नई दिल्ली। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में घिरे इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के सह-संस्थापक और निदेशक विनेश चंदेल को दिल्ली की एक अदालत से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उनकी अंतरिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। यह याचिका उन्होंने अपनी 74 वर्षीय मां की स्वास्थ्य स्थिति का हवाला देते हुए दायर की थी, जो डिमेंशिया से पीड़ित बताई जा रही हैं।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शेफाली बरनाला टंडन ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि प्रस्तुत परिस्थितियां “असाधारण मानवीय आधार” की श्रेणी में नहीं आतीं, जिनके आधार पर अंतरिम जमानत दी जा सके। अदालत ने कहा कि मामले में ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि याचिकाकर्ता की अनुपस्थिति में उनकी मां की देखभाल संभव नहीं है।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि उम्रदराज माता-पिता की चिकित्सा स्थिति के प्रति संवेदनशीलता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, लेकिन उपलब्ध रिकॉर्ड यह नहीं दर्शाता कि यह कोई अचानक उत्पन्न हुई जीवन-धमकाने वाली आपात स्थिति है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुसार, यह मामला कथित तौर पर करोड़ों रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क से जुड़ा है। जांच एजेंसी ने अब तक लगभग ₹50 करोड़ की अवैध वित्तीय गतिविधियों का पता लगाने का दावा किया है। आरोप है कि यह राशि विभिन्न राजनीतिक और चुनावी गतिविधियों से जुड़े लेन-देन के जरिए संचालित की गई।
ईडी ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित राजनीतिक परामर्श फर्म ने धन को औपचारिक बैंकिंग चैनलों और नकद लेन-देन के बीच विभाजित कर एक जटिल वित्तीय संरचना तैयार की, ताकि अवैध धन के स्रोत को छिपाया जा सके। जांच एजेंसी का दावा है कि इन फंड्स का उपयोग चुनावी अभियानों और जनमत को प्रभावित करने वाली गतिविधियों में किया गया।
FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference
विनेश चंदेल, जिनकी कंपनी में लगभग 33 प्रतिशत हिस्सेदारी बताई जाती है, को इस साल अप्रैल में गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी से पहले यह मामला पश्चिम बंगाल कोयला घोटाले से जुड़े एक व्यापक जांच नेटवर्क का हिस्सा था, जिसमें कई अन्य व्यक्तियों और कारोबारी नामों की भी जांच चल रही है।
ईडी की जांच की जड़ें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की उस प्रारंभिक जांच से जुड़ी हैं, जिसमें ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड क्षेत्रों में अवैध खनन और कोयले की अवैध बिक्री के आरोप सामने आए थे। इस मामले में अनूप माझी को एक प्रमुख कथित सिंडिकेट सदस्य के रूप में चिन्हित किया गया है।
अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि जांच के वर्तमान चरण में आरोपी की उपस्थिति महत्वपूर्ण है और जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले किसी भी संभावित जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए अंतरिम राहत देने का आधार पर्याप्त नहीं पाया गया।
इस फैसले के बाद मामले में राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा तेज हो गई है। जहां एक ओर जांच एजेंसियां इसे वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई का हिस्सा बता रही हैं, वहीं दूसरी ओर आरोपी पक्ष इसे कानूनी प्रक्रिया के तहत चुनौती देने की तैयारी में है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में अदालतें आमतौर पर जांच की गंभीरता, साक्ष्यों की स्थिति और मानवीय आधारों के बीच संतुलन बनाकर निर्णय देती हैं। इस मामले में अदालत ने जांच के हितों को प्राथमिकता दी है।
फिलहाल, विनेश चंदेल न्यायिक हिरासत में हैं और मामले की अगली सुनवाई एवं जांच प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।
