तुरा। बिजली बिल के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले एक शातिर आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मामला West Garo Hills जिले का है, जहां आरोपी खुद को Meghalaya Power Distribution Corporation Limited (MePDCL) का अधिकारी बताकर घर-घर जाकर पैसे वसूलता था। जांच में खुलासा हुआ है कि यह सिर्फ एक मामला नहीं, बल्कि एक बड़े फर्जीवाड़ा नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी की पहचान Kissan B. Marak के रूप में हुई है, जो साउथ वेस्ट गारो हिल्स के अंपाती क्षेत्र का रहने वाला है। उसे 27 अप्रैल को काफी समय तक फरार रहने के बाद पकड़ा गया। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी लंबे समय से लोगों को निशाना बना रहा था और खुद को बिजली विभाग का कर्मचारी बताकर विश्वास हासिल करता था।
यह मामला 10 अप्रैल को सामने आया, जब जेंजल थाना क्षेत्र के नेंगकलग्री इलाके में एक व्यक्ति के घर आरोपी पहुंचा। उसने खुद को MePDCL का अधिकारी बताते हुए बिजली बिल जमा करने के नाम पर ₹6,750 की रकम वसूल ली। बाद में जब पीड़ित ने विभाग से सत्यापन किया, तो पता चला कि आरोपी का बिजली कंपनी से कोई संबंध नहीं है। इसके बाद शिकायत दर्ज कराई गई और जांच शुरू हुई।
जांच के दौरान पुलिस को चौंकाने वाली जानकारी मिली। पता चला कि आरोपी ने इसी तरह के तरीके से कई अन्य लोगों को भी निशाना बनाया है। अब तक उसके खिलाफ कम से कम छह और मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जो जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों से जुड़े हैं। अधिकारियों का मानना है कि वास्तविक पीड़ितों की संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है, क्योंकि कई लोग अब तक सामने नहीं आए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। यह भी आशंका जताई जा रही है कि आरोपी अकेले काम नहीं कर रहा था, बल्कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह हो सकता है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या अन्य लोग भी इस नेटवर्क में शामिल हैं और क्या इसी तरह की घटनाएं अन्य जिलों में भी हुई हैं।
FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference
स्थानीय प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी सरकारी कर्मचारी या एजेंसी को भुगतान करने से पहले उसकी पहचान और वैधता की पुष्टि जरूर करें। खासतौर पर घर आकर पैसे मांगने वाले व्यक्तियों से सावधान रहने की जरूरत है।
इस तरह के मामलों को देखते हुए साइबर और आर्थिक अपराध विशेषज्ञों का मानना है कि आज के समय में ठग पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ विश्वास और पहचान का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। कई बार लोग सरकारी नाम और पद सुनकर बिना जांच-पड़ताल के भुगतान कर देते हैं, जिसका फायदा ऐसे अपराधी उठाते हैं।
एक साइबर सुरक्षा विश्लेषक के अनुसार, “इस तरह के अपराध सोशल इंजीनियरिंग का हिस्सा हैं, जहां अपराधी खुद को विश्वसनीय बनाकर लोगों से पैसे ऐंठते हैं। लोगों को हर स्तर पर सतर्क रहना होगा और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देनी चाहिए।”
पुलिस ने यह भी अपील की है कि जो लोग इस तरह की ठगी का शिकार हुए हैं, वे आगे आकर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके। साथ ही, संदिग्ध व्यक्तियों या गतिविधियों की जानकारी नजदीकी थाने या कंट्रोल रूम को देने की सलाह दी गई है।
कुल मिलाकर, यह मामला न सिर्फ एक व्यक्ति की गिरफ्तारी तक सीमित है, बल्कि एक बड़े ठगी नेटवर्क की संभावनाओं की ओर इशारा करता है। आने वाले दिनों में जांच के दौरान और खुलासे होने की उम्मीद है, जिससे इस तरह के अपराधों पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।
