आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा में जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) चोरी का एक बड़ा और संगठित मामला सामने आया है, जिसमें करीब ₹45 करोड़ की टैक्स चोरी का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस और टेक्निकल सेल की संयुक्त कार्रवाई में इस रैकेट से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अन्य कई आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।
यह पूरा नेटवर्क फर्जी फर्मों के जरिए बिना किसी वास्तविक खरीद-फरोख्त के फर्जी बिल तैयार कर सरकार से करोड़ों रुपये की आईटीसी हड़पने का काम कर रहा था।
फर्जी फर्मों के नाम पर चल रहा था बड़ा खेल
जांच में सामने आया है कि यह गिरोह आर.एस. ट्रेडर्स, बालाजी ट्रेडर्स, आकाश ट्रेडर्स, सिंह ट्रेडर्स और पी.के. ट्रेडर्स जैसी फर्जी फर्मों के नाम पर काम कर रहा था। इन फर्मों के जरिए कागजों पर लेनदेन दिखाकर टैक्स क्रेडिट लिया जा रहा था, जबकि वास्तविक रूप से कोई माल की आपूर्ति नहीं हो रही थी। इस संगठित रैकेट का उद्देश्य केवल फर्जी बिलिंग के माध्यम से सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाना था।
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शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
मामला 1 नवंबर 2025 को तब सामने आया जब राज्य कर अधिकारी प्रशांत कुमार गौतम ने इस फर्जीवाड़े की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर थाना लोहामंडी में केस दर्ज किया गया, जिसके बाद पुलिस और तकनीकी टीम ने जांच शुरू की। जांच के दौरान यह सामने आया कि इस पूरे नेटवर्क में कुल 23 लोग शामिल हैं, जो अलग-अलग स्तर पर इस फर्जी बिलिंग और टैक्स चोरी में भूमिका निभा रहे थे।
तीन आरोपी गिरफ्तार, डिजिटल उपकरण बरामद
रविवार को पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में वसीम राजा उर्फ सलीम, शाकिब और शोएब शामिल हैं, जो मेरठ के निवासी बताए जा रहे हैं। इनके कब्जे से एक लैपटॉप, तीन मोबाइल फोन और एक कार बरामद की गई है। पुलिस के अनुसार इन उपकरणों का इस्तेमाल फर्जी बिलिंग, डेटा एंट्री और लेनदेन के रिकॉर्ड तैयार करने में किया जा रहा था।
23 लोगों की भूमिका सामने, कई फरार
जांच में यह भी सामने आया है कि इस रैकेट में कुल 23 लोगों की संलिप्तता है। इनमें से कई लोगों की पहचान कर ली गई है और उनके खिलाफ गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
फरार आरोपियों में राहुल, अंकित, अरशद, मुजफ्फर, वहिद राजपूत, आशीष, जावेद (अहमदाबाद), सोना झा, अनस, आनंद (प्रयागराज), गिर्जेश तिवारी, अमित (रोहिणी, दिल्ली), अंकुर सिंह, अनीश (मेरठ) और ओमकार (अलीगढ़) समेत अन्य नाम शामिल हैं।
अंतरराज्यीय नेटवर्क की आशंका
पुलिस जांच में यह संकेत भी मिले हैं कि यह सिर्फ एक स्थानीय गिरोह नहीं, बल्कि एक अंतरराज्यीय नेटवर्क है, जो अलग-अलग शहरों में फर्जी फर्म बनाकर टैक्स चोरी को अंजाम दे रहा था। दस्तावेजी लेनदेन और डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए यह पूरा सिस्टम चलाया जा रहा था।
डिजिटल लेनदेन और फर्जी बिलिंग का इस्तेमाल
जांच अधिकारियों के अनुसार यह गिरोह आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर फर्जी इनवॉइस, ई-वे बिल और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करता था, जिससे जांच एजेंसियों को लंबे समय तक गुमराह किया जा सके। बिना वास्तविक सप्लाई के केवल कागजों पर कारोबार दिखाकर करोड़ों रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम की जा रही थी।
कानूनी कार्रवाई और जांच जारी
मामले में पहले ही एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस अब इस नेटवर्क की वित्तीय लेनदेन श्रृंखला और अन्य सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही पूरे गिरोह का खुलासा किया जाएगा और इसमें शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
₹45 करोड़ की GST ITC चोरी का यह मामला न केवल कर व्यवस्था में बड़ी सेंध है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे फर्जी कंपनियों और डिजिटल तकनीक के गलत इस्तेमाल से संगठित आर्थिक अपराध को अंजाम दिया जा रहा है। पुलिस और जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने की दिशा में कार्रवाई कर रही हैं।
