वाराणसी में ₹12 करोड़ से अधिक के GST फ्रॉड का खुलासा हुआ है। फर्जी फर्मों और नकली पते के जरिए ITC का अवैध लाभ उठाने के आरोप में मुख्य आरोपी पंकज कुमार को पंजाब से गिरफ्तार किया गया।

GST फ्रॉड का बड़ा खुलासा: ₹12 करोड़ से अधिक की ठगी में फर्जी फर्मों का नेटवर्क ध्वस्त

Team The420
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वाराणसी:  उत्तर प्रदेश के वाराणसी में जीएसटी चोरी से जुड़े एक बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसमें करीब ₹12 करोड़ से अधिक की कर चोरी किए जाने की बात सामने आई है। इस मामले में पुलिस और राज्य कर विभाग की संयुक्त कार्रवाई में एक मुख्य आरोपी को पंजाब से गिरफ्तार किया गया है, जो लंबे समय से फर्जी नाम और पते के सहारे बनाए गए नेटवर्क को संचालित कर रहा था।

कागजों पर बनी फर्मों से चल रहा था टैक्स चोरी का खेल

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह पूरा खेल फर्जी फर्मों के माध्यम से चलाया जा रहा था, जिनका अस्तित्व केवल कागजों तक सीमित था। इन कंपनियों को ऐसे पते पर पंजीकृत कराया गया था जहां किसी प्रकार का वास्तविक व्यापार या गतिविधि नहीं पाई गई। इन फर्मों के जरिए जीएसटी रिटर्न दाखिल कर फर्जी लेन-देन दिखाया जाता था और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का अवैध लाभ उठाया जाता था।

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी पंकज कुमार पंजाब के बरनाला जिले के गुरु तेग बहादुर नगर क्षेत्र का निवासी है। वह कई महीनों से फरार चल रहा था और उस पर वाराणसी के चेतगंज थाने में दो अलग-अलग मामले दर्ज थे। पुलिस टीम ने तकनीकी निगरानी और खुफिया इनपुट के आधार पर पंजाब में दबिश देकर उसे गिरफ्तार किया।

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सनशाइन इंटरप्राइजेज सहित कई फर्मों की जांच

अधिकारियों ने बताया कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन बेहद सुनियोजित तरीके से किया गया था। आरोपी ने “सनशाइन इंटरप्राइजेज” नाम की फर्म सहित कई अन्य कंपनियां कागजों पर पंजीकृत कराईं। इन फर्मों के जरिए बिना किसी वास्तविक माल की खरीद-बिक्री के फर्जी बिल तैयार किए जाते थे, जिससे टैक्स प्रणाली को भारी नुकसान पहुंचाया गया।

जांच में यह भी सामने आया है कि फर्जी इनवॉइस के जरिए कई अन्य कंपनियों को भी गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ दिया गया, जिससे सरकारी राजस्व को बड़ा नुकसान हुआ। शुरुआती अनुमान के अनुसार, यह घोटाला ₹12 करोड़ से अधिक का है, हालांकि जांच पूरी होने के बाद यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।

राज्य कर विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 8 अप्रैल को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसके बाद लगातार जांच के दौरान कई संदिग्ध लेन-देन और डिजिटल रिकॉर्ड सामने आए, जिनके आधार पर पुलिस ने आरोपी की तलाश तेज कर दी थी।

नेटवर्क में और लोगों की भूमिका की जांच

सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस पूरे नेटवर्क में और भी कई लोग शामिल हो सकते हैं, जो फर्जी कंपनियों के संचालन और वित्तीय लेन-देन में मदद कर रहे थे। इसी कारण अब मामले की जांच को और व्यापक किया जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में फर्जी फर्मों के जरिए जीएसटी चोरी के मामलों में तेजी आई है। ऐसे मामलों में आरोपी फर्जी दस्तावेजों, नकली पते और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर सिस्टम को धोखा देने की कोशिश करते हैं।

मोबाइल डेटा और बैंक लेन-देन की गहन जांच जारी

फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और उसके मोबाइल डेटा, बैंक लेन-देन और संपर्कों की गहन जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं, जिससे पूरे नेटवर्क की परतें खुलने की संभावना है।

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