नई दिल्ली: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 27 मार्च को Payments Vision 2028 दस्तावेज़ जारी किया, जो देश के डिजिटल भुगतान तंत्र के लिए अगले तीन सालों की रणनीति और 15 ठोस पहल पेश करता है। इस योजना का उद्देश्य भारत के भुगतान क्षेत्र को सुरक्षित, निष्पक्ष और वैश्विक स्तर पर सक्षम बनाना है।
सबसे प्रमुख पहल ‘Shared Responsibility Framework’ है, जिसके तहत अब डिजिटल फ्रॉड के मामलों में सिर्फ ग्राहक के बैंक पर ही नहीं, बल्कि रिसीवर बैंक पर भी जिम्मेदारी होगी। वर्तमान नियमों के अनुसार, अगर किसी यूज़र के बैंक खाते से बिना अनुमति के पैसा गायब हो जाता है, तो पूरी हानि ग्राहक के बैंक द्वारा वहन की जाती है। नया ढांचा यह सुनिश्चित करेगा कि दोनों बैंक – भेजने वाले और प्राप्तकर्ता – मिलकर फ्रॉड की जिम्मेदारी लें, जिससे बैंक खातों की सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकने के उपाय प्रभावी होंगे।
दस्तावेज़ में कहा गया है, “संतुलित जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए Shared Responsibility Framework की खोज की जाएगी, जिसमें ग्राहक का बैंक (issuer) और लाभार्थी का बैंक दोनों मिलकर डिजिटल भुगतान में अनधिकृत लेन-देन से उत्पन्न जिम्मेदारी उठाएंगे। यह दोनों पक्षों को मजबूत फ्रॉड डिटेक्शन और रोकथाम के उपाय लागू करने के लिए प्रेरित करेगा और समय पर हस्तक्षेप सुनिश्चित करेगा, जिससे उपभोक्ता सुरक्षा और डिजिटल भुगतान पर भरोसा बढ़ेगा।”
RBI ने Payments Switching Service (PaSS) की भी रूपरेखा पेश की है। यह सुविधा उन ग्राहकों के लिए है जो अपने बैंक खाते बदलते हैं या सैलरी अकाउंट ट्रांसफर करते हैं। PaSS के जरिए ग्राहक सभी मौजूदा लेन-देन निर्देश, जैसे EMIs, सैलरी, ऑटो-डेबिट आदि, पुराने खाते से नए खाते में सहजता से ट्रांसफर कर सकेंगे।
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इसके अलावा, दस्तावेज़ में सभी डिजिटल भुगतान मोड को ऑन या ऑफ करने की सुविधा ग्राहकों के बैंक ऐप के माध्यम से देने की योजना है। क्रॉस-बॉर्डर भुगतान फ्रेमवर्क में सुधार, रेमिटेंस लागत कम करना और MSMEs के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को आसान बनाना भी इस योजना के प्रमुख बिंदु हैं।
दस्तावेज़ में इलेक्ट्रॉनिक चेक्स, साइबर जोखिम ढांचा (Cyber Risk Framework) और फिनटेक कंपनियों के लिए सुरक्षा मानक लागू करने की रूपरेखा भी दी गई है। RBI का कहना है कि चेक डिज़ाइन और सुरक्षा विशेषताओं की समीक्षा की जाएगी ताकि धोखाधड़ी की रोकथाम मजबूत हो और सभी चेक इंस्ट्रूमेंट्स में समानता और श्रेष्ठ प्रथाओं का पालन सुनिश्चित हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि ये पहल न केवल डिजिटल भुगतान में उपभोक्ताओं की सुरक्षा बढ़ाएंगी, बल्कि बैंकिंग प्रणाली की जवाबदेही और पारदर्शिता भी सुनिश्चित करेंगी। Shared Responsibility Framework लागू होने पर, बैंक साइबर अपराधियों के खिलाफ सक्रिय निगरानी और समय पर कार्रवाई करने के लिए बाध्य होंगे।
RBI की यह योजना यह संदेश देती है कि डिजिटल लेन-देन में उपभोक्ताओं को सुरक्षित और भरोसेमंद वातावरण उपलब्ध कराने के लिए नियामक सक्रिय हैं। साथ ही, बैंक और भुगतान कंपनियों के लिए उन्नत फ्रॉड डिटेक्शन, मॉनिटरिंग और रियल-टाइम हस्तक्षेप अनिवार्य होगा।
