महाराष्ट्र में 2024 में साइबर अपराधों में तेज वृद्धि, ऑनलाइन फ्रॉड सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरा।

महाराष्ट्र में साइबर अपराध का विस्फोट: 2024 में दर्ज हुए 9,922 केस, ऑनलाइन फ्रॉड बना सबसे बड़ा खतरा

Team The420
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मुंबई। डिजिटल लेन-देन, सोशल मीडिया और ऑनलाइन सेवाओं के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच महाराष्ट्र में साइबर अपराध खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के 2024 के आंकड़ों ने राज्य में बढ़ती ऑनलाइन ठगी, साइबर शोषण और डिजिटल ब्लैकमेलिंग की गंभीर तस्वीर सामने रखी है। रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र में वर्ष 2024 के दौरान कुल 9,922 साइबर अपराध मामले दर्ज किए गए, जिनमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी ऑनलाइन फ्रॉड से जुड़े अपराधों की रही।

आंकड़ों के अनुसार राज्य में दर्ज कुल साइबर अपराध मामलों में से 6,198 केस धोखाधड़ी के उद्देश्य से किए गए थे। इसके अलावा 544 मामले यौन शोषण से जुड़े पाए गए, जबकि 68 मामले जबरन वसूली, 64 शरारत या प्रैंक और 53 मामले गुस्से या भावनात्मक कारणों से किए गए साइबर अपराधों के रूप में दर्ज हुए। जांच एजेंसियों के मुताबिक सोशल इंजीनियरिंग, फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म, डिजिटल अरेस्ट, OTP फ्रॉड और फेक KYC जैसे तरीकों का इस्तेमाल सबसे ज्यादा देखने को मिला।

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NCRB डेटा यह भी दर्शाता है कि साइबर अपराधों में शामिल नेटवर्क अब अधिक संगठित और तकनीकी रूप से सक्षम हो चुके हैं। वर्ष 2024 के दौरान महाराष्ट्र में साइबर अपराधों के मामलों में कुल 2,526 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 51 महिलाएं भी शामिल हैं। जांच में सामने आया कि कई गिरोह फर्जी बैंक खातों, किराये के सिम कार्ड, क्रिप्टो ट्रांजैक्शन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहे थे ताकि पैसों के ट्रेल को छिपाया जा सके।

महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराधों में भी चिंताजनक वृद्धि दर्ज की गई है। NCRB के मुताबिक महाराष्ट्र पुलिस ने 2024 में महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध के कुल 2,496 मामले दर्ज किए। इनमें 410 केस साइबर स्टॉकिंग और साइबर बुलिंग से जुड़े थे। इसके अलावा 55 मामले साइबर पोर्नोग्राफी, अश्लील सामग्री होस्ट और प्रकाशित करने से संबंधित पाए गए, जबकि 21 मामलों में ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग और धमकी देने की शिकायत दर्ज हुई।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए महिलाओं को निशाना बनाना अब साइबर अपराधियों की आम रणनीति बनती जा रही है। कई मामलों में आरोपी नकली प्रोफाइल बनाकर दोस्ती करते हैं, निजी जानकारी हासिल करते हैं और बाद में मॉर्फ्ड फोटो, वीडियो कॉल रिकॉर्डिंग या निजी चैट के जरिए ब्लैकमेलिंग शुरू कर देते हैं।

बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों के आंकड़े भी गंभीर चिंता पैदा कर रहे हैं। NCRB रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र में बच्चों से जुड़े कुल 161 साइबर अपराध मामले दर्ज हुए। इनमें 49 मामले साइबर स्टॉकिंग और बुलिंग के थे, जबकि 42 मामलों में बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री ऑनलाइन प्रसारित करने के आरोप सामने आए। इसके अलावा पांच मामलों में बच्चों को ऑनलाइन धमकी और ब्लैकमेल करने की शिकायत दर्ज की गई।

प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि साइबर अपराधी अब मनोवैज्ञानिक दबाव और सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल पहले से कहीं अधिक आक्रामक तरीके से कर रहे हैं। उनके अनुसार बच्चे और महिलाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सबसे ज्यादा संवेदनशील लक्ष्य बन चुके हैं, इसलिए परिवारों को साइबर जागरूकता बढ़ाने की तत्काल जरूरत है।

महानगरों की बात करें तो बेंगलुरु देश में सबसे ज्यादा साइबर अपराध दर्ज करने वाला शहर रहा, जहां 2024 में 17,561 मामले सामने आए। इसके बाद मुंबई दूसरे स्थान पर रहा, जहां कुल 4,939 साइबर अपराध दर्ज किए गए। हैदराबाद 4,009 मामलों के साथ तीसरे स्थान पर रहा।

मुंबई में दर्ज मामलों में भी ऑनलाइन फ्रॉड सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरा। शहर में दर्ज 4,939 मामलों में से 3,831 मामले धोखाधड़ी से जुड़े थे। इसके अलावा 214 मामले यौन शोषण, 53 प्रैंक, 34 जबरन वसूली और 34 भावनात्मक कारणों से किए गए साइबर अपराधों के रूप में दर्ज हुए।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में AI आधारित फ्रॉड, डीपफेक वीडियो, फर्जी निवेश ऐप और डिजिटल पहचान चोरी जैसे अपराध और तेजी से बढ़ सकते हैं। ऐसे में मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचा, डिजिटल साक्षरता और त्वरित शिकायत प्रणाली ही इस बढ़ते खतरे से निपटने का सबसे बड़ा हथियार मानी जा रही है।

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