चंडीगढ़/रेवाड़ी: हरियाणा के रेवाड़ी जिला जेल से दो साइबर ठगी के आरोपियों के फरार होने के मामले में प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए सात जेल वार्डरों को निलंबित कर दिया है। शुरुआती जांच में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद यह कदम उठाया गया। हालांकि फरार हुए दोनों आरोपी 24 घंटे के भीतर फिर से गिरफ्तार कर लिए गए, लेकिन इस घटना ने जेल सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के मुताबिक, यह घटना शुक्रवार शाम की है जब जेल में बंद दो अंडरट्रायल कैदी—जाहिद (21) और फैजान (22)—अचानक अपनी बैरक से गायब पाए गए। रोजाना की गिनती के दौरान उनकी अनुपस्थिति का पता चला, जिसके बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई और पूरे इलाके में अलर्ट जारी कर सघन तलाशी अभियान शुरू किया गया।
दोनों आरोपी साइबर ठगी के मामलों में गिरफ्तार किए गए थे। जांच एजेंसियों के अनुसार, इनके बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने में किया जाता था। ऐसे में उनकी फरारी को सुरक्षा एजेंसियों ने गंभीर खतरे के रूप में लिया और तेजी से कार्रवाई शुरू की गई।
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने जेल परिसर में चल रहे निर्माण कार्य का फायदा उठाया। उन्होंने एक सीढ़ी का इस्तेमाल किया और दीवार फांदकर फरार हो गए। यह तथ्य अपने आप में जेल सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़ा करता है, खासकर तब जब यह जेल आधुनिक सुविधाओं से लैस बताई जाती है।
फरारी के बाद पुलिस और विशेष टीमों ने संयुक्त अभियान चलाया। शनिवार सुबह जाहिद को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि दूसरे आरोपी फैजान को पकड़ने के लिए टीमों को उत्तर प्रदेश के रामपुर भेजा गया। उसे भी शनिवार शाम तक गिरफ्तार कर लिया गया। इस तरह दोनों आरोपियों को 24 घंटे के भीतर दोबारा हिरासत में ले लिया गया।
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घटना के बाद जेल प्रशासन ने तत्काल जांच के आदेश दिए। प्रारंभिक जांच में सात वार्डरों—जिनमें पांच हेड वार्डर और दो वार्डर शामिल हैं—की ड्यूटी के दौरान लापरवाही पाई गई। हालांकि यह स्पष्ट किया गया कि उन्होंने आरोपियों को भागने में सीधे तौर पर मदद नहीं की, लेकिन उनकी निगरानी में कमी के चलते यह गंभीर चूक हुई।
निलंबन के साथ ही इन सभी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि आगे की जांच में किसी वरिष्ठ स्तर की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे मामले की विस्तृत जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की टीम गठित की गई है, जो सुरक्षा चूक के कारणों और जिम्मेदारियों का आकलन करेगी।
बताया जा रहा है कि रेवाड़ी की यह जिला जेल करीब ₹95 करोड़ की लागत से तैयार की गई आधुनिक सुविधा है। 50 एकड़ क्षेत्र में फैली इस जेल में लगभग 1,000 कैदियों को रखने की क्षमता है। यहां 11 बैरक, दो हाई-सिक्योरिटी वार्ड और एक कंट्रोल रूम जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। बावजूद इसके, इस तरह की घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या तकनीकी सुविधाओं के साथ मानवीय सतर्कता भी उतनी ही मजबूत है या नहीं।
फिलहाल दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि फरारी की योजना कैसे बनाई गई और क्या इसमें किसी बाहरी या आंतरिक मदद का हाथ था। साथ ही, उनके खिलाफ फरारी से संबंधित अलग मामला भी दर्ज किया गया है।
यह घटना जेल प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद खामियों को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल आधुनिक ढांचा पर्याप्त नहीं होता, बल्कि सतत निगरानी, जवाबदेही और अनुशासन भी उतने ही जरूरी हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती है—दोषियों पर कार्रवाई के साथ-साथ सिस्टम में सुधार कर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना।
