श्रीनगर: रियल एस्टेट सेक्टर में बढ़ते धोखाधड़ी के मामलों के बीच Srinagar से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक आवासीय संपत्ति सौदे में ₹55.11 लाख की ठगी के आरोप में आरोपपत्र दाखिल किया गया है। इस मामले में आरोपी पर आरोप है कि उसने एक खरीदार से पैसे लेकर उसी संपत्ति को किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया।
मामले के अनुसार, आरोपपत्र मेहराज-उद-दीन डार के खिलाफ दाखिल किया गया है, जो रावलपोरा इलाके का निवासी है और फिलहाल टेंगपोरा में रह रहा है। शिकायत में कहा गया कि आरोपी ने एक आवासीय मकान बेचने का सौदा किया और खरीदार से बड़ी रकम प्राप्त की, लेकिन इसके बावजूद न तो रजिस्ट्री पूरी की गई और न ही संपत्ति का कब्जा सौंपा गया।
जांच के दौरान यह सामने आया कि आरोपी ने न केवल मूल खरीदार को संपत्ति का स्वामित्व नहीं दिया, बल्कि उसी मकान को किसी अन्य व्यक्ति को भी बेच दिया। इस तरह एक ही संपत्ति को कई लोगों को बेचकर ठगी करने का मामला उजागर हुआ है। जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि शहरी इलाकों में इस तरह के फर्जीवाड़े के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जहां दस्तावेजों की कमी और सत्यापन में लापरवाही का फायदा उठाया जाता है।
जांच में एक और अहम तथ्य सामने आया कि संबंधित संपत्ति पहले से ही बैंक के पास गिरवी रखी गई थी। इसके बावजूद आरोपी ने खरीदार को इस जानकारी से अनभिज्ञ रखते हुए सौदा किया। इतना ही नहीं, शिकायतकर्ता ने इस भरोसे में कि सौदा पूरा हो जाएगा, उस संपत्ति से जुड़ा हाउसिंग लोन भी चुकता कर दिया।
जांच अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने कथित रूप से अपने खिलाफ कार्रवाई से बचने के लिए इस तरह के सौदों से अर्जित संपत्तियों को अपनी पत्नी के नाम पर ट्रांसफर करने की कोशिश की। इससे यह संदेह और गहरा हो गया कि ठगी की रकम को छिपाने और कानूनी प्रक्रिया को जटिल बनाने की योजना बनाई गई थी।
आर्थिक अपराध शाखा ने बैंक रिकॉर्ड, प्रॉपर्टी दस्तावेज और संबंधित लोगों के बयान के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला बनता है। इसके बाद आरोपपत्र को न्यायिक प्रक्रिया के लिए सक्षम अदालत में पेश किया गया है, जहां अब इस मामले की सुनवाई शुरू होगी।
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कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि प्रॉपर्टी फ्रॉड के मामलों में अक्सर कई स्तरों पर गलत जानकारी दी जाती है। खरीदारों को अधूरी या भ्रामक जानकारी देकर फंसाया जाता है और कई बार फर्जी दस्तावेजों के सहारे सौदे को अंजाम दिया जाता है। ऐसे मामलों में पीड़ित को ठगी का एहसास तब होता है जब वह संपत्ति पर कब्जा लेने या रजिस्ट्री कराने की कोशिश करता है।
यह मामला रियल एस्टेट लेन-देन में सतर्कता की जरूरत को भी उजागर करता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी संपत्ति को खरीदने से पहले उसके टाइटल की पूरी जांच करें, उस पर किसी प्रकार का कर्ज या विवाद तो नहीं है, इसकी पुष्टि करें और सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही भुगतान करें। इसके अलावा, विक्रेता की पृष्ठभूमि की जांच और कानूनी सलाह लेना भी जरूरी माना जाता है।
पिछले कुछ वर्षों में शहरी क्षेत्रों में प्रॉपर्टी से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों में वृद्धि देखी गई है। ठग अक्सर खरीदारों की जल्दबाजी और बेहतर मौके की तलाश का फायदा उठाकर उन्हें जाल में फंसा लेते हैं।
हालांकि इस मामले में आरोपपत्र दाखिल होना जांच की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि पीड़ित को पूरी राहत मिलने और रकम की वसूली में समय लग सकता है। यह पूरी तरह अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों और गवाहों पर निर्भर करेगा।
यह मामला एक बार फिर यह संकेत देता है कि प्रॉपर्टी के सौदे में थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है। ऐसे में पारदर्शिता और सावधानी ही इस तरह की ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
अब जब मामला अदालत में पहुंच चुका है, तो नजर इस बात पर रहेगी कि न्यायिक प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है और क्या इस तरह के मामलों में समय पर न्याय मिल पाता है।
