नई दिल्ली। साइबर सुरक्षा की दुनिया में एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें वियतनाम से जुड़े हैकर्स ने Google की आधिकारिक सर्विस Google AppSheet का दुरुपयोग कर दुनिया भर में लगभग 30,000 फेसबुक अकाउंट्स को निशाना बनाया है। इस पूरे अभियान को साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं ने “Account Dumpling” नाम दिया है, जो फिशिंग और सोशल इंजीनियरिंग पर आधारित एक संगठित साइबर हमला है।
साइबर सुरक्षा फर्म Guardio के रिसर्चर शेक्ड चेन द्वारा जारी रिपोर्ट में इस बड़े ऑपरेशन का खुलासा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला बेहद योजनाबद्ध तरीके से चलाया गया, जिसमें भरोसेमंद डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर यूजर्स को धोखे में रखा गया और उनकी लॉगिन जानकारी चुरा ली गई।
Google AppSheet का गलत इस्तेमाल बना साइबर हथियार
हैकर्स ने Google AppSheet के ईमेल सिस्टम का उपयोग कर फर्जी ईमेल भेजे, जिससे वे असली और भरोसेमंद दिखाई दिए। इन ईमेल्स को स्पैम फिल्टर से बचाने के लिए इस तकनीक का सहारा लिया गया, जिससे कई यूजर्स आसानी से जाल में फंस गए।
इन फर्जी संदेशों में मेटा (Meta) सपोर्ट टीम का नाम इस्तेमाल किया गया और यूजर्स को यह डर दिखाया गया कि उनका फेसबुक अकाउंट हमेशा के लिए बंद किया जा सकता है। डर और जल्दबाजी में कई लोगों ने ईमेल में दिए गए लिंक पर क्लिक कर अपनी लॉगिन डिटेल्स साझा कर दीं।
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‘Account Dumpling’ हमला कैसे हुआ संगठित तरीके से
इस साइबर हमले में चार अलग-अलग फिशिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। सबसे पहले फर्जी फेसबुक हेल्प सेंटर पेज तैयार किए गए, जहां यूजर्स से उनकी निजी जानकारी जैसे जन्मतिथि, मोबाइल नंबर और पहचान दस्तावेज मांगे गए।
दूसरी रणनीति में नकली “सिक्योरिटी चेक” और “ब्लू बैज वेरिफिकेशन” के जरिए कैप्चा सिस्टम दिखाया गया, जिससे टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) कोड चोरी किए गए।
तीसरे तरीके में गूगल ड्राइव और कैनवा जैसे प्लेटफॉर्म से बनाए गए फर्जी डॉक्यूमेंट्स के जरिए पासवर्ड और स्क्रीनशॉट हासिल किए गए। चौथे चरण में नौकरी और कमाई के फर्जी ऑफर देकर लोगों को आकर्षित किया गया और उनकी जानकारी जुटाई गई।
चुराया गया डेटा टेलीग्राम पर बेचा गया
रिपोर्ट के अनुसार, चोरी किए गए फेसबुक अकाउंट्स और यूजर्स की संवेदनशील जानकारी को बाद में टेलीग्राम चैनलों के जरिए बेचा जा रहा था। इस डेटा का इस्तेमाल आगे और साइबर फ्रॉड, पहचान चोरी और अन्य अवैध ऑनलाइन गतिविधियों में किए जाने की आशंका जताई गई है।
यह हमला सिर्फ किसी एक देश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत, अमेरिका, इटली, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों के यूजर्स प्रभावित हुए हैं।
वियतनाम कनेक्शन से जुड़ा डिजिटल सुराग
जांच में सामने आया है कि इस पूरे साइबर ऑपरेशन के पीछे वियतनाम से जुड़े एक व्यक्ति की भूमिका हो सकती है। कैनवा डॉक्यूमेंट्स के मेटाडेटा में “PHẠM TÀI TÂN” नाम पाया गया है, जो जांच में अहम सुराग बनकर उभरा है।
इसके अलावा, इंटरनेट पर की गई आगे की जांच में यह नाम एक डिजिटल मार्केटिंग वेबसाइट से भी जुड़ा पाया गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि यह एक संगठित साइबर नेटवर्क हो सकता है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की चेतावनी
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह ने कहा कि ऐसे हमले यह दर्शाते हैं कि अब साइबर अपराधी भरोसेमंद प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर लोगों के विश्वास को हथियार बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि “जब तक यूजर्स डिजिटल सतर्कता नहीं अपनाएंगे, ऐसे फिशिंग हमले और अधिक प्रभावी होते रहेंगे।”
विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेंड बेहद खतरनाक है क्योंकि इसमें असली सेवाओं की विश्वसनीयता का दुरुपयोग किया जा रहा है, जिससे यूजर्स आसानी से धोखे में आ जाते हैं।
निष्कर्ष
Google AppSheet के दुरुपयोग से हुआ यह साइबर हमला डिजिटल सुरक्षा के लिए एक गंभीर चेतावनी है। 30,000 से अधिक अकाउंट्स के प्रभावित होने से यह स्पष्ट है कि अब ऑनलाइन दुनिया में सतर्कता पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गई है।
यह घटना यह भी दर्शाती है कि आधुनिक साइबर अपराध तेजी से विकसित हो रहे हैं और अधिक संगठित व तकनीकी होते जा रहे हैं। ऐसे में मजबूत पासवर्ड, दो-स्तरीय सुरक्षा और संदिग्ध लिंक से बचाव ही डिजिटल सुरक्षा की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है।
