सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर तेज हुई जांच; 22 नए केस दर्ज, हजारों होमबायर्स की फंसी रकम की पड़ताल

“घर के सपनों पर छापा”: 8 राज्यों में 77 ठिकानों पर CBI की बड़ी रेड, बिल्डर-बैंक गठजोड़ की परतें खुलनी शुरू

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By Roopa
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नई दिल्ली: देश के रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े एक बड़े और बहुस्तरीय कथित घोटाले में केंद्रीय जांच एजेंसी ने मंगलवार को व्यापक कार्रवाई करते हुए 8 राज्यों में 77 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई उन आरोपों के बीच की गई है, जिनमें बिल्डरों और वित्तीय संस्थानों के बीच कथित मिलीभगत से घर खरीददारों की पूंजी के दुरुपयोग की बात सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इस मामले में 22 नए केस दर्ज किए गए हैं, जिसके साथ ही जांच ने रफ्तार पकड़ ली है।

सूत्रों के मुताबिक, छापेमारी दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, चेन्नै, पुदुचेरी सहित कई प्रमुख शहरों में की गई। जांच एजेंसी के रडार पर कई बड़े बिल्डर और उनके प्रोजेक्ट्स हैं, जिन पर आरोप है कि उन्होंने बैंकों के साथ मिलकर फंड के इस्तेमाल में गड़बड़ी की। कार्रवाई के दौरान कई अहम दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए हैं, जिनसे फंड फ्लो और लेन-देन की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।

यह पूरा मामला उन हजारों शिकायतों से जुड़ा है, जिनमें होमबायर्स ने आरोप लगाया था कि उन्होंने वर्षों तक ईएमआई चुकाई, लेकिन उन्हें समय पर घर का पजेशन नहीं मिला। कई मामलों में प्रोजेक्ट अधूरे छोड़ दिए गए, जबकि खरीदारों की रकम कहीं और डायवर्ट कर दी गई। इस कथित धोखाधड़ी ने न केवल निवेशकों को आर्थिक नुकसान पहुंचाया, बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए।

शीर्ष अदालत ने 29 अप्रैल 2025 को इस मामले में सख्ती दिखाते हुए जांच एजेंसी को निर्देश दिया था कि वह एनसीआर समेत विभिन्न क्षेत्रों में आरोपित बिल्डरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करे और जांच शुरू करे। इसके बाद पहले चरण में 28 केस दर्ज किए गए थे। सितंबर 2025 में अदालत ने 22 और मामलों में केस दर्ज करने का आदेश दिया, जिनमें खासतौर पर बिल्डरों और बैंकों के बीच संभावित गठजोड़ की जांच पर जोर दिया गया।

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अब तक कुल मिलाकर करीब 50 मामलों में जांच शुरू की जा चुकी है। एजेंसी का मानना है कि यह कोई अलग-थलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि एक संगठित पैटर्न के तहत फंड की हेराफेरी की गई। शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि कुछ मामलों में बैंकों ने होम लोन की रकम सीधे बिल्डरों को जारी की, लेकिन उस रकम का उपयोग निर्माण कार्य में नहीं हुआ। इसके बजाय फंड को अन्य प्रोजेक्ट्स या निजी खातों में ट्रांसफर किए जाने की आशंका है।

जांच के दायरे में आए प्रोजेक्ट्स दिल्ली-एनसीआर, मोहाली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु और प्रयागराज जैसे शहरों में फैले हुए हैं। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित गठजोड़ में किन-किन स्तरों पर जिम्मेदारियां तय होती हैं और किस तरह नियमों को दरकिनार कर निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की गई।

रियल एस्टेट सेक्टर के जानकारों का कहना है कि इस तरह के मामलों ने बाजार में भरोसे को गहरा नुकसान पहुंचाया है। इसी वजह से पिछले वर्षों में रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) जैसे कानून लागू किए गए, ताकि पारदर्शिता बढ़े और खरीदारों के हित सुरक्षित रह सकें। हालांकि, पुराने मामलों में अभी भी कई जटिलताएं बनी हुई हैं, जिनकी जांच जारी है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की कार्रवाई से न केवल दोषियों की पहचान होगी, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए एक सख्त संदेश भी जाएगा। फिलहाल, एजेंसी द्वारा जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी है, जिससे आने वाले समय में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

यह कार्रवाई उन हजारों परिवारों के लिए उम्मीद की किरण मानी जा रही है, जिनका घर पाने का सपना अधूरा रह गया। जांच के अगले चरण में यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस कथित घोटाले में कितनी गहराई तक नेटवर्क फैला हुआ था और किन-किन लोगों की भूमिका इसमें शामिल रही।

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