‘ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0’ में फर्जी बैंक खातों के जरिए बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा, 1,000 से अधिक शिकायतों से जुड़े अपराध के तार उजागर

क्रिप्टो निवेश का लालच बना जाल: टेक प्रोफेशनल से ₹69 लाख की ठगी, फर्जी ऐप के जरिए महीनों तक चलता रहा खेल

Roopa
By Roopa
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पुणे: डिजिटल निवेश के बढ़ते चलन के बीच साइबर ठगों ने एक बार फिर अपनी चालाकी से बड़ा खेल खेला है। पुणे के लोहेगांव इलाके में रहने वाले एक 48 वर्षीय टेक प्रोफेशनल को क्रिप्टोकरेंसी में मोटा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर करीब ₹69 लाख की ठगी का मामला सामने आया है। यह ठगी एक सुनियोजित साइबर फ्रॉड के तहत कई महीनों तक चलती रही, जिसमें पीड़ित को लगातार निवेश के लिए प्रेरित किया गया और नकली मुनाफा दिखाकर भरोसा कायम रखा गया।

पीड़ित, जो हडपसर स्थित एक प्रतिष्ठित कंपनी में कार्यरत है, ने अपनी शिकायत में बताया कि यह पूरा घटनाक्रम मई से नवंबर 2025 के बीच हुआ। शुरुआती स्तर पर उसने एक आवेदन के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके सत्यापन के बाद अब इस मामले में औपचारिक प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामले की जांच साइबर अपराध शाखा द्वारा की जा रही है।

जांच में सामने आया है कि पीड़ित को एक अज्ञात नंबर से एक संदेश प्राप्त हुआ, जिसमें एक लिंक भेजा गया था। जैसे ही उसने उस लिंक पर क्लिक किया, ठगों ने उससे संपर्क किया और खुद को क्रिप्टो ट्रेडिंग विशेषज्ञ बताकर बातचीत शुरू की। शुरुआती बातचीत में उन्हें भरोसेमंद बनाने के लिए पेशेवर अंदाज अपनाया गया और निवेश के सुरक्षित व लाभदायक होने का दावा किया गया।

ठगों ने पीड़ित को एक मोबाइल एप्लिकेशन डाउनलोड करने के लिए कहा, जिसे क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म बताया गया। ऐप इंस्टॉल करने के बाद पीड़ित ने छोटी राशि से निवेश शुरू किया, लेकिन उसे कोई वास्तविक लाभ नहीं मिला। इसके बावजूद ठग लगातार उसे यह भरोसा दिलाते रहे कि बड़े मुनाफे के लिए अधिक निवेश जरूरी है और वे हर कदम पर उसकी मदद करेंगे।

धीरे-धीरे पीड़ित को अधिक मूल्य वाली क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के लिए प्रेरित किया गया। उसे तीन अलग-अलग बैंक खातों के विवरण दिए गए, जिनमें उसे रकम ट्रांसफर करने के लिए कहा गया। ठगों ने बाजार में गिरावट और अवसर का हवाला देकर उसे बार-बार पैसे डालने के लिए उकसाया। इसी क्रम में पीड़ित ने कई बार ट्रांजेक्शन करते हुए कुल ₹69 लाख इन खातों में ट्रांसफर कर दिए।

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इस दौरान, ऐप पर उसे ₹80 लाख से अधिक का मुनाफा दिखाया गया, जिससे उसका भरोसा और मजबूत हुआ। लेकिन जब उसने अपनी क्रिप्टो होल्डिंग्स बेचकर पैसा निकालने की कोशिश की, तो ठगों ने तकनीकी अड़चनों और अतिरिक्त शुल्क का बहाना बनाकर प्रक्रिया को रोक दिया। यहीं से पीड़ित को शक हुआ और उसने समझा कि वह ठगी का शिकार हो चुका है।

जांच अधिकारियों के अनुसार, यह मामला साइबर ठगों द्वारा अपनाए जा रहे नए ट्रेंड को दर्शाता है, जिसमें नकली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और ऐप के जरिए लोगों को फंसाया जाता है। इस तरह के मामलों में ठग पहले भरोसा जीतते हैं, फिर धीरे-धीरे निवेश बढ़वाते हैं और अंत में निकासी के समय बाधाएं खड़ी कर देते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि क्रिप्टोकरेंसी और ऑनलाइन निवेश के नाम पर हो रही ठगी तेजी से बढ़ रही है, खासकर उन लोगों को निशाना बनाया जा रहा है जो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नए हैं या उच्च रिटर्न की उम्मीद रखते हैं। साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह कहते हैं, “साइबर अपराधी अब सोशल इंजीनियरिंग और फर्जी डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर लोगों के भरोसे के साथ खेल रहे हैं। वे नकली मुनाफा दिखाकर पीड़ित को मानसिक रूप से प्रभावित करते हैं और फिर धीरे-धीरे बड़ी रकम ठग लेते हैं।”

जांच एजेंसियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें और बिना सत्यापन के किसी ऐप या निवेश प्लेटफॉर्म पर भरोसा न करें। साथ ही, उच्च रिटर्न के वादों को लेकर सतर्क रहने और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत रिपोर्ट करने की सलाह दी गई है।

इस मामले में आगे की जांच जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खाते और डिजिटल प्लेटफॉर्म किन लोगों से जुड़े हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस नेटवर्क के तार अन्य राज्यों या देशों तक भी जुड़े हो सकते हैं, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है।

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