हैदराबाद। तेलंगाना के तेलापुर इलाके के एक 47 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर के साथ कथित तौर पर ₹3.2 करोड़ से अधिक की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। आरोपी फर्जी स्टॉक ट्रेडिंग ऐप और व्हाट्सऐप इन्वेस्टमेंट ग्रुप के जरिए पीड़ित को लगातार निवेश के लिए प्रेरित करते रहे।
पुलिस के अनुसार, पीड़ित को 31 अक्टूबर 2025 को एक अनजान व्हाट्सऐप मैसेज मिला, जिसमें उसे ‘Stocko Traders Hub A663’ नाम के एक ग्रुप से जोड़ा गया। इस ग्रुप में एडमिन्स द्वारा शेयर बाजार में “गारंटीड रिटर्न” और IPO में भारी मुनाफे का दावा किया जा रहा था।
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने फर्जी मुनाफे के स्क्रीनशॉट और नकली विड्रॉल प्रूफ दिखाकर भरोसा बनाया, जिसके बाद पीड़ित को एक ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड करने और अलग-अलग बैंक खातों में पैसा ट्रांसफर करने के लिए कहा गया।
दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच पीड़ित ने कुल ₹3.36 करोड़ से अधिक की राशि अलग-अलग खातों में भेजी, जबकि उसे विश्वास बनाए रखने के लिए लगभग ₹10 लाख की आंशिक निकासी (withdrawal) की अनुमति दी गई।
पुलिस ने बताया कि जब पीड़ित ने अपनी शेष राशि निकालने की कोशिश की, तो आरोपियों ने अचानक निकासी रोक दी और “सर्विस चार्ज” के नाम पर अतिरिक्त पैसे की मांग शुरू कर दी। इसके बाद आरोपियों ने संपर्क पूरी तरह बंद कर दिया।
मार्च 2026 तक यह पूरा ऐप भी काम करना बंद कर चुका था और सभी चैट व संपर्क समाप्त हो गए, जिसके बाद पीड़ित ने तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई। इस आधार पर IT एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि यह एक संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क है, जो सोशल मीडिया, फर्जी ट्रेडिंग डैशबोर्ड और म्यूल बैंक अकाउंट्स के जरिए देशभर में ठगी को अंजाम दे रहा था।
इस तरह के मामलों पर साइबर विशेषज्ञ लगातार चेतावनी देते रहे हैं कि अपराधी निवेश के लालच और जल्दी मुनाफे के झांसे का इस्तेमाल कर लोगों को फंसाते हैं। कई बार ये प्लेटफॉर्म इतने वास्तविक दिखते हैं कि पढ़े-लिखे लोग भी आसानी से धोखा खा जाते हैं।
साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रोफेसर Triveni Singh ने कहा कि आज के समय में साइबर अपराधी भरोसे को सबसे बड़ा हथियार बनाकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “फर्जी ट्रेडिंग ऐप और व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए लोग पहले छोटे-छोटे मुनाफे दिखाकर विश्वास जीतते हैं और फिर बड़ी रकम निवेश करवाकर उसे गायब कर देते हैं। ऐसे मामलों में रियल-टाइम वेरिफिकेशन और डिजिटल सतर्कता बेहद जरूरी है।”
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक, व्हाट्सऐप ग्रुप या ऐप के जरिए निवेश न करें और केवल सेबी-रजिस्टर्ड प्लेटफॉर्म्स का ही उपयोग करें।
पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है और बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजैक्शन और फंड ट्रेल को ट्रैक किया जा रहा है। जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान और गिरफ्तारी की संभावना है।
अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में पैसे की रिकवरी बेहद कठिन होती है क्योंकि ठगी की रकम को तुरंत कई खातों में ट्रांसफर कर डिजिटल माध्यमों या नकद में बदल दिया जाता है।
यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि डिजिटल युग में साइबर फ्रॉड कितनी तेजी से विकसित हो रहा है और कैसे शिक्षित वर्ग भी इसके निशाने पर आ रहा है।
