Foxconn की नॉर्थ अमेरिका मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स पर साइबर हमले के बाद Nitrogen रैनसमवेयर गिरोह ने 8 TB डेटा चोरी का दावा किया।

Foxconn पर साइबर अटैक से हड़कंप: रैनसमवेयर गिरोह ने Apple, Nvidia समेत कई कंपनियों के संवेदनशील डेटा चोरी का दावा

Team The420
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नई दिल्ली। वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन से जुड़ी दिग्गज कंपनी Foxconn एक बड़े साइबर हमले की चपेट में आ गई है। कंपनी ने मंगलवार को पुष्टि की है कि उसके नॉर्थ अमेरिका स्थित कुछ मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स पर साइबर अटैक हुआ है। यह हमला ऐसे समय में सामने आया है जब रैनसमवेयर गिरोह “Nitrogen” ने दावा किया है कि उसने कंपनी के सिस्टम से लगभग 8 टेराबाइट डेटा, यानी 1.1 करोड़ से अधिक फाइलें चोरी कर ली हैं।

Foxconn के प्रवक्ता के अनुसार, साइबर हमले की जानकारी मिलते ही कंपनी की सुरक्षा टीम ने तत्काल इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम सक्रिय कर दिया। प्रभावित इकाइयों में ऑपरेशनल कंटिन्यूटी बनाए रखने के लिए कई तकनीकी और सुरक्षा उपाय लागू किए गए, जिसके बाद धीरे-धीरे उत्पादन को सामान्य स्थिति में लाया गया। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल उत्पादन और डिलीवरी पर किसी बड़े पैमाने पर असर नहीं पड़ा है।

रैनसमवेयर समूह Nitrogen ने दावा किया है कि उसने इस हमले के दौरान Apple, Nvidia, Intel, Google और Dell जैसी कई बड़ी टेक कंपनियों से जुड़े संवेदनशील दस्तावेजों तक पहुंच हासिल कर ली है। गिरोह का कहना है कि चोरी किए गए डेटा में प्रोजेक्ट डॉक्यूमेंटेशन, तकनीकी डिजाइन, आंतरिक निर्देश और कई महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग फाइलें शामिल हैं। हालांकि Foxconn ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है कि उसके किसी ग्राहक का डेटा वास्तव में प्रभावित हुआ है या नहीं।

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साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के हमले वैश्विक सप्लाई चेन के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं, क्योंकि Foxconn जैसी कंपनियां दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों के लिए हार्डवेयर निर्माण का महत्वपूर्ण केंद्र हैं। किसी भी स्तर पर डेटा लीक या सिस्टम बाधित होने से कई देशों की तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है।

रिपोर्टों के अनुसार, Nitrogen रैनसमवेयर समूह 2023 से सक्रिय है और इसे कंटि नामक पहले से लीक हुए रैनसमवेयर कोड से विकसित एक खतरनाक नेटवर्क माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह समूह लगातार अपनी तकनीक को अपडेट कर रहा है और VMware ESXi जैसे एंटरप्राइज सिस्टम को भी निशाना बना रहा है। एक हालिया रिपोर्ट में यह भी सामने आया था कि इस समूह का डिक्रिप्शन सिस्टम तकनीकी खामी के कारण कई बार पीड़ितों के डेटा को वापस बहाल करने में असफल रहा है, जिससे फिरौती भुगतान भी बेकार साबित हो सकता है।

Foxconn पहले भी साइबर हमलों का शिकार रह चुका है। वर्ष 2024 में इसके एक सहयोगी सेमीकंडक्टर यूनिट पर LockBit रैनसमवेयर ग्रुप ने हमला करने का दावा किया था। इससे पहले 2022 में भी कंपनी की एक अन्य विदेशी इकाई को निशाना बनाया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार हो रहे ऐसे हमले यह संकेत देते हैं कि बड़ी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां साइबर अपराधियों के प्रमुख टारगेट बन चुकी हैं।

वर्तमान हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियां और कंपनी की साइबर टीम मिलकर यह जांच कर रही हैं कि घुसपैठ किस माध्यम से हुई और क्या किसी अंदरूनी कमजोरी या सप्लाई चेन एक्सेस का दुरुपयोग किया गया। फिलहाल प्राथमिकता सिस्टम को पूरी तरह सुरक्षित करना और किसी भी संभावित डेटा रिसाव को रोकना है।

तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में ऐसे हमलों की संख्या और जटिलता दोनों बढ़ सकती हैं। खासकर तब जब एआई आधारित तकनीकों और ऑटोमेटेड हैकिंग टूल्स का उपयोग साइबर अपराधियों द्वारा तेजी से किया जा रहा है।

Foxconn ने फिलहाल सभी प्रभावित फैक्ट्रियों को सामान्य संचालन में वापस लाने का दावा किया है, लेकिन साइबर हमले की गहराई और संभावित डेटा लीक को लेकर जांच अभी जारी है।

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