पटना। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की असिस्टेंट एजुकेशन डेवलपमेंट ऑफिसर (AEDO) भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। मामले में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने जांच तेज कर दी है और शुरुआती पड़ताल में परीक्षा प्रक्रिया में व्यापक गड़बड़ी, सॉल्वर गैंग की भूमिका और लाखों रुपये के लेन-देन का संकेत मिला है।
14 से 21 अप्रैल के बीच आयोजित इस परीक्षा के जरिए 935 पदों पर भर्ती की जानी थी, लेकिन परीक्षा के दौरान ही कई केंद्रों से गड़बड़ी और पेपर लीक जैसी शिकायतें सामने आने लगी थीं। इसके बाद मामला गंभीर होता गया और जांच की जिम्मेदारी EOU को सौंप दी गई।
जांच एजेंसी के अनुसार, अब तक इस मामले में पांच जिलों में कुल आठ प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं और 38 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि एक संगठित नेटवर्क उम्मीदवारों से लाखों रुपये लेकर उन्हें परीक्षा में पास कराने का भरोसा दे रहा था। इस नेटवर्क में तथाकथित ‘सॉल्वर गैंग’ की भूमिका अहम बताई जा रही है, जो उम्मीदवारों की जगह परीक्षा देने या उन्हें अनुचित तरीके से मदद करने का काम करता था।
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जांच में सामने आया है कि कई परीक्षा केंद्रों—जैसे मुंगेर, नालंदा, बेगूसराय, शेखपुरा और गया—में एक जैसी गड़बड़ियों का पैटर्न देखने को मिला। कई अभ्यर्थियों को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के साथ पकड़ा गया, जिससे संगठित नकल और तकनीकी मदद से परीक्षा पास कराने की आशंका और मजबूत हो गई।
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि इस पूरे नेटवर्क के तहत उम्मीदवारों से ₹25 लाख से ₹30 लाख तक की डील की जा रही थी, जिसमें उन्हें परीक्षा में सफलता सुनिश्चित कराने का वादा किया जाता था। यह रकम अलग-अलग माध्यमों से ली जाती थी और इसके बदले परीक्षा प्रक्रिया में हेरफेर की जाती थी।
EOU की जांच में एक निजी एजेंसी की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई है। जानकारी के अनुसार, Sai Edu Care Private Limited नामक कंपनी को परीक्षा आयोजित करने की जिम्मेदारी दी गई थी, जबकि यह एजेंसी पहले से ही राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा ब्लैकलिस्टेड बताई जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इस एजेंसी को इतनी महत्वपूर्ण परीक्षा की जिम्मेदारी कैसे दी गई।
जांच एजेंसी ने BPSC से परीक्षा से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों का पूरा विवरण मांगा है। साथ ही, बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज करने वाले कर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है और उनसे पूछताछ की जा रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है, जिसका उद्देश्य इस पूरे रैकेट के मास्टरमाइंड तक पहुंचना और इसमें शामिल सभी लोगों की पहचान करना है। SIT यह भी जांच कर रही है कि परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा मानकों में कहां चूक हुई और किस स्तर पर मिलीभगत से यह गड़बड़ी संभव हो सकी।
जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि यह नेटवर्क केवल बिहार तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसका दायरा अन्य राज्यों तक भी फैला हो सकता है। ऐसे में एजेंसियां अंतरराज्यीय कनेक्शन और वित्तीय लेन-देन की भी गहराई से पड़ताल कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में इस तरह की अनियमितताएं न केवल मेधावी छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय करती हैं, बल्कि पूरी चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
फिलहाल, जांच जारी है और EOU का कहना है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। एजेंसी इस पूरे मामले को संगठित अपराध के तौर पर देखते हुए हर पहलू—डिजिटल साक्ष्य, बैंकिंग लेन-देन और शामिल व्यक्तियों की भूमिका—की गहन जांच कर रही है।
