साइबर अपराधियों ने आतंकी जांच का डर दिखाया, बैंक खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर कर रकम हड़पी; पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की

आगरा में रिटायर्ड शिक्षक से डिजिटल अरेस्ट दिखाकर 25 लाख की साइबर ठगी

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By Roopa
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आगरा: आगरा के शमसाबाद क्षेत्र के बांगुरी गांव में रहने वाले रिटायर्ड शिक्षक तुकमान सिंह साइबर ठगों के हाथों भारी वित्तीय नुकसान का शिकार बने। ठगों ने उन्हें 24 घंटे डिजिटल अरेस्ट में रखा और 25 लाख रुपये हड़प लिए। आरोपियों ने झूठा दावा किया कि शिक्षक के खिलाफ देशविरोधी और आतंकी गतिविधियों की गोपनीय जांच चल रही है। रिटायरमेंट के बाद जमा उनकी जीवन भर की बचत इस योजना का शिकार बन गई।

तुकमान सिंह ने बताया कि 3 मार्च, 2026 को उन्हें एक फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को इंस्पेक्टर रंजीत सिंह बताया और वीडियो कॉल पर संपर्क किया। कॉल करने वाला वर्दी में था, जिससे स्थिति और डरावनी लग रही थी। शिक्षक को धमकी दी गई कि यदि वे जांच में सहयोग नहीं करेंगे या जानकारी किसी को देंगे तो उनके और उनके परिवार के खिलाफ गंभीर कार्रवाई की जाएगी। आरोपी ने यह भी कहा कि शिक्षक अगर निर्दोष पाए जाते हैं तो कोई कार्रवाई नहीं होगी और रकम वापस कर दी जाएगी।

ठगों ने उन्हें विश्वास दिलाने के लिए कहा कि सुप्रीम कोर्ट से उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया है। इस झूठे भय के कारण तुकमान सिंह डर के मारे फर्जी इंस्पेक्टर के निर्देशानुसार बैंक गए और बताए गए खाते में 25 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से ट्रांसफर कर दिए। अगले दिन अपने परिजनों को इस बारे में बताया तो उन्हें एहसास हुआ कि यह एक साइबर ठगी थी।

पीड़ित के परिजनों ने तुरंत साइबर क्राइम पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने तुंरत मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी। बैंक से संपर्क कर उस खाते में फंड फ्रीज करवा दिए गए, ताकि रकम ठगों तक ना पहुंच सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला साइबर ठगों की नई रणनीतियों को उजागर करता है। ठग अब डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों को मानसिक रूप से दबाव में लाते हैं। “अधिकारियों का भेष और आतंकी या देशविरोधी गतिविधियों का डर दिखाकर साइबर अपराधी पीड़ितों को पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते हैं। इसका उद्देश्य डर पैदा कर तत्काल धन प्राप्त करना है,” एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ ने बताया।

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पुलिस अधिकारी भी चेतावनी दे रहे हैं कि किसी भी अनजान कॉल या वीडियो कॉल पर विश्वास करके पैसे ट्रांसफर करना अत्यंत जोखिमपूर्ण है। डिजिटल माध्यम से धमकी, वर्चुअल अरेस्ट और सरकारी अधिकारियों का भेष दिखाना साइबर अपराधियों की सामान्य रणनीति बन गई है। ऐसे मामलों में तत्काल साइबर क्राइम सेल से संपर्क करना चाहिए।

आगरा में यह मामला साइबर अपराध के बढ़ते मामलों में नया उदाहरण बन गया है। खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में लोग झूठे अधिकारी या जांच का डर दिखाकर बड़ी रकम गंवा रहे हैं। पुलिस ने लोगों को सुझाव दिया है कि किसी भी बैंक ट्रांजैक्शन से पहले प्राप्त जानकारी की पुष्टि जरूर करें और कभी भी धमकी के दबाव में राशि ट्रांसफर न करें।

अधिकारियों की जांच से यह उम्मीद की जा रही है कि फर्जी खातों और डिजिटल संचार चैनलों का पता लगाकर ठगों की पहचान और गिरफ्तारी संभव होगी। यह घटना एक चेतावनी के रूप में सामने आई है कि साइबर अपराधियों के मानसिक दबाव और डिजिटल जाल से बचाव के लिए हर व्यक्ति को सतर्क रहना जरूरी है।

तुकमान सिंह का मामला यह भी स्पष्ट करता है कि केवल व्यक्तिगत सावधानी ही नहीं बल्कि समय पर रिपोर्टिंग और पुलिस सहयोग ही साइबर ठगी को रोका जा सकता है। डिजिटल लेनदेन और इंटरनेट आधारित धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, इसलिए जागरूकता और सतर्कता अब अपरिहार्य हो गई है।

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