नई दिल्ली। साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है और अब यह बदलाव सरकारी सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंच चुका है। ताज़ा घटनाक्रम में अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी (NSA) ने Anthropic द्वारा विकसित उन्नत AI मॉडल ‘Mythos’ की टेस्टिंग शुरू की है, जिसका उद्देश्य माइक्रोसॉफ्ट जैसे बड़े और व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले सॉफ्टवेयर सिस्टम्स में सुरक्षा खामियों की पहचान करना है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह परीक्षण साइबर डिफेंस के पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर AI-आधारित विश्लेषण की ओर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। शुरुआती मूल्यांकन में एजेंसी के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने पाया है कि ‘Mythos’ मॉडल कमजोरियों को पहचानने में तेज़ और अधिक प्रभावी साबित हो रहा है, जिससे साइबर सुरक्षा रणनीतियों में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
NSA की साइबर सुरक्षा इकाई इस AI मॉडल के आउटपुट की तुलना अपने मौजूदा सुरक्षा टूल्स और रिसर्च सिस्टम्स से कर रही है, ताकि इसकी सटीकता और उपयोगिता का आकलन किया जा सके। हालांकि अभी तक किसी विशिष्ट सॉफ्टवेयर खामी का आधिकारिक खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन परीक्षण को एक महत्वपूर्ण तकनीकी प्रयोग माना जा रहा है।
Anthropic ने ‘Mythos’ को सीमित संस्थानों के लिए ही उपलब्ध कराया है और इसे सार्वजनिक नहीं किया गया है। कंपनी का मानना है कि यदि यह मॉडल खुले तौर पर जारी किया गया तो इसका दुरुपयोग साइबर अपराधी भी कर सकते हैं। इसी कारण इसे केवल नियंत्रित वातावरण में ही उपयोग करने की अनुमति दी गई है।
इस बीच, व्हाइट हाउस स्तर पर भी इस तकनीक को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अधिक संस्थानों को इस AI मॉडल की पहुंच देने की योजना का विरोध किया जा रहा है, क्योंकि इसकी क्षमताएं संवेदनशील सुरक्षा प्रणालियों के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं।
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Cybersecurity विशेषज्ञों का मानना है कि AI अब सिर्फ एक सहायक तकनीक नहीं रह गई है, बल्कि यह साइबर सुरक्षा के मूल ढांचे को बदलने की क्षमता रखती है। इस संदर्भ में प्रसिद्ध साइबर विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि “AI आधारित सिस्टम जैसे Mythos साइबर अपराधियों की तुलना में कहीं तेज़ी से पैटर्न पहचान सकते हैं, लेकिन यही तकनीक अगर गलत हाथों में चली जाए तो यह बड़े पैमाने पर डिजिटल हमलों को भी आसान बना सकती है।”
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि अमेरिकी रक्षा विभाग और Anthropic के बीच संबंध पहले से ही जटिल रहे हैं। कुछ समय पहले रक्षा विभाग ने कंपनी को संभावित सप्लाई चेन जोखिम के रूप में चिह्नित किया था, जिसके बाद इस तकनीक के उपयोग को लेकर बहस तेज हो गई थी। हालांकि, बाद में कंपनी ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी और अस्थायी राहत भी हासिल की।
Anthropic के CEO ने हाल ही में व्हाइट हाउस अधिकारियों से मुलाकात कर यह प्रस्ताव रखा कि ‘Mythos’ का नियंत्रित संस्करण सरकारी प्रणालियों में उपयोग किया जा सकता है, जिससे सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके।
Microsoft की ओर से इस परीक्षण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा गया है कि कंपनी सरकारी ग्राहकों के साथ मिलकर लगातार अपने प्लेटफॉर्म्स को मजबूत करने पर काम कर रही है और नई तकनीकों को सुरक्षा सुधार के अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि NSA द्वारा इस तरह AI मॉडल का परीक्षण साइबर सुरक्षा के भविष्य की दिशा तय कर सकता है, जहां खतरे और सुरक्षा दोनों ही AI आधारित सिस्टम्स पर निर्भर होते जा रहे हैं।
