वैश्विक बैंकिंग सेक्टर में बढ़ते फ्रॉड जोखिम के बीच ब्रिटेन के प्रमुख बैंक Barclays ने जोखिम भरे कर्ज वितरण पर सख्ती शुरू कर दी है। बैंक को यूके की मॉर्गेज लेंडिंग फर्म Market Financial Solutions (MFS) के पतन से लगभग £228 मिलियन (करीब ₹2,400 करोड़) का झटका लगा है, जिसके बाद बैंक ने अपनी लेंडिंग रणनीति में बड़ा बदलाव किया है।
बैंक के मुताबिक, MFS का फरवरी 2026 में कथित फ्रॉड आरोपों के बीच पतन हुआ, जिसके बाद नियामक एजेंसियों ने मामले की जांच शुरू कर दी। Barclays, जो इस फर्म को बैंकिंग सेवाएं दे रहा था, इस घटना से सीधे प्रभावित हुआ। इस नुकसान के कारण 2026 की पहली तिमाही में बैंक के कुल क्रेडिट इम्पेयरमेंट चार्ज बढ़कर £823 मिलियन (करीब ₹8,700 करोड़) तक पहुंच गए, जो पिछले साल इसी अवधि में £643 मिलियन (करीब ₹6,800 करोड़) थे।
बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी C. S. Venkatakrishnan ने संकेत दिए कि ऐसे फ्रॉड मामलों की संख्या बढ़ रही है और इन्हें पहले से पहचानना बेहद चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों के बिजनेस मॉडल कमजोर या पारदर्शिता रहित हैं, उन्हें अब कर्ज देने में सख्ती बरती जाएगी। खासकर उन संस्थाओं पर फोकस किया जा रहा है, जिनके वित्तीय नियंत्रण और ऑडिट सिस्टम मजबूत नहीं हैं।
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MFS के अलावा, Barclays को पहले भी अमेरिकी सब-प्राइम ऑटो लेंडर Tricolor और ऑटो पार्ट्स कंपनी First Brands से जुड़े मामलों में नुकसान उठाना पड़ा है, जहां फ्रॉड या कुप्रबंधन के आरोप सामने आए थे। इन घटनाओं ने $2 ट्रिलियन (करीब ₹1.6 लाख करोड़) के प्राइवेट क्रेडिट सेक्टर की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि “शैडो बैंकिंग” के तहत आने वाले इस सेक्टर में पारदर्शिता की कमी और जटिल संरचना के कारण जोखिम अधिक रहता है। Andrew Bailey ने भी इसे “काफी अपारदर्शी दुनिया” बताते हुए चेतावनी दी है कि यदि निगरानी और स्ट्रेस टेस्टिंग मजबूत नहीं हुई, तो इससे पूरे वित्तीय सिस्टम में भरोसा कमजोर पड़ सकता है।
इसी बीच, Barclays ने यूके के मोटर फाइनेंस स्कैंडल से जुड़े मुआवजों के लिए भी अतिरिक्त £105 मिलियन (करीब ₹1,100 करोड़) का प्रावधान किया है। इसके साथ ही इस मद में कुल प्रावधान बढ़कर £430 मिलियन (करीब ₹4,500 करोड़) हो गया है। यह कदम ग्राहकों को संभावित नुकसान की भरपाई के लिए उठाया गया है।
हालांकि इन चुनौतियों के बावजूद बैंक का समग्र प्रदर्शन संतुलित रहा है। 2026 की पहली तिमाही में Barclays का प्री-टैक्स प्रॉफिट 3% बढ़कर £2.8 बिलियन (करीब ₹29,500 करोड़) हो गया, जबकि कुल रेवेन्यू 6% बढ़कर £8.2 बिलियन (करीब ₹86,000 करोड़) दर्ज किया गया। खास बात यह रही कि इन्वेस्टमेंट बैंकिंग से आय पहली बार £4 बिलियन (करीब ₹42,000 करोड़) के पार पहुंची, जिसमें इक्विटी ट्रेडिंग से 16% की वृद्धि का योगदान रहा।
विश्लेषकों के अनुसार, मध्य-पूर्व में जारी तनाव और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के चलते बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा है, जिससे ट्रेडिंग गतिविधियों को बल मिला है। हालांकि, लंबे समय तक ऊंची ऊर्जा कीमतें वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं।
बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल उपभोक्ताओं और कंपनियों की वित्तीय स्थिति स्थिर बनी हुई है, लेकिन लोग अब खर्च को प्राथमिकता के आधार पर सीमित कर रहे हैं और कर्ज चुकाने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। यह व्यवहार अनिश्चित आर्थिक माहौल में सतर्कता को दर्शाता है।
कुल मिलाकर, Barclays का यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि वैश्विक बैंकिंग सिस्टम में फ्रॉड जोखिम और प्राइवेट क्रेडिट सेक्टर की चुनौतियां बढ़ रही हैं। ऐसे में बैंक अब सतर्क रणनीति अपनाते हुए जोखिम कम करने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं।
