OTP, फर्जी कॉल, KYC अपडेट और AI आधारित तकनीकों से साइबर ठगों की नई रणनीति; डिजिटल सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता, विशेषज्ञों ने दी सतर्क रहने की सलाह

AI और डिजिटल ट्रिक्स से बढ़ा साइबर फ्रॉड, आम लोग बन रहे आसान शिकार

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By Roopa
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नई दिल्ली। देश में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार के साथ ही साइबर अपराध भी तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। अब ठग केवल सामान्य तरीकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उन्नत डिजिटल ट्रिक्स का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं। इसके चलते आम नागरिकों की जीवनभर की कमाई कुछ ही मिनटों में बैंक खातों से गायब हो रही है।

जानकारों के अनुसार, साइबर ठग अब पहले से अधिक संगठित और तकनीकी रूप से सक्षम हो चुके हैं। वे खुद को बैंक अधिकारी, पुलिस कर्मी, कूरियर डिलीवरी एजेंट या किसी सरकारी विभाग का प्रतिनिधि बताकर लोगों को कॉल करते हैं। इसके बाद भरोसा जीतने के लिए डर या लालच का माहौल बनाया जाता है और धीरे-धीरे OTP, बैंक डिटेल्स, UPI PIN और अन्य संवेदनशील जानकारी हासिल कर ली जाती है।

सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला तरीका OTP फ्रॉड बन चुका है। किसी भी बहाने से मोबाइल पर आए OTP को हासिल कर ठग तुरंत बैंक खाते से पैसे ट्रांसफर कर देते हैं। कई मामलों में पीड़ित को तब तक जानकारी नहीं होती जब तक पूरा खाता खाली नहीं हो जाता।

इसके साथ ही AI आधारित तकनीकें साइबर अपराध को और खतरनाक बना रही हैं। अब ठग AI वॉयस क्लोनिंग के जरिए किसी परिचित या अधिकारी की आवाज की नकल कर सकते हैं। इससे लोग आसानी से धोखा खा जाते हैं और उन्हें लगता है कि वास्तव में कोई विश्वसनीय व्यक्ति बात कर रहा है।

अनजान लिंक के जरिए होने वाली ठगी भी लगातार बढ़ रही है। WhatsApp, SMS और सोशल मीडिया पर आकर्षक ऑफर, कैशबैक या गिफ्ट का लालच देकर लिंक भेजे जाते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति इन पर क्लिक करता है, वह फर्जी वेबसाइट पर पहुंच जाता है, जहां से उसका मोबाइल डेटा, बैंकिंग जानकारी और पासवर्ड साइबर अपराधियों के हाथ लग जाता है।

KYC अपडेट के नाम पर भी बड़े स्तर पर ठगी हो रही है। ठग बैंक या वित्तीय संस्था का कर्मचारी बनकर दस्तावेज और बैंक डिटेल्स मांगते हैं। कई लोग बिना जांच के जानकारी साझा कर देते हैं, जिसके बाद उनके बैंक खाते खाली कर दिए जाते हैं।

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साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल अपराध का सबसे बड़ा कारण तकनीक नहीं, बल्कि जागरूकता की कमी है। लोग जल्दबाजी में बिना सत्यापन के जानकारी साझा कर देते हैं, जिसका फायदा अपराधी उठाते हैं।

इस संबंध में Future Crime Research Foundation की रिपोर्ट में भी चेतावनी दी गई है कि आने वाले समय में साइबर अपराध और अधिक व्यक्तिगत और टार्गेटेड हो सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि AI आधारित फर्जी प्रोफाइल, डीपफेक कॉल और सोशल इंजीनियरिंग तकनीकें आम लोगों के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह ने कहा कि साइबर अपराधी अब केवल तकनीक का ही नहीं, बल्कि मानव मनोविज्ञान का भी गहराई से उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “लोगों को डर और लालच में फंसाकर उनकी जानकारी हासिल की जाती है, और एक छोटी सी गलती पूरे बैंक खाते को खाली कर सकती है।”

उन्होंने आगे कहा कि डिजिटल सुरक्षा केवल तकनीकी उपायों से नहीं, बल्कि व्यवहारिक सतर्कता से भी सुनिश्चित की जा सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी है कि किसी भी स्थिति में OTP, बैंक पासवर्ड या UPI PIN साझा न किया जाए। किसी भी अनजान कॉल, लिंक या मैसेज पर तुरंत भरोसा न करें और बैंकिंग से जुड़े सभी कार्य केवल आधिकारिक ऐप या वेबसाइट के माध्यम से ही करें।

इसके अलावा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रिपोर्टिंग करना भी आवश्यक है, ताकि अन्य लोग भी सुरक्षित रह सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर फ्रॉड से बचाव का सबसे मजबूत तरीका जागरूकता और सतर्कता ही है।

जैसे-जैसे तकनीक आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे साइबर अपराध के तरीके भी बदल रहे हैं। ऐसे में डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने के लिए हर व्यक्ति को अधिक सतर्क और जागरूक रहने की जरूरत है।

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