देहरादून। बहुचर्चित LUCC चिटफंड घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (Central Bureau of Investigation) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को देश के अलग-अलग हिस्सों से गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी का दावा है कि यह घोटाला उत्तराखंड के सबसे बड़े अनियमित निवेश घोटालों में से एक हो सकता है, जिसमें एक लाख से अधिक निवेशकों से करीब ₹800 करोड़ जमा कराए गए और ₹400 करोड़ से ज्यादा की कथित धोखाधड़ी हुई।
गिरफ्तार आरोपियों में सुशील गोखरू, राजेंद्र सिंह बिष्ट, तरुण कुमार मौर्य, गौरव रोहिल्ला और ममता भंडारी शामिल हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, ये सभी LUCC यानी लोनी अर्बन मल्टी-स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी (Loni Urban Multi-State Credit & Thrift Cooperative Society) से जुड़े नेटवर्क का हिस्सा बताए जा रहे हैं।
यह मामला तब राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया जब उत्तराखंड हाईकोर्ट की नैनीताल बेंच ने राज्यभर में दर्ज सभी FIR को एक साथ CBI को ट्रांसफर करने का आदेश दिया। इसके बाद नवंबर 2025 में एजेंसी ने भारतीय दंड संहिता, भारतीय न्याय संहिता, अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध कानून और जमाकर्ताओं के हित संरक्षण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया।
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जांच में अब तक सामने आया है कि निवेशकों को हाई रिटर्न, सुरक्षित निवेश और कम समय में रकम दोगुनी होने जैसे वादों के जरिए योजनाओं में पैसा लगाने के लिए प्रेरित किया गया। ग्रामीण और छोटे शहरों के लोगों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया, जहां एजेंट नेटवर्क के जरिए बड़ी संख्या में निवेश जुटाया गया।
CBI सूत्रों के अनुसार, शुरुआत में कुछ निवेशकों को भुगतान भी किया गया ताकि योजनाओं पर भरोसा बना रहे। लेकिन बाद में भुगतान रुक गया और बड़ी संख्या में जमाकर्ताओं की रकम फंस गई। एजेंसी का अनुमान है कि कुल निवेश राशि लगभग ₹800 करोड़ तक पहुंच सकती है, जबकि वास्तविक धोखाधड़ी ₹400 करोड़ से अधिक की हो सकती है।
जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि घोटाले से अर्जित रकम का इस्तेमाल कई अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया। इन संपत्तियों की जानकारी उत्तराखंड सरकार के वित्त विभाग को भेज दी गई है ताकि उन्हें फ्रीज कर आगे पीड़ित निवेशकों को राहत देने की प्रक्रिया शुरू की जा सके।
मामले का मुख्य आरोपी समीर अग्रवाल और उसकी पत्नी सानिया अग्रवाल फिलहाल विदेश में बताए जा रहे हैं। CBI ने दोनों के खिलाफ नोटिस और लुकआउट सर्कुलर जारी किए हैं। एजेंसी तकनीकी निगरानी, बैंकिंग ट्रेल और डिजिटल डेटा के जरिए उनके नेटवर्क को ट्रैक करने में जुटी हुई है।
सूत्रों का कहना है कि जांच के दौरान कई ऐसे दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड मिले हैं, जिनसे यह संकेत मिलता है कि निवेशकों की रकम को अलग-अलग खातों और प्रॉपर्टी डील्स के जरिए ट्रांसफर किया गया। एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल थे तथा किन स्तरों पर मिलीभगत हुई।
आर्थिक अपराध विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे चिटफंड और अनियमित जमा योजनाएं अक्सर छोटे निवेशकों को ऊंचे मुनाफे का लालच देकर जाल में फंसाती हैं। प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि वित्तीय धोखाधड़ी करने वाले नेटवर्क अब डिजिटल प्रमोशन, सोशल मीडिया और लोकल एजेंट सिस्टम का इस्तेमाल कर लोगों का भरोसा जीतते हैं, जिसके कारण ठगी का दायरा तेजी से बढ़ जाता है।
फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों को संबंधित अदालत में पेश किए जाने की तैयारी है। CBI ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां तथा संपत्ति जब्ती की कार्रवाई भी हो सकती है।
