चंडीगढ़। पंजाब के निलंबित DIG हरचरण सिंह भुल्लर से जुड़े रिश्वत मामले में जांच अब नए और व्यापक चरण में पहुंच गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मामले में अपनी कार्रवाई तेज करते हुए न केवल मुख्य आरोपियों पर, बल्कि उनके कथित सहयोगियों और संभावित वित्तीय नेटवर्क पर भी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। विशेष अदालत के ताज़ा आदेश के बाद यह मामला केवल ₹8 लाख की रिश्वत तक सीमित न रहकर एक संभावित बड़े भ्रष्टाचार नेटवर्क की जांच में बदलता दिख रहा है।
विशेष अदालत की जज भावना जैन ने CBI को अनुमति दी है कि ट्रैप केस में जब्त किए गए महत्वपूर्ण दस्तावेज, नकदी, मोबाइल फोन, डायरी और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को एक नई प्रारंभिक जांच (Preliminary Enquiry) में शामिल किया जा सकता है। यह नई जांच 19 फरवरी को दर्ज की गई थी, जिसमें अज्ञात सरकारी अधिकारियों और अन्य संभावित मध्यस्थों की भूमिका की जांच की जा रही है।
डिजिटल सबूत अब बने नए जांच का आधार
अदालत के आदेश के अनुसार, पहले से दर्ज ट्रैप केस में बरामद सामग्री—जैसे व्हाट्सऐप चैट, मोबाइल डेटा, और अन्य दस्तावेज—अब नई प्रारंभिक जांच का हिस्सा बन सकेंगे। यह सामग्री सह-आरोपी किर्शानु शारदा के आवास से बरामद की गई थी।
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CBI ने अदालत में दलील दी थी कि यह सबूत केवल एक सीमित ट्रैप केस तक नहीं, बल्कि एक व्यापक वित्तीय और प्रभावशाली नेटवर्क की ओर संकेत करते हैं। अदालत ने माना कि इन दस्तावेजों को नई जांच में शामिल करने से आरोपियों के अधिकारों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा और न ही मुख्य ट्रायल की निष्पक्षता प्रभावित होगी।
मुख्य केस में तेज सुनवाई की तैयारी
इस मामले में एक और अहम मोड़ 27 अप्रैल को आने वाला है, जब अदालत CBI की उस अर्जी पर सुनवाई करेगी जिसमें मुख्य रिश्वत केस में दिन-प्रतिदिन (day-to-day) ट्रायल चलाने की मांग की गई है। यदि यह अर्जी स्वीकार होती है, तो केस की सुनवाई प्रक्रिया में तेजी आ सकती है और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई तेज हो सकती है।
जांच कैसे बनी व्यापक नेटवर्क की कहानी
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह नई प्रारंभिक जांच उस विश्लेषण के बाद शुरू हुई जिसमें व्हाट्सऐप चैट्स और एक डायरी की जांच की गई थी। ये सामग्री पहले की छापेमारी के दौरान बरामद हुई थी।
सप्लीमेंट्री चार्जशीट में यह संकेत मिला था कि किर्शानु शारदा कथित रूप से वरिष्ठ अधिकारियों से अवैध लाभ दिलाने और विभिन्न मामलों में प्रभाव डालने में भूमिका निभा रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ डिजिटल बातचीत में न्यायिक और जांच प्रक्रियाओं पर निगरानी और प्रभाव डालने के संकेत मिले हैं।
₹8 लाख रिश्वत केस से शुरू हुई जांच
यह पूरा मामला 16 अक्टूबर को एक ट्रैप ऑपरेशन से शुरू हुआ था। उस समय तत्कालीन रूपनगर रेंज के DIG हरचरण सिंह भुल्लर और उनके सहयोगी किर्शानु शारदा को गिरफ्तार किया गया था।
आरोप है कि शारदा को एक शिकायतकर्ता से ₹5 लाख लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था। यह राशि कथित तौर पर कुल ₹8 लाख की रिश्वत का हिस्सा थी, जो एक FIR को निपटाने के लिए मांगी गई थी।
आरोपियों की आपत्तियां खारिज
दोनों आरोपियों ने जांच के विस्तार का विरोध करते हुए कहा था कि नई सामग्री पहले चार्जशीट का हिस्सा नहीं है और इससे उन्हें कानूनी नुकसान हो सकता है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि कुछ मामलों में राज्य पुलिस ही जांच की अधिकृत एजेंसी होनी चाहिए।
हालांकि अदालत ने इन सभी आपत्तियों को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि नवंबर 2025 में पहले ही इस मामले के अधिकार क्षेत्र को लेकर स्थिति स्पष्ट की जा चुकी है।
अदालत की अहम टिप्पणी
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जिन दस्तावेजों को अब नई जांच में शामिल किया जा रहा है, वे मुख्य केस में पहले से इस्तेमाल नहीं किए गए हैं। इसलिए इससे आरोपियों को कोई कानूनी नुकसान नहीं होगा और मुख्य ट्रायल की निष्पक्षता भी प्रभावित नहीं होगी।
जांच का दायरा आगे भी बढ़ने के संकेत
CBI अब अतिरिक्त वित्तीय दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और संदिग्ध संचार की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार यह भी जांच की जा रही है कि क्या अन्य सरकारी अधिकारी भी इस कथित नेटवर्क का हिस्सा थे या उनसे लाभ जुड़ा था।
निष्कर्ष
₹8 लाख की रिश्वत से शुरू हुआ यह मामला अब एक व्यापक भ्रष्टाचार जांच में बदलता दिख रहा है। अदालत की अनुमति के बाद CBI को अब डिजिटल सबूतों और वित्तीय लेन-देन की गहराई से जांच का अधिकार मिल गया है। आने वाले समय में यह मामला और बड़े खुलासों की ओर बढ़ सकता है, जिससे पूरे नेटवर्क की परतें खुलने की संभावना है।
