प्रतिबंधित गेमिंग ऐप्स के जरिए ठगी का खेल, फर्जी बैंक खाते, सिम और डिजिटल वॉलेट से ₹1 करोड़ से अधिक के लेनदेन का खुलासा; अंतरराष्ट्रीय लिंक की भी जांच शुरू

कानपुर में बड़ा साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़, ऑनलाइन गेमिंग ऐप घोटाले में आठ गिरफ्तार

Roopa
By Roopa
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कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में पुलिस ने एक संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह कथित तौर पर ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स के जरिए लोगों को भारी और त्वरित मुनाफे का लालच देकर ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहा था। संयुक्त कार्रवाई में साइबर क्राइम टीम के साथ स्थानीय इकाइयों ने पूरे नेटवर्क की परतें उजागर कीं।

जांच में सामने आया है कि यह सिंडिकेट फर्जी पहचान पर बनाए गए बैंक खातों और मोबाइल सिम कार्ड्स के जरिए संचालित हो रहा था। आरोपियों ने प्रतिबंधित गेमिंग ऐप्स जैसे Lotus365, Reddy Book, Kartikey और Dubai EXH के माध्यम से लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में मामूली मुनाफा दिखाकर भरोसा कायम किया जाता था, लेकिन बाद में निकासी (withdrawal) रोक दी जाती थी और संपर्क धीरे-धीरे खत्म कर दिया जाता था।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने 26 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, 54 एटीएम कार्ड, 24 पासबुक, एक चेकबुक और 30 सिम कार्ड बरामद किए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि ये सभी संसाधन अलग-अलग राज्यों के बैंक खातों से जुड़े थे, जिनमें तेलंगाना, पंजाब, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश शामिल हैं। इससे स्पष्ट होता है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था और सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था।

प्रारंभिक जांच में पिछले तीन महीनों के भीतर लगभग ₹50 लाख के संदिग्ध लेनदेन की पुष्टि हुई है। अधिकारियों के अनुसार कुल वित्तीय ट्रांजैक्शन ₹1 करोड़ से अधिक होने की आशंका है। फिलहाल पुलिस धनराशि को फ्रीज करने और पूरे वित्तीय नेटवर्क की गहराई से जांच में जुटी हुई है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सत्याम तिवारी, अनमोल विश्वकर्मा, नितिन गुप्ता, अभिषेक वर्मा, हितेश निगम, स्नेहिल बाजाज, सुल्तान अहमद और नौशाद के रूप में हुई है। पुलिस का कहना है कि ये सभी आरोपी बैंक खातों, सिम कार्ड और डिजिटल वॉलेट्स के संचालन में सक्रिय रूप से शामिल थे, जिनका उपयोग अवैध धन को ट्रांसफर और छिपाने के लिए किया जाता था।

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मामले में संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जांच एजेंसियां अब फरार अन्य सदस्यों की तलाश कर रही हैं और पूरे नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन की गहराई से पड़ताल जारी है। पुलिस का मानना है कि इस गिरोह के तार देश के बाहर तक जुड़े हो सकते हैं, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है।

इस बीच साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह ने इस तरह के मामलों को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ऐसे साइबर फ्रॉड में अपराधी यूजर्स की मनोवैज्ञानिक कमजोरी और “फास्ट रिटर्न” की लालसा का फायदा उठाते हैं। उनके अनुसार, “गेमिंग और इन्वेस्टमेंट ऐप्स के नाम पर चल रहे ये नेटवर्क पहले छोटे मुनाफे का झांसा देकर भरोसा बनाते हैं और फिर धीरे-धीरे बड़ी रकम को सिस्टम में फंसा लेते हैं। असली खतरा यह है कि यूजर को तब तक समझ नहीं आता जब तक पैसा पूरी तरह गायब नहीं हो जाता।”

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि डिजिटल वॉलेट, सिम जारी करने की प्रक्रिया और ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग सिस्टम को और अधिक सख्त किए बिना ऐसे नेटवर्क पर पूरी तरह रोक लगाना मुश्किल है।

अधिकारियों ने बताया कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह नेटवर्क केवल स्थानीय नहीं बल्कि व्यापक घरेलू और संभावित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय था।

इस तरह के साइबर फ्रॉड मामलों में फर्जी बैंक खातों के जरिए धन को कई परतों में विभाजित कर तेजी से ट्रांसफर किया जाता है, जिससे जांच एजेंसियों के लिए ट्रेल ट्रेस करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। शुरुआती छोटे मुनाफे के जरिए विश्वास जीतने के बाद बड़ी रकम निवेश करवाई जाती है और फिर पीड़ितों से संपर्क पूरी तरह खत्म कर दिया जाता है।

साइबर क्राइम अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान गेमिंग या निवेश ऐप में पैसा लगाने से पहले उसकी पूरी जांच करें और असामान्य रूप से अधिक लाभ के वादों से सतर्क रहें। संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट करने की सलाह दी गई है ताकि वित्तीय नुकसान से बचाव किया जा सके।

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