नई दिल्ली: देश में प्रस्तावित 2026 की जनगणना से पहले साइबर ठगों ने नया तरीका अपनाते हुए लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया और कई राज्यों से सामने आ रहे मामलों में ठग खुद को जनगणना अधिकारी बताकर लोगों से संवेदनशील जानकारी हासिल कर रहे हैं। फर्जी वेरिफिकेशन के नाम पर मोबाइल ऐप डाउनलोड करवाना, लिंक भेजना और OTP मांगना इस नए साइबर जाल का हिस्सा है, जिससे बैंक खातों तक सीधी पहुंच बनाई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, कई लोगों को कॉल, मैसेज या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क किया जा रहा है। ठग दावा करते हैं कि वे जनगणना विभाग से जुड़े हैं और डेटा वेरिफिकेशन के लिए कुछ जरूरी जानकारी चाहिए। इसके बाद वे आधार, पैन, बैंक डिटेल्स और OTP जैसी गोपनीय जानकारी मांगते हैं। कई मामलों में लोगों को एक संदिग्ध मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए भी कहा गया, जिसे इंस्टॉल करते ही फोन का डेटा और बैंकिंग एक्सेस खतरे में पड़ जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक सुनियोजित सोशल इंजीनियरिंग हमला है, जिसमें लोगों के विश्वास का फायदा उठाया जा रहा है। जैसे ही कोई व्यक्ति इन ठगों के झांसे में आता है, उसकी निजी जानकारी चोरी कर ली जाती है और बैंक खाते से पैसे निकाल लिए जाते हैं।
प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह कहते हैं, “ऐसे मामलों में ठग सरकारी प्रक्रिया और बड़े आयोजनों का सहारा लेकर लोगों का भरोसा जीतते हैं। जनगणना जैसे राष्ट्रीय अभियान का नाम लेकर वे डेटा चोरी करते हैं, जो आगे चलकर वित्तीय ठगी में इस्तेमाल होता है। लोगों को किसी भी अनजान लिंक, ऐप या कॉल से सतर्क रहना चाहिए।”
क्या पूछ सकते हैं असली जनगणना अधिकारी?
जनगणना एक आधिकारिक प्रक्रिया है, जिसमें देश की आबादी, सामाजिक और आर्थिक स्थिति से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाती है। इस दौरान अधिकृत गणनाकर्मी केवल सामान्य और गैर-वित्तीय जानकारी ही पूछते हैं। इनमें घर के सदस्यों की संख्या, नाम, उम्र, लिंग, वैवाहिक स्थिति, शिक्षा, पेशा, आवास की स्थिति और सुविधाओं से जुड़े सवाल शामिल होते हैं।
इसके अलावा, घर में उपलब्ध सुविधाओं जैसे पीने का पानी, बिजली, इंटरनेट, वाहन या रसोई गैस जैसी बुनियादी जानकारी भी ली जाती है। लेकिन किसी भी स्थिति में जनगणना अधिकारी बैंक अकाउंट नंबर, OTP, पासवर्ड, ATM डिटेल्स या वित्तीय जानकारी नहीं मांगते।
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डिजिटल जनगणना और बढ़ता जोखिम
2026 की जनगणना इस बार पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है, जिसमें मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए डेटा संग्रह किया जाएगा। इसमें जियो-टैगिंग और ऑनलाइन सेल्फ-एन्यूमरेशन जैसी सुविधाएं भी होंगी। नागरिकों को एक तय समयावधि में खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन भरने का विकल्प मिलेगा।
हालांकि, यही डिजिटल प्रक्रिया साइबर अपराधियों के लिए अवसर बन गई है। फर्जी ऐप और नकली वेबसाइट बनाकर लोगों को भ्रमित किया जा रहा है। कई मामलों में ठग घर-घर जाकर भी खुद को अधिकारी बताकर जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।
कैसे पहचानें असली अधिकारी?
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को अपनी जानकारी देने से पहले उसकी पहचान की पुष्टि करना जरूरी है। असली जनगणना अधिकारी के पास आधिकारिक पहचान पत्र और अधिकृत दस्तावेज होते हैं। इसके अलावा, डिजिटल प्रक्रिया में उनके पास एक वैध 11 अंकों की पहचान आईडी भी होती है।
यदि कोई व्यक्ति जल्दबाजी में जानकारी मांगता है, ऐप डाउनलोड करने का दबाव डालता है या बैंक से जुड़ी जानकारी चाहता है, तो यह साफ संकेत है कि वह ठग हो सकता है। ऐसे मामलों में तुरंत सावधान होकर जानकारी साझा करने से बचना चाहिए।
ठगी का शिकार होने पर क्या करें?
यदि कोई व्यक्ति इस तरह की धोखाधड़ी का शिकार हो जाता है, तो तुरंत कार्रवाई करना बेहद जरूरी है। सबसे पहले अपने बैंक को सूचित करें और लेनदेन को रोकने की कोशिश करें। इसके बाद राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या 112 नंबर पर आपातकालीन सहायता लें।
साथ ही, साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराना भी जरूरी है, ताकि समय रहते कार्रवाई हो सके और नुकसान को कम किया जा सके।
यह मामला साफ संकेत देता है कि डिजिटल दौर में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। जनगणना जैसे बड़े सरकारी अभियान के दौरान सतर्क रहना और केवल अधिकृत स्रोतों पर भरोसा करना ही साइबर ठगी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।
