करिमनगर: तेलंगाना पुलिस ने करिमनगर में एक बड़े ‘म्यूल बैंक अकाउंट’ नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसका इस्तेमाल साइबर फ्रॉड के पैसों को रूट करने के लिए किया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में पता चला कि इस नेटवर्क के जरिए लगभग ₹138 करोड़ के लेनदेन किए गए।
साइबर और बैंकिंग धोखाधड़ी की जांच के तहत ऑपरेशन क्रैकडाउन 1.0 के दौरान पुलिस ने 24 आरोपियों की पहचान की और शुक्रवार को 13 को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारियों में बैंक अधिकारी भी शामिल हैं। पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह नेटवर्क बैंक और वर्चुअल अकाउंट्स के जरिए बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करता था।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि लगभग ₹12.25 करोड़ वर्चुअल अकाउंट्स के जरिए और ₹125.80 करोड़ म्यूल अकाउंट्स के जरिए रतनकार बैंक (RBL) में ट्रांसफर किए गए, जिससे कुल ट्रांजेक्शन राशि लगभग ₹138 करोड़ हुई। इसमें सहकारी समितियों से जुड़े वर्चुअल अकाउंट प्लेटफॉर्म भी शामिल थे।
पुलिस ने बताया कि इस ऑपरेशन में मुख्य आरोपी बंदारी सायराम ने फर्जी म्यूल अकाउंट्स खोलने और उन्हें संचालित करने की प्रक्रिया की देखरेख की। इन खातों को चीन से संचालित साइबर अपराधियों के लिए इस्तेमाल किया गया। मीडियम के माध्यम से लोगों को कमीशन का लालच देकर अकाउंट खोलवाया गया और खातेधारकों ने ATM कार्ड और बैंकिंग क्रेडेंशियल्स सौंप दिए। इसके बाद इन खातों के जरिए साइबर फ्रॉड मनी अक्सर विदेशों में भेजा गया।
गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं: बंदारी सायराम (30), जगरमल; अनुमंडला रंजीत (36), बुग्गारम; अलीगेटी मल्लेशम (37), धर्माराम; बोगा राकेश (35), जगरमल; बांदी प्रणय (25), रामदुगु, करिमनगर। बैंक अधिकारियों में भुवनगिरी कल्याण (52), हनमकोंडा, RBL बैंक मैनेजर शामिल हैं, जबकि आयेशा बेगम (30), करिमनगर गर्भवती होने के कारण गिरफ्तार नहीं हुई।
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अकाउंट होल्डर्स में शामिल हैं: विभुदि रामकुमार (37), धर्माराम; नटरला श्रीनिवास (39), लक्ष्मिपुर; कर्रे राजू (35), वारंगल; कालेदा महेन्द्र (36), जगरमल; कोंद्र नारहरी (37), जगरमल; कालेदा राजेश (27), जगरमल।
पुलिस कमिश्नर ने नागरिकों से अपील की है कि वे साइबर फ्रॉड की जानकारी तुरंत 1930 कॉल या आधिकारिक वेबसाइट पर दें। उन्होंने बताया कि मामले की आगे भी जांच जारी है।
रिटायर्ड NIT प्रोफेसर से ₹1.1 करोड़ की ठगी
हनमकोंडा: रिटायर्ड असिस्टेंट प्रोफेसर, प्रभाकर श्यामला (86), वड्डेपल्ली, से ऑनलाइन धोखाधड़ी में ₹1.1 करोड़ ठगे गए। धोखाधड़ी करने वालों ने व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए उन्हें स्टॉक मार्केट सलाहकार बनकर फंसाया और फर्जी निवेश के नाम पर पैसे जमा करवाए। बाद में उन्होंने और ₹50 लाख की मांग की। परिवार ने साइबर क्राइम पुलिस से संपर्क किया और मामला दर्ज कराया।
यह गिरफ्तारी और खुलासा यह संदेश देता है कि बैंकिंग और साइबर फ्रॉड में सतर्क रहना आवश्यक है। जनता को सलाह दी गई है कि किसी भी संदिग्ध वित्तीय गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित एजेंसी को दें।
इस ऑपरेशन से न केवल अपराधियों की पहचान और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हुई है, बल्कि भविष्य में संभावित साइबर अपराधियों के लिए भी सावधानी का संदेश गया है।
CBI और अन्य जांच एजेंसियां मामले की पूरी जांच कर रही हैं ताकि सभी अपराधियों और उनके अपराधों को अदालत में साबित किया जा सके और वित्तीय संस्थानों में भरोसा बना रहे।
