बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में साइबर अपराध से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जांच के दौरान पुलिस ने 16 राज्यों से दर्ज साइबर ठगी की शिकायतों से जुड़ी कथित धनराशि का वित्तीय ट्रेल एक बैंक खाते तक पहुंचने का दावा किया है। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और समन्वय (JMIS) पोर्टल से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर पूरे वित्तीय नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है।
जांच के अनुसार, संदिग्ध लेनदेन आईडीएफसी बैंक में राकेश ट्रेडर्स के नाम से संचालित एक खाते तक पहुंचे हैं। पुलिस के मुताबिक यह खाता मानिक अग्रवाल के नाम से संचालित है, जो बुलंदशहर के ब्राह्मणपुरी क्षेत्र का निवासी है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि इस खाते का इस्तेमाल विभिन्न राज्यों में हुई साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को प्राप्त करने और आगे स्थानांतरित करने के लिए कथित रूप से म्यूल बैंक खाते के रूप में किया गया।
पुलिस का कहना है कि इस बैंक खाते के खिलाफ दिल्ली, तमिलनाडु, केरल, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तराखंड सहित कुल 16 राज्यों से शिकायतें दर्ज हैं। इन शिकायतों में ऑनलाइन निवेश, ट्रेडिंग फ्रॉड तथा अन्य वित्तीय साइबर धोखाधड़ी के आरोप शामिल हैं। बैंक स्टेटमेंट और तकनीकी विश्लेषण में कम समय के भीतर बड़ी संख्या में संदिग्ध वित्तीय लेनदेन सामने आने का दावा किया गया है।
जांच एजेंसियां अब खाते के संपूर्ण लेनदेन, बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि धनराशि किन स्रोतों से आई, किन खातों में भेजी गई और अंततः किस प्रकार निकाली गई। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि धन के वास्तविक स्रोत को छिपाने के लिए अन्य बैंक खातों या बिचौलियों का उपयोग किया गया था या नहीं।
इसी जांच के समानांतर कार्रवाई में पुलिस ने साइबर अपराध के अलग-अलग मामलों में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दीपांशु सोलंकी, वीरेश कुमार, फुरकान और चिराग के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके कब्जे से कथित रूप से साइबर अपराध में प्रयुक्त मोबाइल फोन और सिम कार्ड भी बरामद किए हैं।
पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी कथित रूप से लोन फ्रॉड, फर्जी मोबाइल एप्लिकेशन, ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी तथा अन्य वित्तीय साइबर अपराधों में शामिल थे। पूछताछ के दौरान आरोपियों द्वारा अपराध स्वीकार किए जाने का दावा पुलिस ने किया है। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है।
एक अन्य कार्रवाई में गुलावठी क्षेत्र से गिरफ्तार फुरकान के संबंध में पुलिस का दावा है कि उसके बैंक खाते का उपयोग भी साइबर ठगी से जुड़ी धनराशि प्राप्त करने के लिए किया जा रहा था। उसके कब्जे से एक मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद किया गया है तथा उससे जुड़े डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच जारी है।
इस मामले पर प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि साइबर अपराधी अब म्यूल बैंक खातों और कई स्तरों वाले वित्तीय लेनदेन का उपयोग कर ठगी की रकम का स्रोत छिपाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल फोरेंसिक, बैंकिंग ट्रेल और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय ऐसे संगठित साइबर अपराध नेटवर्क का पर्दाफाश करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि डिजिटल, वित्तीय और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में किसी बड़े अंतरराज्यीय साइबर अपराध नेटवर्क या अन्य आरोपियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मामले में लगाए गए सभी आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।
About the author — Suvedita Nath is a science student with a growing interest in cybercrime and digital safety. She writes on online activity, cyber threats, and technology-driven risks. Her work focuses on clarity, accuracy, and public awareness.
