बांदा, उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में पुलिस ने एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी एपीके (APK) फाइल और अन्य मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से लोगों के मोबाइल फोन से कथित रूप से छेड़छाड़ कर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज हासिल करते थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर फर्जी फर्मों और कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खोलकर साइबर ठगी की रकम विभिन्न खातों में स्थानांतरित की जाती थी।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रेम प्रकाश, सूरज, समीर, अभिषेक, जीतू, योगेश, कृष्णा, सुशील कुमार और मुकेश कुमार के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके कब्जे से ₹52,475 नकद, एक बोलेरो वाहन, एक लैपटॉप, छह एटीएम कार्ड तथा कई मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, कार्रवाई की शुरुआत एक संदिग्ध बैंक खाते की सूचना मिलने के बाद हुई, जिसमें कथित रूप से साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि जमा की जा रही थी। जांच के दौरान 11 और 12 जुलाई की रात मवई बाइपास क्षेत्र से प्रेम प्रकाश को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के नीचे घेराबंदी कर बोलेरो वाहन में सवार आठ अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया।
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने कथित रूप से खुलासा किया कि वे लोगों को विभिन्न बहानों से अपने झांसे में लेकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य आवश्यक दस्तावेज प्राप्त करते थे। इसके बाद इन दस्तावेजों का उपयोग कर फर्जी कंपनियों और फर्मों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे। साइबर ठगी से प्राप्त रकम पहले इन खातों में मंगाई जाती और बाद में कई अन्य खातों में स्थानांतरित कर नकद निकासी की जाती थी, जिससे धन के वास्तविक स्रोत को छिपाया जा सके।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए कथित रूप से फर्जी सिम कार्ड का उपयोग करते थे। पुलिस का दावा है कि किसी शिकायत या जांच की आशंका होने पर गिरोह मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को नष्ट करने का प्रयास करता था, ताकि जांच एजेंसियों को उनके नेटवर्क तक पहुंचने में कठिनाई हो।
पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों, फर्जी बैंक खातों की श्रृंखला, सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाले व्यक्तियों तथा इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सहयोगियों की पहचान करने में जुटी है। इसके साथ ही बैंकिंग लेनदेन, मोबाइल डेटा, डिजिटल संचार और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
बरामद लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच से यह भी पता लगाया जाएगा कि आरोपियों ने किन-किन राज्यों या क्षेत्रों में साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम दिया और कितने लोग इस कथित गिरोह का शिकार बने। पुलिस संबंधित बैंक खातों के लेनदेन, डिजिटल वॉलेट, आईपी लॉग तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी जांच कर रही है।
इस मामले पर प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि साइबर अपराधी अब केवल बैंकिंग धोखाधड़ी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि फर्जी कंपनियों, म्यूल बैंक खातों और डिजिटल पहचान का दुरुपयोग कर संगठित वित्तीय अपराधों को अंजाम दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में डिजिटल फोरेंसिक, बैंकिंग ट्रेल और मनी फ्लो विश्लेषण पूरे नेटवर्क का खुलासा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि डिजिटल, वित्तीय और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में किसी बड़े अंतरराज्यीय साइबर अपराध नेटवर्क या अन्य आरोपियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मामले में लगाए गए सभी आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।
About the author — Suvedita Nath is a science student with a growing interest in cybercrime and digital safety. She writes on online activity, cyber threats, and technology-driven risks. Her work focuses on clarity, accuracy, and public awareness.
