इंदौर। बैंकिंग धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सख्त कार्रवाई करते हुए ₹7.76 करोड़ मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। यह कार्रवाई 24 अप्रैल 2026 को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की गई। जब्त की गई संपत्तियां जमीन के रूप में हैं, जो पूर्व में रूचि अक्रोनी इंडस्ट्रीज लिमिटेड (अब स्टीलटेक रिसोर्सेज लिमिटेड) के नाम पर दर्ज थीं।
यह मामला उस कथित बैंक फ्रॉड से जुड़ा है, जिसमें कंपनी पर इंदौर स्थित यूको बैंक को ₹58 करोड़ से अधिक का नुकसान पहुंचाने का आरोप है। इस पूरे प्रकरण की जांच की शुरुआत एक प्राथमिकी के आधार पर हुई थी, जिसमें कंपनी पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और भारतीय दंड संहिता, 1860 के तहत गंभीर आरोप लगाए गए थे।
जांच एजेंसी के अनुसार, कंपनी ने बैंक से क्रेडिट सुविधाएं और लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) हासिल करने के लिए फर्जी, मनगढ़ंत और हेरफेर किए गए दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। इन दस्तावेजों के जरिए बिना किसी वास्तविक व्यापारिक गतिविधि के बैंक से धन निकाला गया। इसके बाद इस राशि को सुनियोजित तरीके से अलग-अलग कंपनियों के माध्यम से घुमाकर फिर से मुख्य कंपनी तक पहुंचाया गया।
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ED की जांच में सामने आया है कि कंपनी ने अपने समूह और संबद्ध कंपनियों में निवेश दिखाकर और उन्हें ऋण व अग्रिम के रूप में धन देकर फंड डायवर्जन और सिफनिंग का जाल बिछाया। यह पूरा नेटवर्क कई आपस में जुड़े संस्थाओं के जरिए संचालित किया गया, जिन पर एक ही समूह का नियंत्रण था। इस प्रक्रिया में अवैध रूप से प्राप्त धन को ‘लेयरिंग’ के जरिए छिपाया गया, ताकि उसकी वास्तविक उत्पत्ति का पता न चल सके।
जांच एजेंसी के मुताबिक, इस घोटाले में इस्तेमाल किए गए धन का एक बड़ा हिस्सा बाद में विभिन्न अचल संपत्तियों की खरीद में लगाया गया। इसी कड़ी में ED ने अब ₹7.76 करोड़ मूल्य की जमीनों को अटैच किया है, जिन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए अर्जित संपत्ति माना गया है।
गौरतलब है कि यह पहली कार्रवाई नहीं है। इससे पहले भी इसी मामले में ED इंदौर ने ₹10.15 करोड़ मूल्य की संपत्तियों को अटैच किया था। लगातार हो रही कार्रवाई से संकेत मिलता है कि एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की गहराई तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं और आने वाले समय में और खुलासे संभव हैं।
सूत्रों के अनुसार, इस घोटाले में फंड के उपयोग और ट्रांजैक्शन की जटिल संरचना को देखते हुए जांच काफी व्यापक स्तर पर की जा रही है। कई कंपनियों और उनके वित्तीय लेन-देन की जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि धन का अंतिम लाभार्थी कौन था और किन-किन लोगों की इसमें भूमिका रही।
बैंकिंग सिस्टम में इस तरह की धोखाधड़ी एक गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है, जहां कंपनियां फर्जी दस्तावेजों के जरिए बड़े पैमाने पर कर्ज हासिल कर लेती हैं और बाद में उसे अलग-अलग माध्यमों से डायवर्ट कर देती हैं। इस मामले में भी जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि क्या बैंकिंग प्रक्रियाओं में किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई थी।
फिलहाल ED ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और आगे और संपत्तियों की पहचान तथा कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इस कार्रवाई को बैंकिंग धोखाधड़ी के खिलाफ एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे ऐसे मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ा संदेश जाएगा।
