दावा—95% मैसेज क्लाउड बैकअप में बिना सुरक्षा के सेव; व्हाट्सऐप बोला—चैट इन-ट्रांजिट पूरी तरह सुरक्षित, असली खामी बैकअप सेटिंग में

“व्हाट्सऐप की एन्क्रिप्शन सुरक्षा पर बड़ा सवाल”: टेलीग्राम प्रमुख पावेल दुरोव ने लगाया ‘कंज्यूमर फ्रॉड’ का आरोप

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By Roopa
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नई दिल्ली: इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ी बहस छिड़ गई है। इस बार विवाद के केंद्र में है लोकप्रिय ऐप WhatsApp और उसके एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन सिस्टम पर उठे सवाल। टेलीग्राम के संस्थापक और सीईओ Pavel Durov ने व्हाट्सऐप की सुरक्षा दावों को सीधे तौर पर “गायंट कंज्यूमर फ्रॉड” बताया है।

दुरोव का दावा है कि व्हाट्सऐप पर भेजे जाने वाले लगभग 95 प्रतिशत संदेश अंततः क्लाउड बैकअप के रूप में Apple और Google के सर्वर पर बिना पर्याप्त एन्क्रिप्शन सुरक्षा के स्टोर हो जाते हैं। उनके अनुसार, समस्या संदेशों के ट्रांसमिशन में नहीं बल्कि उसके बाद के स्टोरेज यानी बैकअप सिस्टम में है।

“एन्क्रिप्शन का दावा, लेकिन बैकअप में कमजोरी”

दुरोव ने अपने बयान में कहा कि व्हाट्सऐप का एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन सिर्फ चैट के दौरान काम करता है, लेकिन जैसे ही यूजर अपने चैट का बैकअप क्लाउड पर सेव करता है, सुरक्षा परत कमजोर हो जाती है। उनका दावा है कि बहुत कम यूजर्स बैकअप एन्क्रिप्शन को मैन्युअली ऑन करते हैं, जिसके चलते बड़ी मात्रा में डेटा संभावित रूप से असुरक्षित रह जाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि भले ही कोई यूजर अपने बैकअप को एन्क्रिप्ट कर ले, लेकिन अगर उसके कॉन्टैक्ट्स में से अधिकांश लोग यह सेटिंग ऑन नहीं करते, तो भी डेटा किसी न किसी रूप में क्लाउड सर्वर पर एक्सपोज हो सकता है।

व्हाट्सऐप का पक्ष: “कोर सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित”

दूसरी ओर, WhatsApp लगातार यह दावा करता रहा है कि उसके प्लेटफॉर्म पर भेजे गए मैसेज एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन से सुरक्षित रहते हैं। कंपनी के अनुसार, संदेश ट्रांसमिशन के दौरान कोई भी तीसरा पक्ष उन्हें पढ़ नहीं सकता, यहां तक कि कंपनी खुद भी नहीं।

हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार असली विवाद “इन-ट्रांजिट एन्क्रिप्शन” को लेकर नहीं है, बल्कि क्लाउड बैकअप सिस्टम को लेकर है, जहां सुरक्षा सेटिंग्स पूरी तरह यूजर के नियंत्रण में होती हैं।

2021 में आया था एन्क्रिप्टेड बैकअप फीचर

व्हाट्सऐप ने 2021 में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड बैकअप का विकल्प लॉन्च किया था, जिसमें यूजर्स अपने चैट बैकअप को पासवर्ड या एन्क्रिप्शन की से सुरक्षित कर सकते हैं। लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार, इस फीचर की जागरूकता अभी भी बहुत कम है, जिसके कारण अधिकांश यूजर डिफॉल्ट सेटिंग पर ही निर्भर रहते हैं।

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कानूनी और सुरक्षा बहस भी तेज

इस पूरे विवाद के बीच जनवरी 2026 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में एक क्लास-एक्शन केस भी दायर हुआ था, जिसमें आरोप लगाया गया कि व्हाट्सऐप के अंदरूनी सिस्टम के जरिए कर्मचारियों को मैसेज तक पहुंच मिल सकती है। कंपनी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इन्हें “झूठा और निराधार” बताया है।

टेक विशेषज्ञों की राय

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह विवाद तकनीकी खामी से ज्यादा यूजर अवेयरनेस की समस्या को उजागर करता है। उनके अनुसार, एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन तभी पूरी तरह प्रभावी होता है जब बैकअप और क्लाउड स्टोरेज भी समान रूप से सुरक्षित हों।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि दुरोव का बयान आंशिक रूप से सही हो सकता है, लेकिन इसे “फ्रॉड” कहना एक अतिशयोक्ति है क्योंकि सुरक्षा फीचर्स पहले से मौजूद हैं, केवल उनका उपयोग सीमित है।

बढ़ती डिजिटल प्राइवेसी की बहस

इस विवाद ने एक बार फिर डिजिटल प्राइवेसी, डेटा स्टोरेज और क्लाउड सिक्योरिटी पर वैश्विक बहस को तेज कर दिया है। जहां एक ओर मैसेजिंग प्लेटफॉर्म अपनी सुरक्षा को मजबूत बताने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर यूजर डेटा के वास्तविक नियंत्रण को लेकर सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं।

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