मुंबई: बंड्रा स्थित डॉ. बलिराम हिराय कॉलेज ऑफ़ आर्किटेक्चर में पढ़ रहे BSc/BVov (इंटीरियर डिज़ाइन) के छात्रों ने कॉलेज पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रों ने शिकायतों में शैक्षणिक धोखाधड़ी, आर्थिक अनियमितता, संस्थागत भ्रामक प्रचार और मानसिक उत्पीड़न का उल्लेख किया है। ये शिकायतें 2021-22 से लेकर 2025 तक के पांच बैचों के छात्रों द्वारा दर्ज कराई गई हैं।
छात्रों का कहना है कि उन्हें कोर्स के बारे में शुरू में बताया गया था कि उनका प्रोग्राम सांगई यूनिवर्सिटी, मणिपुर से संबद्ध है। हालांकि, 2024 में इस विश्वविद्यालय की मान्यता रद्द कर दी गई थी। छात्रों का दावा है कि उन्हें इस बदलाव की जानकारी नहीं दी गई, और उन्होंने 2025 में अंतिम वर्ष पूरी कर ली। इसके बावजूद, कॉलेज ने उन्हें मार्कशीट और डिग्री देने में देरी की।
पिछले महीने छात्रों को बताया गया कि अब उनकी डिग्रियां सिक्किम इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के माध्यम से दी जाएंगी। छात्रों ने कहा कि यह विश्वविद्यालय भी UGC डिफॉल्टर लिस्ट में शामिल है। लगातार अनुरोध करने के बावजूद कॉलेज ने इस संबद्धता का कोई प्रमाण नहीं दिया।
14 मार्च को पहले बैच के छात्रों को आखिरकार मार्कशीट प्राप्त हुई। लेकिन छात्रों का कहना है कि उनमें अंक और विवरण बदल दिए गए, और कुछ महत्वपूर्ण विषय जैसे कि डिसर्टेशन हटा दिए गए। उनका दावा है कि विश्वविद्यालय इन विषयों को पढ़ाने की अनुमति नहीं देता। छात्रों के अनुसार यह उनके करियर पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।
छात्रों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए कॉलेज प्रशासन के खिलाफ आर्थिक और शैक्षणिक अनियमितताओं को उजागर किया। उनका कहना है कि प्रशासन ने पारदर्शिता का अभाव दिखाते हुए उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया। TOI ने कॉलेज से प्रतिक्रिया मांगी, लेकिन किसी अधिकारी ने कोई जवाब नहीं दिया।
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शिकायतों में मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- कोर्स के बारे में गलत या भ्रामक जानकारी देना।
- विश्वविद्यालय की मान्यता रद्द होने के बाद भी छात्रों को दाखिला देना।
- मार्कशीट और डिग्री में विवरण में गड़बड़ी और अंक बदलना।
- छात्रों को महत्वपूर्ण विषयों की पढ़ाई से वंचित करना।
- प्रशासन की ओर से पारदर्शिता और प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने में असफलता।
- छात्रों को मानसिक उत्पीड़न और तनाव में रखना।
छात्रों ने पुलिस से कॉलेज के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। शिक्षा विशेषज्ञों और शिक्षाविदों का कहना है कि ऐसे मामलों में छात्रों के अधिकारों की रक्षा करना और कॉलेज की जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च शिक्षा संस्थानों की विश्वविद्यालय से वैध संबद्धता और डिग्री की वैधता की पुष्टि करना छात्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। किसी भी प्रकार की अनियमितता छात्रों के करियर पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकती है।
मुंबई के शिक्षा जगत में यह मामला संकट का संकेत माना जा रहा है, क्योंकि अन्य संस्थाओं में भी इसी तरह की भ्रामक जानकारी और डिग्री संबद्धता की कमी की शिकायतें सामने आई हैं।
छात्रों का कहना है कि वे इस मुद्दे को सार्वजनिक करना चाहते हैं, ताकि अन्य छात्र भविष्य में ऐसी अनियमितताओं से बच सकें। इस घटना ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा विभाग के बीच विश्वास संकट पैदा कर दिया है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस और संबंधित शिक्षा विभाग कौन से कदम उठाते हैं और छात्रों को उनके अधिकार और वैध डिग्री दिलाने के लिए क्या कार्रवाई होती है।
