गाजियाबाद पुलिस ने विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों की कथित ठगी करने वाले गिरोह के दो और आरोपियों को गिरफ्तार कर 64 पासपोर्ट और नकदी बरामद की।

इटली नौकरी के नाम पर ₹4.07 लाख की ठगी: फर्जी अपॉइंटमेंट लेटर से चला विदेश रोजगार का बड़ा साइबर जाल

Team The420
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सीकर। राजस्थान के सीकर जिले में विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर एक संगठित साइबर ठगी का मामला सामने आया है, जिसमें एक युवक से इटली में वेयरहाउस मैनेजर की नौकरी का झांसा देकर करीब ₹4.07 लाख की ठगी कर ली गई। आरोपी ने पीड़ित को हर महीने ₹1.5 लाख वेतन और बेहतर भविष्य का लालच देकर पहले विश्वास में लिया और फिर अलग-अलग चरणों में पैसे वसूलता रहा।

यह मामला सदर थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता पंकज ने पुलिस को दी गई रिपोर्ट में बताया कि उसकी पहचान सरदारशहर निवासी शंकरलाल जाट से एक प्राइवेट स्कूल में नौकरी के दौरान हुई थी। दोनों के बीच शुरुआती परिचय के बाद बातचीत व्हाट्सएप पर होने लगी और यहीं से ठगी का सिलसिला शुरू हुआ।

सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ भरोसे का खेल

आरोपी शंकरलाल जाट व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर लगातार ऐसे पोस्ट डालता था, जिनमें दावा किया जाता था कि वह लोगों को विदेश में नौकरी दिलाने का काम करता है। उसने यह भी कहा कि उसके दुबई, मलेशिया और अरब देशों में संपर्क हैं और वह आसानी से वर्क वीजा और विदेशी नौकरियां उपलब्ध करा सकता है।

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इसी भरोसे का फायदा उठाकर उसने पंकज को इटली में वेयरहाउस मैनेजर की नौकरी का ऑफर दिया। आरोपी ने कहा कि इस नौकरी के लिए कुल ₹12.50 लाख खर्च आएगा, लेकिन बदले में हर महीने ₹1.5 लाख सैलरी और ओवरटाइम मिलेगा। आकर्षक ऑफर के चलते पीड़ित ने प्रक्रिया आगे बढ़ा दी।

किस्तों में पैसे वसूले, फिर भेजा फर्जी ऑफर लेटर

पीड़ित के अनुसार, आरोपी ने शुरुआत में ही विभिन्न बहानों से लगभग ₹4 लाख की रकम अलग-अलग किश्तों में वसूल ली। इसके बाद दस्तावेज़ सत्यापन और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर ₹7,000 और ले लिए गए।

भरोसा बनाए रखने के लिए आरोपी ने 10 फरवरी को व्हाट्सएप पर एक कथित अपॉइंटमेंट लेटर भेजा, जिसमें दावा किया गया कि नौकरी कन्फर्म हो चुकी है। इस फर्जी दस्तावेज के आधार पर पीड़ित को दिल्ली स्थित इटली वीजा एप्लीकेशन सेंटर बुलाया गया।

हालांकि बाद में 28 मार्च को अचानक बताया गया कि नौकरी की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाएगी और काम रोक दिया गया है।

जांच में सामने आया फर्जीवाड़ा

कुछ समय बाद पीड़ित को संदेह हुआ, जिसके बाद उसने दस्तावेजों की जांच की। जांच में सामने आया कि जो अपॉइंटमेंट लेटर भेजा गया था, वह पूरी तरह फर्जी था और किसी आधिकारिक संस्था से जारी नहीं किया गया था।

इसके बाद जब पीड़ित ने अपनी रकम वापस मांगी, तो आरोपी ने पैसे लौटाने से साफ इनकार कर दिया। शिकायत में यह भी बताया गया है कि इस ठगी में राहुल सोनी नामक एक अन्य व्यक्ति की भी भूमिका रही है, जिसने पूरी प्रक्रिया में सहयोग किया।

विदेश नौकरी के नाम पर बढ़ता साइबर नेटवर्क

जांच में यह संकेत मिले हैं कि आरोपी सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए बेरोजगार युवाओं को टारगेट करता था। पहले आकर्षक सैलरी और विदेश अवसरों का सपना दिखाया जाता था, फिर प्रोसेसिंग फीस और दस्तावेज़ी खर्च के नाम पर रकम वसूली जाती थी।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के मामलों में फर्जी जॉब ऑफर लेटर, नकली वीजा प्रोसेसिंग और व्हाट्सएप आधारित नेटवर्क सबसे आम हथकंडे बन चुके हैं।

पुलिस जांच जारी

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। डिजिटल ट्रांजैक्शन, चैट रिकॉर्ड और बैंक डिटेल्स की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गिरोह से और कितने लोग जुड़े हुए हैं और कितने पीड़ित सामने आ सकते हैं।

निष्कर्ष

सीकर का यह मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि विदेश में नौकरी के नाम पर साइबर ठग किस तरह युवाओं के सपनों को निशाना बना रहे हैं। आकर्षक वेतन और बेहतर जीवन का लालच देकर की जा रही ऐसी ठगी लगातार बढ़ रही है, जिससे सावधानी और सत्यापन की आवश्यकता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

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