दक्षिण कोरिया में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जिसने BTS सदस्य जंगकुक समेत कई हाई-प्रोफाइल व्यक्तियों को निशाना बनाने की कोशिश की थी। जांच एजेंसियों के अनुसार इस नेटवर्क के कथित मास्टरमाइंड को थाईलैंड से प्रत्यर्पित कर सियोल लाया गया है, जहां उससे विस्तृत पूछताछ जारी है। यह कार्रवाई दक्षिण कोरिया के न्याय मंत्रालय और राष्ट्रीय पुलिस एजेंसी के संयुक्त अभियान का हिस्सा है।
अधिकारियों ने बताया कि आरोपी, एक चीनी नागरिक है जिसे केवल “A” के रूप में पहचाना गया है। उसे बैंकॉक से स्थानांतरित कर मंगलवार को इंचियोन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लाया गया। इस पूरे मामले में एक और पूर्व प्रमुख आरोपी को पहले ही अगस्त में प्रत्यर्पित किया जा चुका है, जो फिलहाल दक्षिण कोरिया में हिरासत में है और उस पर मुकदमा चल रहा है।
जांच के अनुसार यह साइबर गिरोह अगस्त 2023 से अप्रैल 2025 के बीच सक्रिय रहा। इस दौरान इस नेटवर्क ने कई सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों की वेबसाइटों में सेंध लगाकर भारी मात्रा में संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा चोरी किया। इसी डेटा के आधार पर आरोपियों ने फर्जी मोबाइल और ब्रोकरेज खाते तैयार किए और पहचान सत्यापन प्रणालियों को चकमा देकर बैंकिंग और क्रिप्टो प्लेटफॉर्म तक पहुंच बनाने की कोशिश की।
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अधिकारियों ने अनुमान लगाया है कि इस पूरे नेटवर्क की वजह से लगभग 38 अरब वॉन यानी करीब ₹224 करोड़ की संभावित वित्तीय क्षति हो सकती थी। यह राशि अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर की गई धोखाधड़ी और फर्जी अकाउंट ऑपरेशन के जरिए निकालने की योजना का हिस्सा थी।
इस मामले का सबसे चर्चित पहलू BTS सदस्य जंगकुक से जुड़ा है। आरोप है कि साइबर गिरोह ने उनके नाम पर मौजूद HYBE कंपनी के शेयरों को अवैध रूप से ट्रांसफर करने की कोशिश की। यह राशि लगभग 8.4 अरब वॉन यानी करीब ₹50.6 करोड़ आंकी गई है। हालांकि, वित्तीय संस्थानों की सतर्कता के चलते संदिग्ध लेनदेन को समय रहते रोक दिया गया और किसी प्रकार का वास्तविक नुकसान नहीं हुआ।
जांच एजेंसियों ने बताया कि बैंकिंग और निवेश सिस्टम में असामान्य गतिविधियों को समय पर पकड़ लिया गया, जिससे बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी टल गई। इस पूरे नेटवर्क ने फर्जी पहचान और डिजिटल दस्तावेजों के सहारे कई खातों को सक्रिय करने की कोशिश की थी, लेकिन सुरक्षा तंत्र की वजह से उनके कई प्रयास विफल हो गए।
इस साइबर गिरोह ने केवल जंगकुक ही नहीं, बल्कि दक्षिण कोरिया के कई धनी व्यक्तियों और कॉरपोरेट अधिकारियों को भी निशाना बनाने की कोशिश की थी। जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा था और इसके सदस्य अलग-अलग देशों में बैठकर डिजिटल फ्रॉड ऑपरेशन को अंजाम दे रहे थे।
प्रत्यर्पित आरोपी से पूछताछ के बाद जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की वित्तीय और तकनीकी कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं क्योंकि इस गिरोह का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क काफी विस्तृत है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह मामला दर्शाता है कि आधुनिक साइबर अपराध अब केवल साधारण हैकिंग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें सोशल इंजीनियरिंग, डेटा ब्रीच और फर्जी डिजिटल इकोसिस्टम का इस्तेमाल बड़े स्तर पर किया जा रहा है। फर्जी ऐप, क्लोन वेबसाइट और नकली KYC सिस्टम के जरिए यह गिरोह वित्तीय संस्थानों को धोखा देने की कोशिश करता है।
इस घटना के बाद दक्षिण कोरिया सहित कई देशों की साइबर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। बैंकिंग सेक्टर ने भी अपनी निगरानी प्रणाली को और मजबूत करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। संदिग्ध ट्रांजेक्शन पर रीयल-टाइम अलर्ट और मल्टी-लेयर वेरिफिकेशन सिस्टम को अधिक सख्त किया जा रहा है।
अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या मैसेज के माध्यम से अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें। साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है, ताकि भविष्य में इस तरह की अंतरराष्ट्रीय साजिशों को समय रहते रोका जा सके।
