केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जनवरी 2026 से भारत में 9,400 संदिग्ध WhatsApp अकाउंट बंद किए गए। यह कार्रवाई डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क पर टेलीकॉम, बैंकिंग और टेक प्लेटफॉर्म्स के संयुक्त अभियान का हिस्सा है।

डिजिटल अरेस्ट पर बड़ा प्रहार: भारत में 9,400 संदिग्ध WhatsApp अकाउंट बंद, सुप्रीम कोर्ट को केंद्र की रिपोर्ट

Team The420
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नई दिल्ली:  देश में तेजी से बढ़ रहे ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम पर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की है, जिसमें बड़े स्तर पर की गई कार्रवाई का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2026 से अब तक भारत में करीब 9,400 संदिग्ध व्हाट्सएप अकाउंट्स को बंद किया गया है, जो कथित रूप से साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराधों में शामिल थे।

संयुक्त अभियान के तहत हुई कार्रवाई

यह कार्रवाई सरकार, टेलीकॉम विभाग, बैंकिंग संस्थानों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बीच समन्वित अभियान का हिस्सा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए बहु-स्तरीय रणनीति अपनाई जा रही है, जिसमें रियल-टाइम मॉनिटरिंग, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और त्वरित कार्रवाई को प्राथमिकता दी जा रही है।

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भी डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों पर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने संकेत दिया है कि पीड़ितों को राहत देने और अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत और एकरूप व्यवस्था जरूरी है।

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फर्जी अधिकारी बनकर डराते हैं अपराधी

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि साइबर अपराधी खुद को पुलिस, जांच एजेंसी या सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और उनसे पैसे ऐंठते हैं। इस तरह के मामलों में फर्जी दस्तावेज, वीडियो कॉल और लंबे समय तक मानसिक दबाव बनाकर पीड़ितों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का भ्रम दिया जाता है।

सरकारी एजेंसियों के अनुसार, इस तरह के अपराधों में व्हाट्सएप और अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा था। इसी को देखते हुए तकनीकी कंपनियों के साथ मिलकर संदिग्ध अकाउंट्स की पहचान की गई और उन्हें चरणबद्ध तरीके से ब्लॉक किया गया।

हजारों लोगों को निशाना बनाने की आशंका

जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इन अकाउंट्स के जरिए देशभर में हजारों लोगों को निशाना बनाया गया था। कई मामलों में अपराधियों ने पीड़ितों से लाखों रुपये तक की ठगी की। हालांकि समय रहते कार्रवाई होने से कई संभावित ठगी के मामलों को रोका भी जा सका।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल अरेस्ट स्कैम में तकनीक और मनोवैज्ञानिक दबाव का खतरनाक मिश्रण देखने को मिलता है। अपराधी पहले भरोसा जीतते हैं और फिर डर का माहौल बनाकर पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।

संगठित गिरोहों की भूमिका पर जांच

साइबर क्राइम एक्सपर्ट्स के अनुसार, इन अपराधों में संगठित गिरोह काम करते हैं, जो अलग-अलग राज्यों या देशों से ऑपरेट करते हैं। इसी वजह से जांच और धन की रिकवरी जटिल हो जाती है। प्रख्यात साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा, “साइबर अपराधी अब हैकिंग पर नहीं, बल्कि सोशल इंजीनियरिंग पर ज्यादा निर्भर हो गए हैं। वे लोगों के डर और विश्वास का फायदा उठाकर उन्हें जाल में फंसाते हैं। डिजिटल अरेस्ट स्कैम इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।”

उन्होंने आगे चेतावनी दी कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे अपराध और तेजी से बढ़ सकते हैं। उनके अनुसार, नागरिकों को जागरूक करना और तुरंत प्रतिक्रिया देना ही इस समय सबसे प्रभावी बचाव है।

बायोमेट्रिक सिम वेरिफिकेशन और प्लेटफॉर्म जवाबदेही पर जोर

सरकार ने रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने के लिए और कड़े कदम उठाए जाएंगे। इसमें बायोमेट्रिक सिम वेरिफिकेशन, संदिग्ध खातों पर तुरंत रोक और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करना शामिल है।

इसके अलावा, आईटी मंत्रालय और साइबर एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे संदिग्ध नेटवर्क्स की पहचान कर उन्हें शुरुआती स्तर पर ही निष्क्रिय करें। साथ ही, बैंकों को भी अलर्ट सिस्टम मजबूत करने के लिए कहा गया है ताकि धोखाधड़ी के मामलों को तुरंत रोका जा सके।

डेटा शेयरिंग और रियल-टाइम अलर्ट से तेज कार्रवाई

अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे अभियान में इंटर-एजेंसी समन्वय को सबसे अहम माना जा रहा है। टेलीकॉम, बैंकिंग और टेक कंपनियों के बीच डेटा शेयरिंग और रियल-टाइम अलर्ट सिस्टम से साइबर अपराधों पर तेजी से कार्रवाई संभव हो रही है।

सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल, लिंक या वीडियो कॉल पर भरोसा न करें और खुद को ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी किसी भी धमकी से न डराएं। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट करने की सलाह दी गई है।

यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि देश में साइबर अपराधों के खिलाफ अब बड़े स्तर पर संगठित और तकनीक-आधारित लड़ाई लड़ी जा रही है। आने वाले समय में ऐसे अभियानों के जरिए डिजिटल ठगी पर और सख्ती से अंकुश लगाने की उम्मीद जताई जा रही है।

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