अनियमितता का मामला सामने आया है। अधिकारियों के अनुसार, फिंगरप्रिंट सत्यापन प्रक्रिया के दौरान एक युवक की पहचान रिकॉर्ड से मेल नहीं खाने पर पूरे मामले का खुलासा हुआ। पुलिस ने शिकायत के आधार पर तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जबकि जिला प्रशासन ने संबंधित विवाह का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से निरस्त कर विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। मामले में लगाए गए सभी आरोप अभी जांच के अधीन हैं और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
यह मामला सिराथू तहसील के सैनी कोतवाली क्षेत्र का है, जहां शासन की मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आयोजित कार्यक्रम में लगभग 230 जोड़ों का विवाह कराया गया। जांच के अनुसार, एक युवती का विवाह पहले से ही रायबरेली निवासी युवक के साथ तय था और उसका निकाह 17 मार्च 2027 को होना निर्धारित था। आरोप है कि इसके बावजूद युवती का पंजीकरण मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत करा दिया गया।
अधिकारियों के अनुसार, निर्धारित युवक किसी कारणवश कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सका। इसके बाद आरोप है कि युवती के परिजनों ने गांव के ही एक अन्य युवक को कथित रूप से आधा दहेज देने का लालच देकर विवाह मंडप में बैठा दिया। विवाह प्रक्रिया के दौरान प्रशासन द्वारा वर और वधू के फिंगरप्रिंट का डिजिटल सत्यापन किया जा रहा था। युवती का फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड से मेल खा गया, लेकिन युवक का बायोमेट्रिक रिकॉर्ड पंजीकृत विवरण से मेल नहीं खाया। इसी विसंगति के बाद अधिकारियों को संदेह हुआ और जांच में कथित फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
मामले की जानकारी मिलते ही संबंधित युवक को पुलिस के हवाले कर दिया गया तथा विवाह का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया। जिला प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि योजना के तहत पंजीकरण और सत्यापन प्रक्रिया में कथित अनियमितता कैसे हुई।
पुलिस के अनुसार, युवक के भाई शिवम वाल्मीकि की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उसके लगभग 16 वर्षीय भाई सनी वाल्मीकि को आधा दहेज देने का लालच देकर सामूहिक विवाह के मंडप में बैठाया गया और उसकी तस्वीरें भी खिंचवाई गईं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कुरैशां बानो, नगमा बानो और अमरजीत मौर्य ने कथित रूप से मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत मिलने वाली सरकारी सहायता राशि प्राप्त करने के उद्देश्य से यह साजिश रची। पुलिस इन आरोपों की जांच कर रही है।
जिला प्रशासन के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया कि युवती और उसके होने वाले पति का पंजीकरण पहले ही किया जा चुका था, लेकिन निर्धारित दूल्हा कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हुआ। बाद में यह जानकारी मिली कि युवती किसी अन्य युवक के साथ विवाह मंडप में बैठ गई थी। इसके बाद संबंधित पंजीकरण निरस्त कर दिया गया और पूरे मामले की विभागीय जांच शुरू कर दी गई।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि सरकारी योजनाओं में डिजिटल सत्यापन, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और डेटा मिलान जैसी तकनीकों का उद्देश्य फर्जी लाभार्थियों और पहचान संबंधी धोखाधड़ी को रोकना है। उन्होंने कहा कि यदि बायोमेट्रिक सत्यापन और डिजिटल रिकॉर्ड का प्रभावी उपयोग किया जाए तो इस प्रकार की कई अनियमितताओं का समय रहते पता लगाया जा सकता है। उनके अनुसार सरकारी योजनाओं में तकनीकी सत्यापन के साथ-साथ दस्तावेजों और पहचान की बहु-स्तरीय जांच भी आवश्यक है।
फिलहाल पुलिस और जिला प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मामले में दर्ज आरोप अभी जांच और न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं तथा संबंधित व्यक्तियों की कानूनी जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण सक्षम न्यायालय द्वारा किया जाएगा।
