नोएडा। साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई में नोएडा फेज-1 पुलिस ने फर्जी KYC वेरिफिकेशन कॉल और नकली मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए चल रहे एक संगठित साइबर ठगी रैकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर क्रेडिट कार्ड डेटा तक अवैध पहुंच बनाकर ऑनलाइन लेनदेन के जरिए ठगी कर रहे थे।
अधिकारियों के अनुसार यह पूरा नेटवर्क एक संगठित कॉल सेंटर की तरह काम करता था, जहां पहले लोगों को KYC अपडेट या क्रेडिट कार्ड रिवार्ड पॉइंट्स रिडीम करने के नाम पर संपर्क किया जाता था। इसके बाद पीड़ितों को ऐसे लिंक भेजे जाते थे, जिनसे वे फर्जी एंड्रॉयड APK फाइल डाउनलोड कर लेते थे। ये ऐप्स असली बैंकिंग एप्लिकेशन जैसे दिखते थे।
एक बार मोबाइल में इंस्टॉल होने के बाद ये फर्जी ऐप्स अपराधियों को क्रेडिट कार्ड नंबर, CVV और OTP जैसी संवेदनशील जानकारी तक पहुंच दे देते थे, जिसके जरिए वे बिना अनुमति के लेनदेन कर पाते थे।
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 31 वर्षीय विकास कुमार (जिला हापुड़, वर्तमान में गाजियाबाद निवासी) और 20 वर्षीय सूरज (हाथरस निवासी, वर्तमान में दिल्ली के न्यू अशोक नगर में रह रहा) के रूप में हुई है। दोनों को सेक्टर-2 स्थित एक ठिकाने से छापेमारी के दौरान पकड़ा गया।
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जांच में सामने आया है कि आरोपी विभिन्न बैंकों के ग्राहकों को निशाना बनाते थे और खुद को बैंक के क्रेडिट कार्ड विभाग या कस्टमर केयर अधिकारी के रूप में पेश करते थे। वे लोगों को यह कहकर डराते थे कि यदि तुरंत KYC अपडेट नहीं किया गया तो उनका कार्ड ब्लॉक हो सकता है।
फर्जी ऐप्स के जरिए डाटा हासिल करने के बाद आरोपी चोरी की जानकारी का उपयोग कर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से सोने और चांदी के सिक्के खरीदते थे। ये सामान अलग-अलग जगहों पर डिलीवर कराया जाता था और बाद में उन्हें नकद में बेचकर पैसे निकाल लिए जाते थे।
पुलिस के अनुसार यह भी सामने आया है कि इस रैकेट में इस्तेमाल किए गए सिम कार्ड बार-बार बदल दिए जाते थे ताकि पहचान छिपाई जा सके। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि यह गिरोह अंतर-राज्यीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है।
अधिकारियों ने बताया कि देशभर से 20 से अधिक शिकायतें राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज की गई हैं, जो इसी तरह की APK आधारित ठगी से जुड़ी हैं। इससे इस बात की पुष्टि होती है कि यह एक व्यापक नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने दावा किया कि वे डेटा सप्लाई करने वाले कुछ एजेंट्स के लिए कमीशन पर काम करते थे। हालांकि पुलिस इस दावे की पुष्टि कर रही है और बैंक ट्रांजैक्शन, मोबाइल रिकॉर्ड और डिजिटल फॉरेंसिक के जरिए पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने कई मोबाइल फोन और कथित रूप से ठगी से खरीदे गए कुछ सोने-चांदी के सिक्के भी बरामद किए हैं। इनकी मदद से पैसों के पूरे लेनदेन और लाभार्थियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि APK आधारित साइबर फ्रॉड तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें नकली ऐप्स के जरिए मोबाइल सुरक्षा को बायपास किया जाता है और बैंकिंग डेटा चुरा लिया जाता है।
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि ऐसे मामलों में अपराधी डर, लालच और तात्कालिकता का इस्तेमाल कर लोगों को फंसाते हैं, और यही इन स्कैम्स की सबसे बड़ी ताकत होती है।
अधिकारियों ने नागरिकों को सलाह दी है कि किसी भी अनजान लिंक से ऐप डाउनलोड न करें और केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही बैंकिंग एप्लिकेशन का उपयोग करें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि कोई भी बैंक फोन या थर्ड पार्टी ऐप के जरिए OTP या कार्ड डिटेल नहीं मांगता।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही इस साइबर नेटवर्क के अन्य सदस्यों की भी पहचान कर गिरफ्तारी की जाएगी।
