अहमदाबाद में डीपफेक और आधार डेटा के दुरुपयोग से पहचान चोरी और डिजिटल लोन फ्रॉड का खुलासा हुआ, जिसमें चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

अहमदाबाद में डीपफेक-आधार फ्रॉड का भंडाफोड़: हाईटेक पहचान चोरी और लोन घोटाले में चार गिरफ्तार

Team The420
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अहमदाबाद। साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई में अहमदाबाद की साइबर क्राइम यूनिट ने एक ऐसे संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर आधार से जुड़े डेटा में हेरफेर कर पहचान चोरी और वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दिया। इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो अवैध तरीके से व्यक्तिगत जानकारी हासिल कर मोबाइल नंबर अपडेट करने और डिजिटल वित्तीय प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग करने में शामिल बताए जा रहे हैं।

यह मामला तब सामने आया जब शहर के एक कारोबारी ने शिकायत दर्ज कराई कि उसके आधार से लिंक मोबाइल नंबर बिना उसकी जानकारी के बदल दिया गया है। जब उसने अपने व्यवसायिक दस्तावेजों के लिए आधार सेवाओं का उपयोग करना चाहा, तो उसके प्रोफाइल में कई अनधिकृत बदलाव पाए गए, जिनमें मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी शामिल थे। आगे की जांच में यह भी सामने आया कि उसके आधार से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल कर डिजिलॉकर एक्सेस किया गया, ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी की गई, बैंक खाते खोले गए और डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए पर्सनल लोन के लिए आवेदन किए गए।

जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने आधार के फेस ऑथेंटिकेशन सिस्टम को धोखा देने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया। पीड़ित की फोटो का इस्तेमाल कर AI-जनित डीपफेक वीडियो तैयार किए गए, जिनमें आंख झपकने और चेहरे के हाव-भाव जैसी गतिविधियां दिखाई गईं। इन वीडियो का उपयोग बायोमेट्रिक सत्यापन को पार करने के लिए किया गया, जिससे आधार अपडेट प्रक्रिया के दौरान महत्वपूर्ण बदलाव संभव हो सके।

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बताया गया कि यह फर्जी अपडेट आधार अपडेट किट के जरिए किए गए, जो आमतौर पर अधिकृत कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) ऑपरेटरों द्वारा उपयोग किए जाते हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, इन किट्स का दुरुपयोग कर आधार से जुड़े मोबाइल नंबर को गैरकानूनी तरीके से बदला गया, जिससे आरोपियों को पीड़ित की डिजिटल पहचान पर नियंत्रण मिल गया।

गिरफ्तार आरोपियों में कनुभाई बहादुरसिंह परमार (32), आनंद जिले का CSC ऑपरेटर; आशीष राजेंद्रभाई वालंद (27), वडोदरा का CSC ऑपरेटर; मोहम्मद कैफ इकबालभाई पटेल (26), भरूच जिले के CSC सेंटर से जुड़ा; और दीप महेशभाई गुप्ता (29), अहमदाबाद का मशीन ऑपरेटर शामिल हैं। सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

जांच में यह भी सामने आया है कि परमार ने कमीशन के बदले आधार अपडेट किट उपलब्ध कराई, जबकि वालंद ने मोबाइल नंबर बदलने की प्रक्रिया में इन किट्स के उपयोग में मदद की। कैफ पटेल ने आधार नंबर, फोटो और मोबाइल नंबर जैसे डेटा जुटाने और डीपफेक वीडियो तैयार करने में समन्वय की भूमिका निभाई। वहीं, दीप गुप्ता ने पीड़ित की जानकारी एकत्र करने और उसे आगे भेजने में सहायता की।

जांच एजेंसियों के अनुसार, जैसे ही आरोपियों को आधार सिस्टम तक पहुंच मिली, उन्होंने डिजिलॉकर और अन्य ई-केवाईसी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर बैंक खाते खोले और पीड़ित के नाम पर डिजिटल लोन के लिए आवेदन किए। यह मामला दिखाता है कि किस तरह आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर पहचान चोरी को और अधिक जटिल और खतरनाक बनाया जा रहा है।

इस कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने उस आधार अपडेट किट को भी बरामद किया है, जिसका उपयोग इस पूरे फर्जीवाड़े में किया गया था। साथ ही, यह भी पता चला है कि एक आरोपी पहले भी फर्जी आधार कार्ड बनाने के मामले में शामिल रह चुका है, जिससे इस नेटवर्क के संगठित होने के संकेत मिलते हैं।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों से डीपफेक तकनीक के बढ़ते खतरे का अंदाजा लगाया जा सकता है। एल्गोरिथा सिक्योरिटी के एक रिसर्चर के अनुसार, अब अपराधी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कर पारंपरिक सुरक्षा प्रणालियों को भी मात दे रहे हैं, जिससे पहचान आधारित धोखाधड़ी को पकड़ना और कठिन होता जा रहा है।

आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत आपराधिक साजिश, जालसाजी, पहचान चोरी, धोखाधड़ी और कंप्यूटर संसाधनों तक अनधिकृत पहुंच जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले में आगे की जांच जारी है और एजेंसियां इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान करने में जुटी हैं।

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